तेलंगाना में BRS की हार का आंध्र में विश्लेषण, क्या है TDP और YSRCP का दावा, जानिए
तेलंगाना राज्य गठन के बाद से लगातार सत्ता में काबिज रही बीआरएस इस बार विधानसभा चुनाव में बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। हालांकि पार्टी के दिग्गज इस बार हैट्रिक बनाने का दावा कर रही थी। तेलंगाना चुनाव के बाद अगले साल आंध्र प्रदेश में भी चुनाव हैं। ऐसे में यहां तेलगु देशम पार्टी और वाईएसआरसीपी दोनों टीडीपी की हार की वजहों का अपने- अपने तरीके से तेलंगाना चुनाव परिणाम का विश्लेषण कर रही हैं।
टीडीपी तेलंगाना में कांग्रेस वापसी वजह राज्य में सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) मान रही है। जबकि वाईएसआरसीपी एक सूत्र के मुताबिक तेलंगाना चुनाव परिणामों से आंध्र का सत्तारूढ़ दल बड़े बदलाव करने वाली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, " वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश चुनाव के लिए लगभग 80 प्रतिशत उम्मीदवारों का नाम दो महीने पहले तय कर लिया गया था। हालांकि, तेलंगाना चुनाव परिणामों के बाद स्थानीय स्तर पर मजबूत विरोध का सामना करने वाले विधायकों को टिकट देने से पहसे फिर से सर्वे किया जा रहा है। आने वाले दिनों में लगभग 40 ऐसे बदलावों की घोषणा होने की उम्मीद है।"

दरअसल, इससे पहले चंद्रबाबू नायडू ने कथित तौर पर आशंका व्यक्त की थी कि अगर पार्टी तेलंगाना चुनाव लड़ती है तो उसका प्रदर्शन खराब ही रहेगा। शायद, नायडू को सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस द्वारा तेलंगाना में टीडीपी के संभावित कमजोर प्रदर्शन का फायदा उठाने की आशंका थी। दरअसल, बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने के बावजूद तेलंगाना चुनाव में उनकी जन सेना पार्टी के हार के बाद वाईएसआरसीपी ने पवन कल्याण का मजाक उड़ाया, जिससे उनकी पार्टी में काफी सुधार हुआ है।
बता दें कि रेवंत रेड्डी कांग्रेस में शामिल होने से पहले तेलंगाना टीडीपी के कार्यकारी अध्यक्ष थे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के बावजूद उन्होंने टीडीपी और चंद्रबाबू नायडू के साथ अपने जुड़ाव को बरकरार रखा। टीडीपी के साथ उनकी भावनात्मक निकटता ने उन्हें 2019 में मल्काजगिरी लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीतने में मदद की, जो हैदराबाद का एक हिस्सा है। दरअसल, टीडीपी ने 2014 में बीजेपी के साथ गठबंधन में यह सीट जीती थी।












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