Appointment of Judges Row: जजों की नियुक्ति पर चल रहे विवाद पर किरन रिजिजू ने कही बड़ी बात
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर आमने-सामने हैं। इस बीच केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ा बयान दिया है।

Appointment of Judges Row: जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच अक्सर तनातनी की खबरें सामने आती रहती हैं। एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट और केंद्र जजों की नियुक्ति के मामले में आमने-सामने हैं और दोनों ही ओर से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। इस बीच केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार का जजों की नियुक्ति में बहुत ही सीमित रोल है। केंद्र जो भी हस्तक्षेप करता है वह संविधान के तहत ही करता है। राज्यसभा में बड़ी संख्या में लंबित केसों को लेकर चल रही बहस के दौरान रिजिजू ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि देश में पांच करोड़ से अधिक केस लंबित हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि जज के खाली पड़े पद।
बेहतर प्रतिनिधित्व चाहती है सरकार
किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से लंबित केस के मामले का निपटारा करने के लिए कई कदम उठाए गए, लेकिन जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका काफी कम होती है। कॉलेजियम नामों को चुनती है, इसके अलावा सरकार के पास जजों की नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है। सरकार की ओर से कई बार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से और हाई कोर्ट के जजों से नाम भेजने के लिए कहा गया, जोकि बेहतर गुणवत्ता और भारत की विविधता को समझते हों और महिलाओं को बेहतर प्रतिनिधित्व मिले।
कानून मंत्री ने क्या कहा
कानून मंत्री ने कहा कि मैं इस बारे में बहुत कुछ नहीं कहना चाहता हूं कि क्योंकि फिर ऐसा लगेगा कि सरकार न्यायपालिका में हस्तक्षेप कर रही है। लेकिन संविधान की मूल भावना यह कहती है कि यह सरकार का अधिकार है कि जजों की नियुक्ति करे। लेकिन 1993 के बाद से यह बदल गया है। नेशनल ज्यूडिसरी अप्वाइंटमेंट कमिशन एक्ट का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि इसी के चलते सरकार की भूमिका जजों की नियुक्ति में बढ़ाई गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2015 को इसे खारिज कर दिया। जबतक जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया नहीं बदलती है, जजों की कमी की समस्या खत्म नहीं होगी। रिजिजू कई बार इस बात को कह चुके हैं कि कॉलेजियम की प्रक्रिया भारत के लोग नहीं चाहते हैं।
2014 में NJAC में संशोधन की कोशिश
बता दें कि 2014 में केंद्र सरकार ने एनजेएसी में संशोधन की कोशिश की थी, जिसमे केंद्र की भूमिका जजों की नियुक्ति में बड़ी हो सकती थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अगले ही महीने इसे खारिज कर दिया था। इस महीने की शुरुआत में रिजिजू ने इस मुद्दे को फिर से उठाया था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम सिस्टम को पटरी से उतारने की कोशिश पर चेतावनी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम देश के कानून के तहत है। कुछ लोग इस व्यवस्था से इतर राय रखते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि देश के कानून को बदल दिया जाए।












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