असम की बाढ़: जान बचने के साथ साथ NRC बचने से हुआ ज्यादा खुश

नई दिल्ली। असम में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से अधिकतर इलाकों में लोगों की बाढ़ की मार झेलनी पड़ रही है। लोग बाढ़ में किसी तरह से अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। लेकिन इस बीच असम के मोरीगांव जिले के महमरी गांव में 65 वर्षीय समसुल आलम बाढ़ में खुद की जान बचने से ज्यादा एनआरसी एनआरसी के दस्तावेज को बचा पाने की खुशी है। समसुल बाढ़ में किसी तरह से खुद को बचाने में जुटे थे, केले के पेड़ को नाव बनाकर खुद को सुरक्षित स्थान तक ले जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पानी के तेज बहाव में उनकी नाव का संतुलन खो गया।

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डूबने से बचाया परिवार को

बता दें कि मोरीगांव असम का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित जिला है, यहां ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी उपर बह रहा है, जिसकी वजह से लोगों का जीवनयापन अस्त-व्यस्त हो गया है। समसुल जब बाढ़ के पानी में काफी दूर तक बह गए तो उन्हें एनडीआरएफ की टीम के कैलाश शर्मा और पावेश कुमार ने बचाया। दोनों ने रबर की नांव से समसुल को बाढ़ में डूबने से बचाया। जब समसुल को एनडीआरएफ की टीम ने बचाया तो उनकी आंखों में आंसू थे। जिसके बाद शर्मा ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनका परिवार को भी बचा लिया जाएगा।

100 वर्ष की मां को बचाया

एनडीआरएफ की टीम ने 20 मिनट के बाद समसुल की मां को बचाने में सफलता हासिल की जिनकी उम्र 100 वर्ष है और वह बिस्तर से उठ नहीं पाती हैं। इसके अलावा एनडीआरएफ की टीम ने उनकी पत्नी और बच्चों को भी बचाया। समसुल ने बताया कि हम किसी तरह से बच पाए हैं, हमारे पास दो दिन से खाने को नहीं था, हम खुश हैं कि हम जिंदा हैं। इस बाढ़ ने मेरा घर, जमीन, जीविका सबकुछ ले लिया। लेकिन मैं इस बात को लेकर सबसे ज्यादा खुश हूं कि मेरे पास सबसे कीमती मेरी मां, पत्नी बच्चे और एनआरसी के दस्तावेज हैं। इसके बिना मैं राज्य का नहीं रहता।

पानी का स्तर काफी अधिक

परवेश कुमार ने बताया कि ब्रह्मपुत्र का जलस्तर काफी बढ़ गया है और लहरें काफी तेज हैं। पानी गांव में घुस गया है, लिहाजा लोगों को बचाने में काफी दिक्कत हो रही है। जब हम उनके पास गए तो सबके पास कागज का दस्तावेज था, यह उनका एनआरसी का दस्तावेज है। लोग सबकुछ छोड़ने के लिए तैयार हैं लेकिन एनआरसी की फाइल छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। कैलाश शर्मा ने बताया कि समसुल लगातार रो रहे थे, जिसकी वजह से हमने अपने डाइवर को उनके घर भेजा जहां से डाइवर प्लास्टिक में रखे एनआरसी दस्तावेज को लेकर आया।

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