Attack on Rakesh Tikait: जानिए क्या है राकेश टिकैत विवाद? जिस वजह से सिर पर मारी लाठी, हुई धक्का-मुक्की
Attack on Rakesh Tikait: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) के साथ मार-पीट का मामला सामने आया है। मुजफ्फरनगर में आयोजित जन आक्रोश रैली के दौरान राकेश टिकैत को भीड़ ने घेर लिया। इस दौरान उनके ऊपर किसी शख्स ने डंडा चला दिया। जिसके बाद उनकी पगड़ी खुल गई।
वहीं कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने राकेश टिकैत को भीड़ से बचा कर सुरक्षित स्थान पर ले गए।

जानिए क्यों हुआ राकेश टिकैत का विरोध
बता दें कि, किसान नेता राकेश टिकैत के भाई और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत (Naresh Tikait) ने पिछले दिनों सिंधु जल समझौते के फैसले को रद्द करने के फैसले पर आपत्ति जताई थी। वहीं राकेश टिकैत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार मानने के लिए भी सरकार पर सवाल उठाया था। इस वजह से लोगों ने राकेश टिकैत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
पहलगाम हमले के विरोध में था रैली
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के विरोध में मुजफ्फरनगर के हिंदू संगठनों ने बंद का ऐलान किया था। इस दौरान आक्रोश रैली भी निकाली गई। इस रैली में शामिल होने आए किसान नेता राकेश टिकैत को लोगों ने विरोध किया। इसी दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की हो गई और कुछ लोगों ने उनके ऊपर लाठी चला दिया।
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राकेश टिकैत ने क्या कहा था?
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पहलगाम हमले पर बयान देते हुए कहा था कि, यह घटना किसे फायदा पहुंचा रही है? हिंदू-मुस्लिम का कार्ड कौन खेल रहा है? इसका जवाब उनके अंदर ही छुपा है। उन्होंने आगे कहा, जो चोर है, जिसने यह काम किया है, वो पाकिस्तान में नहीं है, बल्कि यहीं है।
टिकैत ने गांवों में होने वाले अपराधों से एक विवादास्पद तुलना करते हुए कहा,'जब गांव में कोई हत्या होती है, तो पुलिस सबसे पहले उसी व्यक्ति को पकड़ती है जिसे इसका लाभ मिल सकता है, जैसे कि ज़मीन वाला। इस घटना के पीछे जो है, वो कहां मिलेगा? चोर तो आप ही में से है, पाकिस्तान में नहीं।'
नरेश टिकैत ने भी दिया था विवादित बयान
वहीं भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने सरकार द्वारा पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले को गलत फैसला बताया था। उन्होंने कहा कि, 'यह एक गलत फैसला है। संधि जारी रहनी चाहिए थी। हम इसके खिलाफ हैं। हम किसान हैं और हर किसान को पानी की ज़रूरत होती है।'
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