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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में बंद किया कामकाज, सरकार पर लगाया ये आरोप

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में बंद किया कामकाज, सरकार पर लगाया ये आरोप

नई दिल्‍ली।अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरेशनल इंडिया ने भारत में अपने कामकाज को रोक दिया है। मंगलवार को भारत में अपना कामकाज रोकने के साथ ही एमनेस्‍टी इंटनेशनल ने आरोप लगाया है कि चूंकि भारत सरकार ने 2020 की शुरुआत में ही एक कार्रवाई के तहत उसके अकाउंट फ्रीज़ कर दिए थे। जिसके कारण हमें अपने अधिकतर कर्मचारियों को निकालना पड़ा। इसके साथ ही इस संस्‍था ने भारत सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार उसके पीछे पड़ी हुई है।

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    Amnesty International India ने भारत में कामकाज किया बंद, सरकार पर लगाया बड़ा आरोप | वनइंडिया हिंदी
    Amnesty International

    एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि सरकार द्वारा बैंक खातों को फ्रीज करने के बाद भारत में काम रुक गया है। सरकार ने संस्‍था को भारत में कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और संस्‍था के अभियान और अनुसंधान कार्यों को रोकने के लिए मजबूर किया है। मानवाधिकार निगरानी संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सरकार पर ये आरोप लगाते हुए कामकाज रोक दिया है। वहीं भारत सरकार का कहना है कि इस संस्था ने Foreign Contribution (Regulation) Act के तहत कभी रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है, जो विदेशी फंडिंग के लिए जरूरी होता है।

    एमनेस्टी ने भारत सरकार पर लगाया ये आरोप

    एमनेस्टी ने इसके संबंध में अपनी एक प्रेस रिलीज जारी कर लिखा 'भारत सरकार की ओर से एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बैंक अकाउंट्स को पूरी तरह से फ्रीज़ कर दिया है, इसकी जानकारी संस्था को 10 सितंबर 2020 को हुई है। इसकी वजह से संस्‍था का कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुका है। संस्‍था ने ये कहा कि भारत सरकार द्वारा मानवाधिकार संस्थाओं के खिलाफ चलाए जा रहे विच-हंट अभियान का ये अगला कदम है। संस्‍था के ऊपर लगाए जा रहे सभी आरेाप निराधार हैं उसने सभी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन किया है।

    संस्था के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर ने बोली ये बात

    संस्था के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अविनाश कुमार ने कहा कि 'पिछले दो सालों में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया पर सरकार की लगातार हो रही कार्रवाई को अचानक नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय सहित दूसरी सरकारी एजेंसियों की ओर से शोषण, दिल्‍ली हिंसा, कश्‍मीर में मानवाधिकारो के उलंघन के खिलाफ आवाज उठाने और भारत सरकार की भूमिका की जवाबदेही तय करने की मांग उठाने की वजह से ये सब हो रहा है। ऐसे अभियान के लिए, जिसने हमेशा अन्याय के लिए आवाज उठाई है। संस्‍था ने आरोप लगाया कि सरकार का ये नया हमला उनके प्रतिरोध में आवाज उठने के बाद किया गया है।

    विदेशी फंडिंग हासिल करने में अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ जांच कर रही है

    बता दें बेंगलुरु में इसके कार्यालयों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पिछले साल नवंबर में आरोपों के संबंध में छापा मारा गया था कि गैर-लाभार्थियों को कानून के उल्लंघन में विदेशी धन प्राप्त हुआ था। प्रवर्तन निदेशालय एमनेस्टी इंटरनेशनल संस्था के खिलाफ विदेशी फंडिंग हासिल करने में अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ जांच कर रही है। गृह मंत्रालय का आरोप है कि संस्था ने 'भारत में FDI (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) के जरिए पैसे मंगाए', जिसकी नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं को अनुमति नहीं है। सरकार ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट को विदेशी धन प्राप्त करने की अनुमति को अस्वीकार कर दिया था, जो कई मामलों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है, जिसमें सुधा भारद्वाज, रोना विल्सन और वरवारा राव जैसे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी शामिल थी, जिन पर माओवादी विचारधारा होने का आरोप लगाया गया था।

    एमनेस्टी इंडिया की संस्थाओं को 10 करोड़ रुपए का भुगतान किया था

    वर्ष 2017 में पर्वलतन निदेशालय ने एमनेस्‍टी इंडिया संस्था के अकाउंट फ्रीज़ किए थे जिसके बाद संस्‍था ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उसे कुछ राहत मिली थी, लेकिन उसका अकाउंट सील था। पिछले साल सीबीआई ने भी उनके खिलाफ केस दर्ज किया। शिकायत में कहा गया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल यूके ने कथित तौर पर मंत्रालय की मंजूरी के बिना FDI के रूप में एमनेस्टी इंडिया की संस्थाओं को 10 करोड़ रुपए का भुगतान किया था। इसमें कहा गया कि, 'इसके अलावा 26 करोड़ की रकम यूके की संस्थाओं की ओर से मंत्रालय की मंजूरी के बिना एमनेस्टी (इंडिया) को दी गईं, जिसे भारत में NGO की एक्‍टविटी पर खर्च किया गया और ये FCRA का उल्लंघन है।

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