अरविंद केजरीवाल नहीं लड़ेंगे वाराणसी से चुनाव

अरविंद के बड़े-बड़े दावों की पोल अब खुलने लगी है। मंगलवार को पश्चिमी दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में अपना पांचवां चुनावी थप्पड़ खाने के बाद कहीं न कहीं अरविंद समेत उनके सभी समर्थकों में एक हताशा की लहर दौड़ गई है। पहल तो यह कहना कि मैं जनता की राय के बाद अपना फैसला लूंगा और जब जनता ने अपना फैसला सुना दिया तो अरविंद पीछे हट गए हैं। आम जन का तो यहां तक कहना है कि यदि कोई भी उम्मीदवार ऐसा करता है तो चुनाव आयोग को ये सभी बातें संज्ञान में लेनी चाहिए। इस मामले के बाद अब सभी विपक्षी पार्टियां इसे वोटों का ध्रुवीकरण नाम दे रही हैं।
सोचा था जनता को क्या मालूम?
अरविंद केज रीवाल ने वाराणसी से चुनाव लड़ने की बात कहकर जहां एक ओर भाजपा से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को ललकारा था वहीं दूसरी ओर उन्होंने चोरी छिपे तरीके से अभी तक अस्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए अभी तक अप्लाई भी नहीं किया है। कहीं न कहीं अरविंद ने यही सोचा होगा कि वाराणसी के गांव की जनता को क्या पता कि चुनाव लड़ने से पहले निवास प्रमाण पत्र भी बनाना पड़ता है।
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