वन नेशन, वन इलेक्शन पर बोले अमित शाह, दो दशक तक देश में यह लागू था
वन नेशन, वन इलेक्शन पर अमित शाह ने कहा कि यह कोई नया विचार नहीं है। देश में दो दशकों तक वन नेशन, वन इलेक्शन यह चला है। वर्ष 1971 में इंदिरा गांधी ने मध्यावधि चुनाव आमंत्रित किया, जिसकी वजह से सारे चुनाव मिसमैच हुआ। हम कह रहे हैं कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए।
मोदी जी ने इसको लेकर एक कमेटी बनाई। इस कमेटी ने अपनी सिफारिश दी है कि वन नेशन, वन इलेक्शन होना चाहिए। कई दलों ने इसपर अपनी राय दी है। सिर्फ 15 दलों ने इसके खिलाफ अपनी राय दी है, जबकि 32 दलों ने इसके समर्थन में बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों से भी सुझाव लिए गए। कई पूर्व राज्यपाल, अर्थशास्त्रियों से सुझाव लिया गया। उन्होंने कहा कि देश में एक बार ही चुनाव होना चाहिए। चुनाव के बाद बाकी के पांच पास देश के विकास में ही लगाने चाहिए।
कांग्रेस को सुधार रोकना नहीं चाहिए
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस को इतना बड़ा सुधार नहीं रोकना चाहिए, उन्हें तो वैसे ही कुछ नहीं मिलने वाला है। जनता को यह मालूम है कि ऊपर किसे वोट देना है, नीचे किसे वोट देना है। केंद्र और राज्य के अलग घोषणा पत्र होंगे, लोगों में किसी भी तरह का भ्रम नहीं होगा। सिर्फ चुनाव का खर्चा, आचार संहिता के कारण विकास कार्य में बाधा, जनता का समय व्यय नहीं हो, इसको लेकर वन नेशन, वन इलेक्शन की हम वकालत कर रहे हैं।
पिछले 10 साल में लिए बड़े फैसले
अमित शाह ने कहा कि हमने बड़े फैसले लेने के लिए कहा नहीं बल्कि मोदी जी ने लिया है। मोदी जी ने लॉकडाउन लगाकर देश को कोरोना जैसी महामारी से बचाएंगे। मोदी जी जीएसटी लेकर आए, आर्टिकल 370 को हटाया, मोदी जी के समय में राम मंदिर बना, तीन तलाक को हटाया, वन रैंक वन पेंशन लाया।
पीएम मोदी ने नोटबंदी की, लॉकडाउन लगाकर देश को कोरोना से बचाया। तीन करोड़ गरीब महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है। कांग्रेस ने सिर्फ गरीबी हटाने का नारा दिया, मोदी जी ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है। हमने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लाएंगे, देश को दुनिया को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएंगे।












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