आंध्र प्रदेश सरकार ने Davos Summit से क्यों बनाई दूरी, आईटी मंत्री गुडिवाड़ा अमरनाथ ने बताई वजह
Andhra Pradesh: स्विट्जरलैंड के दावोस में इस महीने हुए विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक से इस बार फिर से आंध्र प्रदेश ने दूरी बनाई। इसको लेकर विपक्षी दलों ने वाईएसआरसी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सीएम जगन के इस रवैये से राज्य को निवेश का नुकसान हुआ है। वहीं दावोस में सीएम जगन के शामिल ना होने पर मंत्री गुडिवाडा अमरनाथ ने स्थिति स्पष्ट की है।
दावोस हर साल वार्षिक बैठक विश्व आर्थिक मंच (WEF) की मेजबानी करता है। ये समिट वैश्विक व्यवसाय, सरकारों, नागरिक समाज, मीडिया और शिक्षा जगत का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों को एक मंच प्रदान करता है। इस साल WEF बैठक का 54वां संस्करण 15 जनवरी से 19 जनवरी के बीच आयोजित किया गया। इस बैठक में भारत के पांच राज्य कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हुए। इस दौरान कई मेगा समझौतों पर राज्यों की सरकारों के बीच समझौते हुए।

वहीं विश्व आर्थिक मंच की बैठक में आंध्र प्रदेश शामिल नहीं हुआ। जिसको लेकर टीडीपी समेत अन्य कुछ दलों ने वाईएसआरसीपी और सीएम जगन को निशाने पर लिया। टीडीपी नेताओं ने कहा कि सीएम जगन के WEF ने आंध्र प्रदेश को करोड़ों के निवेश का नुकसान हुआ।
इस बीच मंत्री गुडिवाड़ा अमरनाथ ने डब्ल्यूईएफ में शामिल ना होने पर आंध्र प्रदेश सरकार को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि सरकार इस वर्ष मार्च में होने वाले वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन (GIS) पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जिसके चलते विश्व आर्थिक मंच में सरकार का प्रतिनिधि मंडल शामिल नहीं हो पाया।
वहीं वाईएसआरसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रवि चंद्र रेड्डी ने टीडीपी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पूर्व की टीडीपी सरकार केवल प्रचार के लिए दावोस बैठक में शामिल हुई थी। इससे प्रदेश को कोई विशेष लाभ नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, "अब हम दावोस में भाग नहीं ले रहे हैं क्योंकि यह निवेश साकार करने के उद्देश्य को पूरा नहीं करता है। इसके बजाय, हम अपने स्वयं के निवेशक शिखर सम्मेलन आयोजित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"












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