नज़रिया: बिहार में हो रही हिंसक झड़पों का मक़सद क्या है?

बिहार में बहुत दिनों के बाद कई इलाक़े क़ौमी फ़साद वाले तनाव की ज़द में आ गए हैं. आगज़नी और हिंसक झड़पों से प्रभावित क्षेत्रों के लोग काफ़ी ख़ौफ़ज़दा हैं.

इन घटनाओं में मौतें भले न हुई हों, लेकिन दो संप्रदायों के बीच तनातनी से हिंसक संघर्ष बढ़ने की आशंका ज़ोर पकड़ चुकी है. हालाँकि राज्य का प्रशासन अब हालात को पूरी तरह नियंत्रण में बता रहा है.

सियासत का ही ये कमाल है कि वह धार्मिक उत्सवों को भी सांप्रदायिक विद्वेष ज़ाहिर करने का मौक़ा बना देने में कामयाब हो जाती है.

हिंसक झड़प, बिहार
BBC
हिंसक झड़प, बिहार

कई जगहों पर फैले हैं हिंसक संघर्ष

औरंगाबाद, नाथनगर-भागलपुर, मुंगेर और रोसड़ा-समस्तीपुर ही नहीं, कई और जगहों पर इस नफ़रत की चिंगारी भड़की है.

इतने फैलाव के साथ बढ़ते हिंदू-मुस्लिम तनाव को लेकर यहाँ वोटवादी सियासी जमातों में कोई मानववादी चिंता नहीं दिखती. लगता है, दंगों के प्रायोजित होने जैसी ख़बरों पर दंग रह जाने का ज़माना गया.

'भारत का अच्छा मुसलमान कैसा हो, वाजिब नहीं है कि हिंदू तय करें'

एक केंद्रीय मंत्री के पुत्र पर आरोप है कि उन्होंने नाथनगर (भागलपुर) में रामनवमी-जुलूस के दौरान हिंदुओं को मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काया.

मंत्री-पुत्र की गिरफ़्तारी का वारंट निकला हुआ है और नीतीश सरकार का दावा है कि यह गिरफ़्तारी होकर रहेगी.

बिहार, हिंसक झड़प
BBC
बिहार, हिंसक झड़प

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण

सांप्रदायिकता के सवाल पर नीतीश कुमार अपनी सत्ता-साझीदार बीजेपी से अलग रुख़ का इशारा देते रहे हैं.

लेकिन उनके इस रुख़ को चुनौती दे रहे मौजूदा सांप्रदायिक झगड़ों ने यहाँ विपक्ष को उन पर सवाल उठाने का मौक़ा दे दिया है.

वैसे, इस सरकार के लिए यह राहत की ही बात है कि हालात बेक़ाबू नहीं हुए और पुलिस-प्रशासन की सख़्ती कारगर रही.

चूँकि इसबार रामनवमी में हिंदू उभार कुछ अधिक दिखा, इसलिए माना जा रहा है कि इसके पीछे लगी ताक़त का मक़सद ही है सांप्रदायिक ध्रुवीकरण.

तभी ऐसी आशंका उभरी है कि ध्रुवीकरण का यही प्रयास आगामी लोकसभा चुनाव से पहले किसी व्यापक हिंदू-मुस्लिम टकराव का कारण न बन जाए.

बिहार, हिंसक झड़प
BBC
बिहार, हिंसक झड़प

बिहार का मौजूदा हाल

तो क्या हालिया फ़सादी वारदातों को भी उसी मक़सद के मद्देनज़र एक रिहर्सल समझा जाय?

देखिये, कुछ भी संभव है क्योंकि राजनीति दिन-ब-दिन निर्मम होती जा रही है.

बिहार की मौजूदा राजनीति का हाल और उसकी चाल, दोनों डोलमाल वाली स्थिति में है.

राजनीतिक पार्टियों की हालत

बीजेपी के सहयोगी दलों में से एक, यानी जीतन माँझी की पार्टी, एनडीए गठबंधन से निकल चुकी है.

बाक़ी रामविलास पासवान और उपेन्द्र कुशवाहा अपनी-अपनी पार्टी के रुख़ या रवैये की झलक बीजेपी को दिखा चुके हैं.

हाल ही ये दोनों नेता जब नीतीश कुमार से अलग-अलग मिले, तब बीजेपी के कान खड़े हो गए.

चर्चा होने लगी कि सत्ता में वर्चस्व-मद से चूर बीजेपी को झटके की आहट जैसा अहसास कराने के लिए ही नीतीश, रामविलास और उपेन्द्र की गुफ़्तगू हुई.

साथ ही इसी बीच नीतीश कुमार से पप्पू यादव की भी मुलाक़ात के कुछ ख़ास मतलब निकाले जाने लगे.

सियासत में ये सब चलता रहता है और होता वही है, जिसमें नेताओं के निपट स्वार्थ सधते हैं.

नीतीश कुमार, बिहार, हिंसक झड़प
Getty Images
नीतीश कुमार, बिहार, हिंसक झड़प

बीजेपी का अपने बूते सत्ता हासिल करने का लक्ष्य?

जिस दिन बीजेपी नेतृत्व को लगेगा कि नीतीश कुमार को दरकिनार कर के बिहार में अपने बूते सत्ता हासिल करने जैसा जनसमर्थन तैयार है, उसी दिन संबंध विच्छेद.

पर यह तभी होगा, जब बीजेपी को लगे कि उसके हक़ में उठ रही हिंदू-लहर में नीतीश कुमार की पार्टी बाधक हो रही है और कोई असरदार वोटबैंक भी नीतीश के साथ नहीं रहा.

दरअसल हुआ ये है कि बुनियादी मुश्किलों से निजात नहीं पाने के सबब मोदी सरकार से आम लोगों का मोहभंग हो रहा है.

इसलिए बीजेपी को लगता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में 'रामभरोसे' ही नैया पार लग सकती है.

जबकि मेरे ख़याल से बिहार में जनमत को हिंदू-लहर पर बिठाना बड़ा कठिन है और नैया डूबने का भी ख़तरा है.

बिहार, हिंसक झड़प
BBC
बिहार, हिंसक झड़प

जातीय चेतना पर धार्मिक चेतना हावी?

लालू यादव ने इतना तो ज़रूर किया है कि बिहार में जातीय चेतना पर धार्मिक चेतना को हावी नहीं होने दिया. जबकि उत्तर प्रदेश में कुछ हद तक ऐसा हो गया.

यह बात और है कि लालू यादव के लंबे कारावास की वजह से बीजेपी को बिहार में स्थिति कुछ अपने अनुकूल दिखने लगी है.

इसी कारण पिछड़े वर्ग और दलित समुदाय के बीच हिंदूवादी संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है और इसका नज़ारा विगत रामनवमी में भी दिखा.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के ख़िलाफ़ लालू यादव जैसी मुखरता उनके पुत्र तेजस्वी में दिखना अभी बाक़ी है.

बिहार, हिंसक झड़प
Getty Images
बिहार, हिंसक झड़प

बीजेपी की नींद क्यों है हराम?

यह भी तय है कि नीतीश ख़ेमे की फिर से लालू ख़ेमे से दोस्ती असंभव है.

ऐसी सूरत में अगर बीजेपी के मौजूदा सहयोगियों का एक अलग फ़्रंट बनता भी है तो तिकोने संघर्ष का फ़ायदा बीजेपी उठा ले जाएगी.

फ़िलहाल तो राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस गठबंधन के साथ दिख रहे बड़े या तगड़े गठबंधन का डर ही बीजेपी की नींद हराम किये हुए है.

शायद इसलिए भी बिहार पर सांप्रदायिक संताप का गहरा साया मँडराने लगा है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

क्या मोदी की दोस्ती में बेबस हुए नीतीश कुमार

औरंगाबाद में इस तरह भड़की सांप्रदायिक हिंसा

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+