खत्म हुआ संसद में गतिरोध, पीएम मोदी के बयान पर जेटली ने दी सफाई
ससंद में अरुण जेटली की सफाई, पीएम मोदी ने नहीं की मनमोहन सिंह पर कोई टिप्पणी
नई दिल्ली। गुजरात चुनाव के दौरान पीएम मोदी के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर किए गए कमेंट को लेकर संसद में हंगामें के बीच बुधवार को अरुण जेटली ने सफाई दी। राज्यसभा में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी तरह की कोई टिप्पणी पूर्व पीएम और पूर्व उपराष्ट्रपति को लेकर नहीं की। उन्होंने कहा वो साफ करना चाहते हैं कि पीएम मोदी ने किसी तरह को कोई सवाल अपने भाषणों में मनमोहन सिंह पर नहीं उठाया है। इस पर कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस तरह के कमेंट पीएम के पद के लिए ठीक नहीं, वो चाहते हैं कि भविष्य में इस तरह की बातें ना दोहराई जाएं।

ये है पूरा मामला
पीएम ने उठाए थे अय्यर के घर हुई बैठक पर सवाल गुजरात चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिशंकर अय्यर के घर हुई एक बैठक को मुद्दा बनाते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया था कि पाकिस्तान के साथ मिलकर भाजपा को गुजरात चुनाव हराने की साजिश रची जा रही है। इसे लेकर मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुनाव जीतने के लिए झूठ फैलाने का आरोप लगाया। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पीएम नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग को लेकर शीतकालीन सत्र में लगातार हंगामा कर रही थी।

अनंत हेगड़े के बयान पर हंगामा
बुधवार को पीएम के बयान पर तो अरुण जेटली ने सफाई दे दी लेकिन दोनों सदनों में हंगामा जारी रहा। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के संविधान बदलने के बयान पर बुधवार को संसद के दोनों सत्रों में जमकर हंगामा देखने को मिला। काग्रेस नेता, गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, 'अगर किसी व्यक्ति का इस देश के संविधान में भरोसा नहीं है तो उस व्यक्ति को सांसद बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।' कुलभूषण जाधव के परिवार से पाकिस्तान में बदसलूकी किए जाने का मुद्दा लोकसभा में भी गूंजा। काग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी से जिस तरह पाकिस्तान में बर्ताव किया गया हम उकी निंदा करते हैं। कुलभूषण जाधव को हमें किसी भी भारत वापस लाना चाहिए।' विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा वे कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर कल संसद में बयान देंगी।

हंगामेदार रहा है सत्र
छोटा होगा ये शीतकालीन सत्र चुनाव के कारण करीब एक महीना देर से बुलाए गए इस सत्र की अवधि थोड़ी कम ही होगी। पिछले शीतकालीन सत्र के 21 दिवसीय कामकाज के मुकाबले इस सत्र में 14 दिन ही कामकाज होगा। लगातार हंगामे के चलते 15 दिसंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में अभी तक सुचारू रूप से कामकाज नहीं हो सका है।












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