अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने की जरूरत को समझा, PM मोदी ने पूर्व पीएम को किया याद
Atal Bihari Vajpayee 100th birthday: आज 25 दिसंबर का दिन हम सबसे लिए बहुत खास है क्योंकि आज हम सब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं वर्षगांठ मना रहे है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता अटल बिहारी जन्म के शताब्दी वर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद करते हुए देश के लिए उनके योगदान को याद किया है।
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पीएम मोदी ने लिखा- अटल बिहारी जी ने सत्ता में रहते हुए विचारधारा की वकालत की, विपक्ष के नेता के रूपा में संविधान के लिए लड़ाई लड़ी। वो एक दूरदर्शी नेता थे, जिनके मार्गदर्शन और नीतियों ने भारत पर अमिट छाप छोड़ी है। प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को परिवर्तनकारी समय के माध्यम से आगे बढ़ाया।

अटल बिहारी के महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को लागू किया और भारत को 21वीं सदी में पहुंचाया।उनके विचार वह सुशासन के विचार और हमें ऊंचे लक्ष्य रखने और अपने देश के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करते रहते है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
अटल बिहारी के कार्यकाल में स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई, जिससे देश में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में काफी सुधार हुआ। इसके अलावा, उनकी सरकार ने प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्षेत्रों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया, जिसने भारत के आधुनिकीकरण की नींव रखी।
पोखरण परीक्षण
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व की साहसिक निर्णय लिए, खास तौर पर 1998 में पोखरण परीक्षणों के दौरान देश ने इन परमाणु परीक्षणों ने देश की अलग पहचान बनाई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करने के बावजूद वैश्विक मंच पर भारत की संप्रभुता और ताकत को साबित किया। राष्ट्र की संप्रभुता और शांति के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और चुनौतियों के माध्यम से भारत को ईमानदारी से आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया।
सर्व शिक्षा अभियान
अटल बिहारी का शासन केवल आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के बारे में नहीं था; इसने सभी के लिए शिक्षा पर भी जोर दिया। उनके नेतृत्व में शुरू किए गए सर्व शिक्षा अभियान का उद्देश्य शिक्षा को सार्वभौमिक बनाना था, जो एक शिक्षित और प्रबुद्ध भारत के लिए अटल बिहारी का दृष्टिकोण का सबूत था।
NDA के गठन से भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाया
अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के गठन के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने देश में राजनीतिक गठबंधनों को फिर से परिभाषित किया।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें कई राजनीतिक चुनौतियों और विरोध का सामना करना पड़ा, फिर भी लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कभी कम नहीं हुई। चाहे वह अनैतिक राजनीतिक प्रथाओं से बचने के लिए 1996 में इस्तीफा देने का फैसला करना हो या संविधान के हित में अपनी पार्टी का विलय करना हो, उनके कार्यों ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के प्रति अटूट समर्पण का प्रमाण है।
संयुक्त राष्ट्र संघ को हिंदी में संबोधित किया
वाजपेयी जी एक सम्मानित सांस्कृतिक हस्ती भी थे, जिन्होंने हिंदी में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने वाले पहले भारतीय नेता बनकर भारत की विरासत पर अपने गर्व को दर्शाया। एक कवि और लेखक के रूप में उनका योगदान पीढ़ियों तक गूंजता रहा, जो उनके दार्शनिक दृष्टिकोण और राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम की अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। उनकी साहित्यिक रचनाएँ प्रेरणा देती रहेगी।












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