असदुद्दीन ओवैसी बोले- राजीव गांधी ने खुलवाए बाबरी मस्जिद के ताले, शाहबानो मामले से नहीं था लेना देना
नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाए थे। उन्होंने कहा कि ये एतिहासिक तथ्य है और इसका शाहबानो मामले से कोई लेना देना नहीं था। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट 18 नवंबर से फैसला सुना सकता है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक ओवैसी ने ये बयान दिया।
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'राजीव गांधी ने खुलवाए ताले'
ओवैसी ने पत्रकारों से कहा कि फैसले के बाद अगले 15 मिनट बाद कानून का उल्लंघन किया गया। इसके बाद राजीव गांधी ने अपना चुनाव अभियान यहीं से शुरू किया। उन्होंने कहा कि 5 मिनट की सुनवाई में 25 पन्नों का आदेश दिया गया था। ताले खोलने के आदेश से शाहबानो मामले का कुछ लेना-देना नहीं था।

'माधव गोडबोले ने सच कहा'
एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने कहा कि माधव गोडबोले ने जो भी कहा वो सच है। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री के बारे में उन्होंने जो कुथ भी कहा, वो एक एतिहासिक तथ्य है। उनके आदेशों पर ही ताले खोले गए और उस समय कांग्रेस की सरकार थी।

'नरसिम्हा राव और राजीव गांधी पर साधा निशाना'
पूर्व केंद्रीय गृहसचिव माधव गोडबोले ने साल 1992 में हुए बाबरी विध्वंस पर कहा था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को इसे लेकर संदेह था कि ऐसी परिस्थिति में उनके पास राष्ट्रपति शासन लागू करने का संवैधानिक अधिकार है कि नहीं। उन्होंने कहा कि अगर राजीव गांधी ने पीएम रहते हुए एक्शन लिया होता तो इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता था। क्योंकि उस समय दोनों पक्षों की राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं था। उस समय एक सामान्य समाधान कुछ हिस्सा देकर या लेकर किया जा सकता था।

राजीव गांधी को बताया दूसरा कारसेवक
माधव गोडबोले ने आगे कहा था कि राजीव गांधी ने पीएम रहते हुए बाबरी मस्जिद के ताले खोलने गए थे। उनके कार्यकाल के दौरान ही मंदिर की आधारशिला रखने का समारोह आयोजित किया गया था। इसलिए मैंने उन्हें राम मंदिर आंदोलन का दूसरा कारसेवक कहा। पहले कारसेवक तत्कालीन डीएम थे, जिन्होने ये सब शुरू किया।
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