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अटल बिहारी वाजपेयी को कभी मुशर्रफ भी नहीं भुुला पाएंगे, हैंडशेक के बाद जनरल को सिखाया था सबक

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नई दिल्‍ली। जिन लोगों ने भारत और पाकिस्‍तान के बीच पिछले तीन दशकों के दौरान रिश्‍तों को देखा है, उन्‍हें साल 2002 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुआ वह सार्क सम्‍मेलन भी याद होगा जिसमें तत्‍कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने शिरकत की थी। वह 11वां सार्क सम्‍मेलन था और उस समय भारत और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते कारगिल युद्ध, आगरा समिट और संसद पर हमले के बाद काफी तनावपूर्ण हो चुके थे। यहां पर मुशर्रफ ने जो अंदाज पेश किया उसकी उम्‍मीद किसी को नहीं थी लेकिन वाजपेयी ने जो कड़ा संदेश सार्क के जरिए पाकिस्‍तान को दिया, उसकी उम्‍मीद भी मुशर्रफ ने नहीं की थी। ये भी पढ़ें-वाजपेयी के कार्यकाल में 22 वर्षों बाद अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने किया भारत दौरा

हाथ मिलाने को आगे बढ़े थे मुशर्रफ

हाथ मिलाने को आगे बढ़े थे मुशर्रफ

11वीं सार्क समिट के दौरान मुशर्रफ के एक अंदाज ने पाक की एक अलग ही छवि पेश की थी। वर्ष 2002 में चार से छह जनवरी तक नेपाल में इस सम्‍मेलन का आयोजन हो रहा था। कारगिल युद्ध के जिम्‍मेदार परवेज मुशर्रफ अपना भाषण देकर पोर्डियम से उतरकर जा रहे थे कि अचानक ही वह वाजपेयी के पास आए और उन्‍होंने हाथ आगे बढ़ाया। मुशर्रफ के इस रवैये को वाजपेयी भी नजरअंदाज नहीं कर पाए। वह भी अपनी सीट से उठे और उन्‍होंने उसी गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया। उस समय मीडिया में लिखा गया था कि ऐसे समय में जब आतंकवाद का खतरा बरकरार है, मुशर्रफ और वाजपेयी के बीच नजर आई गर्मजोशी वाकई काबिल-ए-तारीफ है।

हाथ मिलाने के बाद वाजपेई ने दिया कड़ा जवाब

हाथ मिलाने के बाद वाजपेई ने दिया कड़ा जवाब

मुशर्रफ ने भले ही वाजपेयी के लिए अपने प्‍यार और सम्‍मान का प्रदर्शन किया हो लेकिन इसके बावजूद पूर्व पीएम ने अपने ही अंदाज में पाक को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा जवाब भी दिया था। वाजपेयी ने इस समिट में कहा, 'मुझे खुशी है कि राष्‍ट्रपति मुशर्रफ ने मेरी ओर दोस्‍ती का हाथ बढ़ाया है। मैंने आप सभी की मौजूदगी में उनसे हाथ मिलाया है। अब मुशर्रफ को अपने इसी भाव को आगे बढ़ाना होगा।' वाजपेयी ने कहा मुशर्रफ को वादा करना होगा कि वह पाक या इससे लगी सीमाओं में उन आतंकी गतिविधियों को पनपने नहीं देंगे जो भारत के खिलाफ हों।

दोस्‍ती के बदले दिया कारगिल युद्ध

दोस्‍ती के बदले दिया कारगिल युद्ध

वाजपेयी इसके साथ ही यह याद दिलाना भी नहीं भूले कि भारत हमेशा से ही पाक के साथ दोस्‍ती का समर्थक रहा है। वह लाहौर भी इसी मकसद से गए थे लेकिन हर बार पाक ने हमें धोखा दिया है। वाजपेयी ने इस समिट में कहा लाहौर के बाद भारत को कारगिल युद्ध का तोहफा पाक ने दिया। काठमांडू से भारतीय एयलाइंस के विमान को हाइजै‍क कर लिया गया। वाजपेयी ने सीधे तौर पर पाक पर निशाना साधते हुए सख्‍त लहजे में कहा मैंने मुशर्रफ को आगरा बुलाया और उन्‍होंने हमें जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकी हमले के साथ ही साथ संसद पर हमले का तोहफा दिया।

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English summary
Atal Bihari Vajpayee: Pakistan former President Pervez Musharraf must remember his hand shake with Vajpayee in 2002.
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