आईपीएल में क्या कारगर साबित हो रहे हैं इम्पैक्ट प्लेयर्स?

इम्पैक्ट प्लेयर के नए प्रावधान के बाद आईपीएल टी-20 खेलों में क्या बदलाव देखने को मिल रहा है और टीमों के लिए कितना फ़ायदेमंद साबित हो रहा है ये प्रयोग.

तुषार देशपांडे (चेन्नई सुपरकिंग्स)
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तुषार देशपांडे (चेन्नई सुपरकिंग्स)

आईपीएल के 16वें संस्करण में इम्पैक्ट प्लेयर का नियम लागू हुआ. टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही इस नियम के बारे में काफ़ी चर्चा थी.

क्रिकेट के मूल स्वरूप के तहत 11 खिलाड़ी खेलते हैं, लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर नियम के साथ टीमों को 12 खिलाड़ियों के बारे मे सोच कर रणनीती बनानी पड़ती है.

इम्पैक्ट प्लेयर का मक़सद खेल को और रोचक बनाने का है. मैच के दौरान तेज़ गेंदबाजों के चोटिल होने का ख़तरा रहता है.

काफ़ी सारे तेज़ गेंदबाज़ बल्लेबाज़ी बिल्कुल नहीं करते, तो उनकी जगह पर एक बल्लेबाज़ को शामिल किया जा सकता है.

गेंदबाज़ के अपने खाते के 4 ओवर फेंकने के बाद उसकी जगह चुस्त और फ़ुर्तीले युवा खिलाड़ी को शामिल किया जा सकता है.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में एक के पीछे एक सिरीज़ रहती है. ऐसे में हर बोर्ड अपने खिलाड़ियों के साथ वर्कलोड मॅनेजमेंट पॉलिसी अपना रहा है.

इम्पैक्ट प्लेयर जैसे नियम के तहत खिलाड़ी को पूरे 40 ओवर खेलने की ज़रूरत नहीं.

आईपीएल जैसी प्रतियोगिता में बड़े उम्र के खिलाड़ी भी शामिल रहते हैं.

चेन्नई सुपर किंग्स टीम में खिलाड़ियों की औसत उम्र 32 साल है. चालीस की तरफ बढ़ रहे खिलाड़ियों के लिए इम्पैक्ट प्लेयर का नियम वरदान की तरह है.

चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा था, 'इम्पैक्ट प्लेयर का होना कप्तान के लिए लक्ज़री है.'

दूसरी तरफ इम्पैक्ट प्लेयर से कप्तान की परेशानी बढ़ेगी, ऐसा गुजरात टाइटंस के कप्तान हार्दिक पंड्या का मानना था.

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बेंच पर बैठने वाले खिलाड़ियों को मौक़ा

आईपीएल टीमों के पास 20 से ज्यादा खिलाड़ी रहते हैं. प्रमुख भारतीय और आंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अंतिम एकादश में शामिल होते हैं, लेकिन युवा खिलाड़ियों को रिज़र्व प्लेयर के तौर पर रहना पड़ता है.

खेलने वाले खिलाड़ियों को एनर्जी ड्रिंक देना, बैट-ग्लव्स जैसी चीज़ें पहुँचाना, इसके साथ अगर कोई खिलाड़ी चोटिल हो जाए तो उसकी जगह फ़ील्डिंग करना, ये काम करने पड़ते हैं.

इम्पैक्ट प्लेयर नियम लागू होने से हमेशा बेंच पर बैठने वाले खिलाड़ियों को भी मौक़ा मिल सकता है.

कुछ ऐसा ही हुआ राजस्थान रॉयल्स के ध्रुव जुरेल के साथ. राजस्थान के पास धुरंधर बल्लेबाज़ों की फौज है.

इनके बीच ध्रुव को मौक़ा मिलना मुश्किल था. लेकिन पंजाब किंग्स के ख़िलाफ़ 5 अप्रैल को हुए मुक़ाबले में इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर ध्रुव को शामिल किया गया.

स्पिन गेंदबाज़ यजुवेंद्र चहल ने 4 ओवर फेंके. उसके बाद उनकी जगह ध्रुव को शामिल किया गया. बचे हुए ओवरों में उन्होंने फ़ील्डिंग की.

ध्रुव जब बल्लेबाज़ी के लिए उतरे, तब राजस्थान को 30 गेंदों में 74 रनों की ज़रूरत थी.

लक्ष्य मुश्किल दिखाई दे रहा था. ध्रुव जुरेल ने अनुभवी शिमरोन हेटमायर के साथ अच्छी साझेदारी निभाई.

उन्होंने 15 गेंदो में नाबाद रहते 32 रन बनाए. राजस्थान भले ही वो मुक़ाबला पाँच रनों से हार गया हो, लेकिन ध्रुव के रूप में उनको एक अच्छा बल्लेबाज़ मिला.

बल्लेबाज़ों को या गेंदबाज़ों को, किसको अधिक फ़ायदा?

इम्पैक्ट प्लेयर का नियम नहीं होता, तो शायद ध्रुव खेलते भी नहीं.

उस अच्छी पारी का परिणाम अगले मैच में देखने को मिला. राजस्थान ने ध्रुव को अंतिम एकादश में शामिल किया.

लेकिन एक धारणा ये भी है कि इम्पैक्ट प्लेयर नियम से खेल और बल्लेबाज़ केंद्रित हो जाएगा.

टी20 क्रिकेट में अतिरिक्त बल्लेबाज़ टीम को मिलना उनकी ताक़त बढ़ा देता है.

इम्पैक्ट प्लेयर के तहत गेंदबाज़ को शामिल किया, तो उसकी गेंदबाज़ी की पिटाई होने की आशंका ज़्यादा है.

इंडियन एक्स्प्रेस के नॅशनल स्पोर्ट्स एडिटर संदीप द्विवेदी कहते हैं, "टी20 सबसे छोटा फ़ार्मेट है. टीम चुनते समय सबसे अच्छी टीम चुनी जाती है. अगर कोई ग़लत फ़ैसला हो गया, तो उससे सीख लेकर आगे खेलना चाहिए."

वो कहते हैं, "टेस्ट क्रिकेट में पाँच दिन खेल चलता है. पहले दिन की स्थिति पाँचवें दिन बदल सकती है. वहाँ पर इम्पैक्ट प्लेयर जैसा नियम अच्छा साबित हो सकता है. फुटबॉल में सबस्टिट्यूट के तौर पर खिलाड़ियों को शामिल किया जाता है, लेकिन वो काफ़ी सूझबूझ वाला फ़ैसला होता है. क्रिकेट में ये आसान है नहीं. बल्लेबाज़ ने अपना काम किया है तो उसकी जगह पर गेंदबाज़ शामिल होता है और ऐसी ही इसके उलट भी होता है."

संदीप कहते हैं, "बढ़ती उम्र के खिलाड़ियों के लिए ये नियम अच्छा साबित होगा. अपना काम पूरा करने के बाद उनके जगह दूसरे खिलाड़ी को मौक़ा मिल सकता है. इसके साथ युवा खिलाड़ी जिन्हें अंतिम एकादश में आने का मौक़ा शायद नहीं मिलता, उनके लिए इम्पैक्ट प्लेयर अच्छी शुरुआत है."

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क्या हैं नियम?

इस नियम के तहत बल्लेबाज़ को गेंदबाज़ से रिप्लेस करना या गेंदबाज़ की जगह बल्लेबाज़ को टीम में शामिल करना इतना ही मकसद नहीं.

मैच को निर्णायक मोड़ देने के लिए सही समय पर ज़रूरत के हिसाब से खिलाड़ी को टीम में शामिल करने का विकल्प है.

इम्पैक्ट प्लेयर मतलब अंतिम ग्यारह में शामिल एक खिलाड़ी को बदलकर नया खिलाड़ी शामिल करना. कप्तान टॉस के लिए मैदान में उतरेंगे, तब टीमशीट में अंतिम ग्यारह के साथ साथ चार सबस्टिट्यूट खिलाड़ियों का नाम देना ज़रूरी होगा.

हर टीम इन चार में से केवल एक खिलाड़ी को इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर शामिल कर सकती है.

हर पारी में 14वें ओवर से पहले इम्पैक्ट प्लेयर लिया जा सकता है. पारी की शुरुआत में, ओवर ख़त्म के बाद, किसी कारण बल्लेबाज़ रिटायर हो गया, तब इम्पैक्ट प्लेयर को शामिल किया जा सकता है.

इम्पैक्ट प्लेयर
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इम्पैक्ट प्लेयर

कप्तान, कोच, टीम मैनेजर, फ़ोर्थ अंपायर इस बारे में ऑनफ़ील्ड अंपायर्स को सूचित करेंगे. ऑनफ़ील्ड अंपायर दोनों हाथों को उपर उठाकर क्रॉस साइन करेंगे.

एक बार इम्पैक्ट प्लेयर टीम इलेवन से किसी खिलाड़ी को रिप्लेस कर दे, तो वो खिलाड़ी मैच में किसी भी प्रकार से शामिल नहीं हो सकता.

आईपीएल के नियम अनुसार- अंतिम ग्यारह में चार विदेशी खिलाड़ी खेल सकते हैं. इस नियम को ध्यान में रखते हुए इम्पैक्ट प्लेयर भारतीय खिलाड़ी होने की ज़रूरत बढ़ गई है.

अगर किसी टीम ने अंतिम ग्यारह में चार से कम विदेशी खिलाड़ी खिलाए हैं, तो इस टीम को इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर विदेशी खिलाड़ी को शामिल करने का मौक़ा मिलेगा.

अब देखते हैं कि किस प्रकार से इम्पैक्ट प्लेयर का इस्तेमाल किया गया है-


अंबाती रायडू
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अंबाती रायडू

चेन्नई- गुजरात

इस सीज़न के पहले मुक़ाबले में चेन्नई ने अंबाती रायडू को रिप्लेस करने का फ़ैसला किया. बल्लेबाज़ रायडू की जगह गेंदबाज़ तुषार देशपांडे को शामिल किया गया.

इम्पैक्ट प्लेयर चेन्नई के लिए कुछ खास कर नहीं पाया और गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज़ों ने तुषार की गेंदबाज़ी पर खूब रन बटोरे.

गुजरात टाइटंस टीम को मजबूरी में इम्पैक्ट प्लेयर का इस्तेमाल जारी रखना पड़ा.

न्यूज़ीलैंड और सनराइजर्स हैदराबाद के भूतपूर्व कप्तान केन विलियम्सन ने टाइटंस के लिए डेब्यू किया. लेकिन ये डेब्यू उनके लिए यादगार नहीं रहा.

फ़ील्डिंग करते समय केन चोटिल हो गए. चोट गंभीर होने के कारण केन का सीज़न वही समाप्त हो गया.

गुजरात ने बल्लेबाज़ी करते समय केन की जगह साई सुदर्शन को मौक़ा दिया.

साई ने 17 गेंद में 22 रनों की पारी खेली. भले ये आँकड़े भारी भरकम नहीं हैं, लेकिन गुजरात की जीत में इस पारी का योगदान महत्वपूर्ण रहा.

वेंकटेश अय्यर
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वेंकटेश अय्यर

पंजाब- कोलकाता

पंजाब किंग्स टीम ने श्रीलंकाई बल्लेबाज़ भानुका की जगह ऋषि धवन को शामिल किया.

भानुका ने बल्लेबाज़ी करते हुए अर्धशतक के साथ अपनी भूमिका निभाई थी. उनकी जगह पर शामिल हुए ऋषि धवन को सिर्फ एक ओवर डालने का मौक़ा मिला.

इसी मैच में मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने 4 ओवर डाले. सिर्फ़ 26 रनों के बदले एक विकेट भी चटकाया. वरुण बल्लेबाज़ी के लिए जाने नहीं जाते.

इनकी जगह पर कोलकाता ने वेंकटेश अय्यर को मौक़ा दिया. उन्होंने अच्छी और ज़रूरी पारी खेली.

ये मुक़ाबला पंजाब ने जीता, लेकिन उसमें इम्पैक्ट प्लेयर की कोई भूमिका नहीं रही.

लखनऊ-दिल्ली

लखनऊ सुपर जायंट्स ने बड़ी चतुराई के साथ इम्पैक्ट प्लेयर का इस्तेमाल किया. लखनऊ की पारी के आख़िरी ओवरों में आयुष बडोनी आउट हुए.

उन्होंने मौक़े की ज़रूरत समझ कर पारी रची. आयुष 20वें ओवर के पाँचवें गेंद पर आउट हो गए. पारी की आख़िरी गेंद बची थी. लखनऊ मैनेजमेंट ने एक गेंद के लिए इम्पैक्ट प्लेयर को उतारा.

कृष्णप्पा गौतम वैसे तो स्पिन गेंदबाज़ी करते है, लेकिन बल्लेबाज़ी का दमखम भी रखते हैं. एक गेंद का मौक़ा उन्होंने हाथ से जाने नहीं दिया. आख़िरी गेंद पर गौतम ने लंबा छक्का लगाया.

उसी मैच में खब्बू गेंदबाज़ खलील अहमद ने 4 ओवर का कोटा समाप्त किया. 30 रनों में दो विकेट झटके. खलील ने अपना काम बख़ूबी निभाया.

इसके बाद दिल्ली ने आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए जाने जाने वाले अमन ख़ान को इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर उतार दिया.

उन्हें सातवें नंबर पर बल्लेबाज़ी का मौक़ा मिला. जब तक अमन को मौक़ा मिलता, तब तक दिल्ली ने जीतने की उम्मीद छोड़ दी थी.

चेन्नई-लखनऊ

चेन्नई ने इस मैच में अंबाती रायडू की जगह तुषार देशपांडे को खिलाया. रायडू ने 14 गेंदों में 27 रनों की पारी खेली.

तुषार ने दो महत्वपूर्ण विकेट चटका कर मैच चेन्नई की तरफ़ मोड़ा.

लखनऊ के लिए आवेश ख़ान ने 3 ओवर में 39 रन देकर एक विकेट झटका.

इनकी जगह पर आयुष बडोनी को शामिल किया गया और बडोनी ने 23 रनों की पारी खेली.

राजस्थान- हैदराबाद

राजस्थान के लिए यशस्वी जायसवाल ने दमदार पारी खेली.

यशस्वी गेंदबाज़ी नहीं करते तो राजस्थान ने तेज़ गेंदबाज़ नवदीप सैनी को शामिल किया. लेकिन ये प्रयोग कामयाब नहीं रहा.

सैनी की गेंदबाज़ी पर हैदराबाद के बल्लेबाज़ों ने ख़ूब रन बटोरे.

कुछ ऐसा ही हैदराबाद टीम के साथ हुआ. अफ़ग़ानिस्तान के खब्बू तेज़ गेंदबाज़ फ़ज़लहक़ फ़ारूक़ी ने 2 विकेट चटकाए.

उनकी बल्लेबाज़ी में कोई भूमिका नहीं थी, इसलिए अब्दुल समद को मौक़ा मिला. उन्होंने अपना काम किया लेकिन तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी.

मुंबई-बेंगलुरू

टी20 रैंकिंग में अव्वल पायदान पर विराजमान सूर्यकुमार यादव ने इस मैच में 16 गेंदों में 15 रनों की धीमी पारी खेली. वो गेंदबाज़ी नहीं करते.

उनकी जगह पर खब्बू गेंदबाज़ जेसन बेहरेनडॉर्फ को शामिल किया गया.

लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में कामयाब नहीं हो सके. बेंगलुरू ने इम्पैक्ट प्लेयर का इस्तेमाल नहीं किया.

विजय शंकर
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विजय शंकर

दिल्ली-गुजरात

सरफ़राज़ ख़ान ने 30 रनों की पारी खेली. उनकी जगह पर दिल्ली ने खब्बू गेंदबाज़ खलील अहमद को खिलाया. उन्होंने एक विकेट चटकाया.

गुजरात के लिए गेंदबाज़ जोशुआ लिटिल कुछ ख़ास नहीं कर पाए.

उनकी जगह पर विजय शंकर को मौक़ा मिला.

विजय ने 23 गेंदों में 29 रनों की पारी खेलकर गुजरात की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई.

कोलकाता- बेंगलुरू

कोलकाता ने वेंकटेश अय्यर की जगह युवा स्पिनर सुयश शर्मा को शामिल किया.

व्यावसायिक क्रिकेट में पहला मैच खेलने वाले सुयश ने 3 विकेट लेकर इस निर्णय को सही ठहराया.

बेंगलुरू ने महंगे साबित हुए मोहम्मद सिराज़ की जगह अनुज रावत को मौक़ा दिया.

बल्लेबाज़ रावत आठवें नंबर पर खेलने आए तब तक बेंगलुरू ने मैच गँवा दिया था.

प्रभसिमरन सिंह
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प्रभसिमरन सिंह

पंजाब-राजस्थान

युवा विकेट कीपर बल्लेबाज़ प्रभसिमरन सिंह ने 34 गेंदों में 60 रनों की ज़बरदस्त पारी खेली.

उनकी जगह ऋषि धवन को शामिल किया गया. उन्हें गेंदबाज़ी करने का मौक़ा ही नहीं मिला.

इस मैच में युजवेंद्र चहल महंगे साबित हुए.

उनकी जगह पर आए ध्रुव जुरेल ने उस मौक़े का पूरा फ़ायदा उठाया. उन्होंने 15 गेंदों में नाबाद रहते हुए 32 रनों की पारी खेली.

हैदराबाद-लखनऊ

राहुल त्रिपाठी ने 34 रनों की पारी खेली. हैदराबाद ने महज 121 रन बनाए थे.

राहुल की जगह फ़ज़लहक़ फ़ारूक़ी को शामिल किया गया. उन्होंने 3 ओवर में 13 रन के बदले एक विकेट झटका.

40 साल के अमित मिश्रा ने 4 ओवर में 23 रन देकर 2 विकेट लिए. इसके साथ एक बेहतरीन कैच भी लपका.

मिश्रा की जगह युवा आयुष बडोनी को शामिल किया गया. उन्हें बल्लेबाज़ी नहीं करनी पड़ी.

राजस्थान-दिल्ली

अनुभवी बल्लेबाज़ जोस बटलर ने 51 गेंदो में 79 रनों की पारी खेली.

उंगली में चोट के चलते बटलर की जगह स्पिन गेंदबाज़ मुरुगन अश्विन को शामिल किया गया.

उन्हे सिर्फ़ एक ओवर डालने का मौक़ा मिला.

दिल्ली ने महंगे साबित हुए ख़लील अहमद की जगह पृथ्वी शॉ को खिलाया. लेकिन पृथ्वी खाता भी नहीं खोल पाए.

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