अयोध्या केस: असदुद्दीन ओवैसी बोले- मुझे नहीं पता क्या फैसला आएगा, लेकिन मैं चाहता हूं...
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नई दिल्ली: अयोध्या केस की सुनवाई बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पूरी हो गई। सुनवाई पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित लिया। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ इस पर अपना फैसला 17 नवंबर से पहले सुना सकती है। पूरे देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अयोध्या मामले पर बड़ा बयान दिया।

असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान
असदुद्दीन ओवैसी ने एक जनसभा को संबोधित कहते हुए कहा कि मुझे नहीं पता क्या फैसला आएगा, लेकिन मैं चाहता हूं फैसला ऐसा आए जिससे कानून के हाथ मजबूत हों। बाबरी मस्जिद को गिराया जाना कानून का मजाक था। उन्होंने कांग्रेस पर इसे लेकर निशाना भी साधा। इस वीडियो को एआईएमआईएम पार्टी के ऑफिशियल अकाउंट से शेयर किया गया है।

40 दिन चली सुनवाई
गौरतलब है कि अगस्त से शुरू हुई इस मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर तक चली थी। सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई में 5 जजों की संविधान पीठ इस मामले ने प्रतिदिन लगातार 40 दिन तक सुनवाई की। इस बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा स्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नज़ीर शामिल हैं। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इस मुद्दे पर सुनवाई पूरी करते हुए कोर्ट ने संबंधित पक्षों को 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिये तीन दिन का समय भी दिया है।

सुनवाई से पहले किया था मध्यस्था पैनल का गठन
गौरतलब है कि 6 अगस्त से इस मामले की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एफएम इब्राहिम खलीफुल्लाह की अध्यक्षता में एक मध्यस्थता पैनल का गठन किया, जिसमें आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू सदस्य के रूप में शामिल थे। पैनल को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया गया था। हालांकि, अगस्त की शुरुआत में एक रिपोर्ट ने मध्यस्थता के प्रयासों की विफलता का संकेत दिया।












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