लो आ गया अरविंद केजरीवाल की फिल्म 'एन इनसिग्निफिकेंट मैन' का ट्रेलर, यहां देखें
नई दिल्ली। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल एक जन-आंदोलन के जरिए लोगों के दिलों में घर कर गए और उसके बाद उन्होंने देश को बदलने के लिए राजनीति में कदम रखा और एक पार्टी बनाई, जिसके जरिए वो आज दिल्ली के सीएम बने हैं। देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए ईमानदार इंजीनियर अरविंद केजरीवाल का अब तक सफर कितना कष्टकारी रहा है, इसी सब को दिखाने की कोशिश हुई है फिल्म 'एन इन्सिग्निफिकेंट मैन' में, जिसका ट्रेलर बुधवार को रिलीज किया गया है। ये एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जिसका निर्माण विनय शुक्ला और खुशबू रांका ने किया है। उनका कहना है कि यह एक नॉन फिक्शनल पोलीटिकल फिल्म है, जो सामाजिक कार्यकर्ता से लेकर राजनेता बने अरविंद केजरीवाल के भारतीय राजनीतिक की कहानी को दिखाती है।
भारत में 17 नवंबर को रिलीज होगी फिल्म
फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत अरविंद केजरीवाल से होती है, ट्रेलर के शुरुआती पहले हिस्सा में इस पार्टी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों, केजरीवाल पर स्याही फेंकने जैसे कई किस्से दिखाए गए हैं। ये फिल्म भारत में 17 नवंबर को रिलीज होगी और इसे अमेरिकी मीडिया कंपनी वाइस रिलीज करेगी।

कुछ खास बातें
केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को, हरियाणा के हिसार जिले में हुआ। इनके पिता का नाम गोबिंद राम केजरीवाल है और माता का नाम गीता देवी। केजरीवाल की पत्नी का नाम सुनीता है , जो मसूरी में सिविल सर्विसेस की ट्रेनिंग के दिनों में उनकी बैचमेट भी थीं। दोनों ने साथ ही आईआरएस ज्वाइन किया था।

केजरीवाल शुद्ध शाकाहारी
केजरीवाल शुद्ध शाकाहारी हैं। 1985 में आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री कोर्स में प्रवेश लिया। 1989 में टाटा स्टील, जमशेदपुर में ज्वाइन किया। वहां से छुट्टी लेकर सिविल सर्विस के इंटरेंस की तैयारी की। 1992 में नौकरी छोड़ दी। कुछ समय कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की नॉर्थ-ईस्ट इकाई के साथ बिताया। पहली बार में ही सिविल सर्विसेज का इंटरेंस निकाल कर 1995 में इंडियन रेवेन्यू सर्विस ज्वाइन की।

केजरीवाल मदर टेरेसा से मिले
इसी दौरान केजरीवाल मदर टेरेसा से मिले और उनके साथ काम किया। 1999-2000 के बीच उन्होंने परिवर्तन मूवमेंट की शुरुआत की। यह अभियान इनकम टैक्स, बिजली और राशन से संबंधित बातों के प्रति जनता को जागरूक करने के लिये चलाया। 2003 में उन्होंने फिर से आईआरएस ज्वाइन किया और 18 महीने के लिये वहां काम किया। साथ में उनका समाज कार्य भी चलता रहा।

2006 में आरटीआई ऐक्ट
2006 में आरटीआई ऐक्ट के लिये रमन मैगसेसेय अवार्ड से उन्हें नवाजा गया। उन्होंने आईआरएस की नौकरी छोड़ दी और मैगसेसेय अवार्ड से प्राप्त धन को एनजीओ पब्लिक कॉस रिसर्च फाउंडेशन को दान कर दिया।

आम आदमी पार्टी की स्थापना
फिर ये अहिंसावादी और समाजसेवी अन्ना हजारे के संपर्क में आये और उनके साथ मिलकर जन लोकपाल बिल के लिये जंग शुरू की। 2012 में आम आदमी पार्टी की स्थापना की। इसके बाद इन्होंने चुनाव लड़ा और दिल्ली के सीएम बने।












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