भारत में क्या सांप्रदायिक दंगे बढ़ रहे हैं, आंकड़े क्या कहते हैं?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2020 के आंकड़े बताते हैं कि संप्रदायिक हिंसा, झड़पों में बीते साल के मुकाबले ज़बरदस्त उछाल आया है.
बीते कुछ दिनों में भारत के अलग-अलग राज्यों से एक के बाद एक सांप्रदायिक झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं. इनमें से सबसे हालिया घटना है दिल्ली के जहांगीरपुरी की, जहां हनुमान जयंती के मौके पर शोभायात्रा के दौरान हिंसा भड़की और 9 लोग इसमें घायल हो गए. जिनमें सात पुलिस वाले शामिल हैं.
देश भर में हुए दंगों के सिलसिले में पुलिस पहले ही 130 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. हालांकि, सवाल बना हुआ है.
लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है कि सांप्रदायिक दंगों की घटनाएं कितनी बढ़ी हैं?
डेटा क्या कहता है?
2020 में सांप्रदायिक हिंसा की कुल 857 घटनाएं हुईं, यह 2019 की तुलना में 94% ज़्यादा थी. सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में अचानक उछाल का अहम कारण दिल्ली है. इसे ऐसे समझिए कि 2014 और 2019 के बीच दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों की केवल दो घटनाएं हुईं, लेकिन 2020 में, दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों की 520 घटनाएं हुईं, जिससे देश भर के आंकड़ों में वृद्धि हुई.
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हाल ही में, गृह मंत्रालय ने संसद में कहा कि भारत में 2016 और 2020 के बीच सांप्रदायिक और धार्मिक दंगों के 3,399 मामले सामने आए. और यह डेटा काफ़ी सटीक है और एनसीआरबी के आंकड़ों से भी मेल खाता है. एनसीआरबी की गणना के आधार पर 2014 से 2020 के बीच सांप्रदायिक दंगों की 5417 घटनाएं दर्ज की गईं है.
कांग्रेस बनाम बीजेपी
कांग्रेस और बीजेपी के शासनकाल के दौरान सांप्रदायिक दंगों की घटनाओं के दर की तुलना करने का कोई सीधा तरीका नहीं है.
2014 तक, एनसीआरबी दंगों को सांप्रदायिक या अन्यथा (खेती, जाति से संबंधित, संप्रदाय से संबंधित दंगे) के रूप में वर्गीकृत नहीं करता था. हालांकि, गृह मंत्रालय ने 2006 और 2012 के बीच सांप्रदायिक घटनाओं की संख्या जारी की. इससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इन दोनों पार्टियों की सरकार के दौरान तुलनात्मक स्थिति कैसी है?
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गृह मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक़ साल 2008 कांग्रेस सरकार के लिए सांप्रदायिक दंगों के लिहाज़ से सबसे ख़राब समय था. इस साल 943 घटनाएं दर्ज की गईं.
साल 2014 में एनसीआरबी के अनुसार देश में 1227 सांप्रदायिक घटनाएं हुईं, इसी साल बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई थी.
यदि दोनों पार्टियों की सरकार के कार्यकाल की तुलना की जाए, तो 2006 और 2012 (कांग्रेस सरकार के 6 साल के कार्यकाल के दौरान) के बीच सांप्रदायिक हिंसा की कुल 5,142 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2014 और 2020 के बीच (बीजेपी सरकार के शासन के 6 वर्ष) कुल 5,417 घटनाएं दर्ज की गईं.
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भारत में सांप्रदायिक दंगों की घटना 2020 तक धीरे-धीरे कम हो रही थी. लेकिन कम घटनाओं का मतलब ये कतई नहीं है कि पीड़ित भी कम हैं. 2014 में, 1227 सांप्रदायिक घटनाओं में 2001 पीड़ित थे.
2018 तक, घटनाओं की संख्या घटकर केवल 512 रह गई, लेकिन दंगों से प्रभावित पीड़ितों की संख्या 812 थी.
कुल पीड़ितों का अनुपात 2019 और 2020 में कम हुआ है, लेकिन कम घटनाओं के रिपोर्ट होने के बावजूद 2017 और 2018 के दौरान यह आंकड़ा काफ़ी अधिक था.
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