NRC के लिए नहीं किया आवेदन तो भूल जाइए आधार कार्ड, असम सरकार का बड़ा फैसला
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जो लोग नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेनशिप का हिस्सा नहीं हैं उन्हें आधार कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने यह फैसला व्यापक पहल का हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धुबरी, बारपेटा और मोरीगांव जैसे जिलों में जारी किए गए आधार कार्डों की संख्या अनुमानित जनसंख्या से अधिक है।
इन जिलों में जारी किए गए आधार कार्डों की दर क्रमशः 103%, 103% और 101% है। सरमा ने सुझाव दिया कि इससे संकेत मिलता है कि "संदिग्ध विदेशियों" ने इन क्षेत्रों में आधार कार्ड प्राप्त किए होंगे। राज्य सरकार आधार कार्ड जारी करने के लिए एक मानक संचालन प्रोटोकॉल (एसओपी) लागू करने की योजना बना रही है।

आधार के लिए NRC आवेदन होना अनिवार्य
इस नए प्रोटोकॉल के तहत आवेदकों को 2015 से अपना एनआरसी आवेदन नंबर प्रदान करना होगा। एनआरसी अपडेट प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई थी और इसका उद्देश्य 24 मार्च, 1971 से पहले असम में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की पहचान करना था।
सरमा ने कहा कि जिन लोगों ने एनआरसी के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें आधार कार्ड नहीं मिलेगा। उन्होंने इस फैसले को समझाते हुए कहा कि यक्ति का नाम एनआरसी में शामिल किया गया या नहीं, यह अलग बात है।
लेकिन उसे आवेदक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने आवेदन नहीं किया है, तो इसका मतलब है कि वह उस समय असम में नहीं था।
19 लाख लोग हुए थे बाहर
अगस्त 2019 में अंतिम एनआरसी प्रकाशित की गई, जिसमें 3.3 करोड़ आवेदकों में से 19 लाख को बाहर रखा गया। हालांकि, इस एनआरसी को अभी तक आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। बाहर रखे गए लोगों को राज्य की विदेशी न्यायाधिकरण प्रणाली में मुकदमों का सामना करना था।
1 अक्टूबर से लागू फैसला
1 अक्टूबर से असम में आधार कार्ड बनवाना इस नए एसओपी के कारण और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। चाय बागान समुदाय को इन कठिनाइयों से छूट मिलेगी क्योंकि अभी भी बहुत से लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है।
सरमा ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम एक "सार्वभौमिक प्रक्रिया" है और नए एसओपी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अगले दो सप्ताह के भीतर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
असम सरकार के पास विशेष अधिकार
गौर करने वाली बात है कि केंद्र सरकार आधार कार्ड जारी करती है, लेकिन उसने असम सरकार को कुछ विवेकाधीन शक्तियां दी हैं। इसमें आधार कार्ड जारी करने के लिए संबंधित जिला कलेक्टर से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना शामिल है।
2015 में एनआरसी आवेदन
एनआरसी के लिए आवेदन मार्च और अगस्त 2015 के बीच किए गए थे, जिसमें 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने आवेदन किया था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या आवेदक 24 मार्च 1971 से पहले असम में आए थे, ताकि उन्हें नागरिक के रूप में मान्यता दी जा सके।












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