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अशोक सिंघल: एक इंजीनियर जो बन गया रामभक्त, ICU में भी लगाता रहा राम मंदिर की रट

फैजाबाद। सदियों का इंतजार आज खत्म हुआ, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन किया, बेहद शुभ मुहूर्त में राम मंदिर का भूमि पूजन संपन्न हुआ, बता दें कि भूमि पूजन का शुभ मुहूर्त 12 बजकर 44 मिनट पर था, लेकिन उससे पहले पूरे विधि विधान से इस महाआयोजन की शुरूआत हुई, 12 बजकर 7 मिनट पर पीएम मोदी भूमि पूजन के लिए पहुंचे और दो मिनट के अंदर ही भूमि पूजन का कार्यक्रम आरंभ हुआ, भूमिपूजन में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन भी शामिल हुए।

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    रामजन्मभूमि आंदोलन के मुख्य किरदारों में से एक थे अशोक सिंघल

    रामजन्मभूमि आंदोलन के मुख्य किरदारों में से एक थे अशोक सिंघल

    इस खास मौके पर लोग रामजन्मभूमि आंदोलन के मुख्य किरदारों में से एक रहे अशोक सिंघल को याद कर रहे हैं, जो कि अपने अंतिम क्षणों में भी राममंदिर की ही बात कर रहे थे, विश्व हिंदू परिषद् (विहिप) के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल ने 17 नवंबर 2015 में 85 वर्ष की अवस्था में दुनिया को अलविदा कहा था, निधन से पहले अशोक सिंघल काफी बीमार थे और आईसीयू में थे, तब उनका हाल जानने के लिए जब प्रवीण तोगड़िया और लाल कृष्ण आडवाणी पहुंचे थे।

    रामलला का बने मंदिर, यही थी अंतिम इच्छा

    रामलला का बने मंदिर, यही थी अंतिम इच्छा

    जिन्हें देखकर सिंघल ने मुस्कुराते हुए कहा था कि अरे मैं पूरी तरह से ठीक हूं, मुझे कुछ नहीं हुआ, अभी तो अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाना है, ये बात उनके निधन से दो दिन पहले की है, आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सिंघल की अंतिम इच्छा राममंदिर के निर्माण की ही थी।

     रामजन्मभूमि आंदोलन की वजह से चर्चा में रहे सिंघल

    रामजन्मभूमि आंदोलन की वजह से चर्चा में रहे सिंघल

    विहिप के कद्दावर नेता सिंघल का जन्म 15 सितंबर 1926 में आगरा के एक संभ्रात परिवार में हुआ था। मेटाल्यूर्जिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद 1981 में सिंघल विहिप के अध्यक्ष बने थे लेकिन सिंघल रातों-रात सुर्खियों में तब आए जब देश में रामजन्मभूमि आंदोलन चलाया गया था।

    धर्म संसद का आयोजन में बनी थी रणनीति

    साल 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया। सिंघल इस धर्म संसद के मुख्य संचालक थे। यहीं पर राम जन्म भूमि आंदोलन की रणनीति तय की गई थी, यहीं से सिंघल ने पूरा प्लान बनाना शुरू किया था और कार सेवकों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया था।

    'विवादित ढांचा तोड़ना हमारा मकसद नहीं था'

    'विवादित ढांचा तोड़ना हमारा मकसद नहीं था'

    सिंघल ने देश भर से 50 हजार कारसेवक जुटाए थे, सिंघल ने ही अयोध्या की सरयु नदी के किनाने राम लला की मूर्ति स्थापित करने का संकल्प लिया था,साल 1992 में विवादित ढांचा तोड़ने वाले कार सेवकों का नेतृत्व सिंघल ने ही किया था। सिंघल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिये हमने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया है, रही बात विवादित ढांचा तोड़ने की तो हम उसे तोड़ने के मकसद से नहीं गए थे, उस दिन जो कुछ भी हुआ वह मंदिर के पुर्ननिर्माण कार्य का एक हिस्सा था।

    सिंघल ने महिला का रूप धारण किया था

    कहते हैं जब 1992 में कार सेवकों को अयोध्या जाने से रोका जा रहा था तो सिंघल महिला का रूप धारण करके नाव से अयोध्या पहुंचे थे, मालूम हो कि आज के भूमि पूजन कार्यक्रम में अशोक सिंघल के परिवार से महेश भागचंदका और पवन सिंघल मुख्य यजमान के तौर पर शामिल हुए हैं।

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