Amit Shah Bday: बहनों को चांदी में और अमित शाह को पीतल की थाली में परोसा जाता था भोजन, दिल छू लेगी वजह
Amit Shah Bday:बहनों को चांदी में और धनाड्य अमित शाह को पीतल की थाली में परोसा जाता था भोजन, दिल छू लेगी वजह
Amit Shah Birthday: देश के गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को 58 वर्ष को गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद अमित शाह जिन्हें राजनीति का चाणक्य भी कहा जाता है, उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के कड़ी मेहनत और त्याग किया है। धनाढ्य परिवार में जन्म लेने के बावजूद उनके मां-बाप ने जिन सिद्धांतो के साथ उनकी परविश की उसका ही ये प्रतिफल है।

धनाड्य परिवार में जन्में अमित शाह के परदादा थे नगरसेठ
अमित शाह का परिवार गुजरात के धनाड्य परिवारों में एक है। गुजराती हिन्दू वैष्णव बनिया परिवार में जन्में शाह के परदादा नगरसेठ थे। बचपन से आरएसएस में शाखा में जाने वाले अमित शाह के माता-पिता ने उनकी परवरिश बहुत सामान्य तरीके से की। उन्हें पैसों की चमक-दमक से दूर रखा गया।
Recommended Video

बहनों को चांदी के लेकिन अमित को पीतल के बर्तन में परोसा जाता था भोजन
बताया जाता है कि अमित शाही की छह बहनें थी, छह बहनों में सबसे छोटे भाई होने के बावजूद उनकी मां बेटियां को तो चांदी के बर्तन में खाना देती थी लेकिन अमित शाह को पीत के बर्तन में खाना परोसा जाता था। बहनों की बग्घी पर बिठाकर स्कूल भेजा जाता था लेकिन अमित शाह सादगी भरे जीवन के लिए अभयस्त हो इसके लिए उन्हें पैदल ही स्कूल भेजा जाता था।

आलीशान हवेली में पले अमित शाह को रईसी की चमक से दूर रखा गया
अमित शाह की परवरिश ऐसी इसलिए की गई कि उन्हें रईसी की चमक से दूर रखा जा सकें। यहीं कारण हे कि आलीशान हवेली में जीवन गुजारने के बावजूद आज भी अमित शाह बहुत ही सादगी भरा जीवन बिताते हैं। आज भी वो अपने राजनीतिक दौरे के दौरान आलीशान होटल में रुकने के बजाय सरकारी गेस्ट हाउस में ठहरना ही पसंद करते हैं।

पीएम के अमित शाह क्यों हैं इतने करीब
पीएम मोदी की छाप अमित शाह के सादगी भरे जीवनशैली पर भी दिखती है। शुद्ध शाकाहारी भोजन अमित शाह की नशे पत्ती की कोई बुरी आदत नहीं है। छात्र जीवन में संघी रहे अमित शाह की पहली मुलाकात नरेंद्र मोदी से 1982 में उनके अपने कॉलेज के दिनों में हुयी थी। वोटों के जादूगर और इलेक्शन मशीन के अलावा राजनीति के चाणक्य कहे जानें वाले अमित शाह बीजेपी के इतिहास में सबसे सफल अध्यक्षों में से एक हैं। 2014 लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक भाजपा को देश के सभी राज्यों में मजबूत बनाने में अमित शाह की बड़ी भूमिका रही है।

दिग्गज नेताओं को चुनाव जीताने में निभाई है अहम भूमिका इन
कौटिल्य के अर्थशास्त्र को 9 साल की उम्र में पढ़ने वाले अमित शाह ने 1987 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे और 1987 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का सदस्य बनाया गया। 1991 में अमित शाह को बड़ा राजनीतिक अवसर मिला उन्होंने भाजपा के दिग्गन नेता अडवाणी के लिए गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला।इसके बाद 1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात से चुनाव लड़ना तय किया तो शाह ने प्रचार की बांगडोर अपने हाथ में संभाली थी। कम उम्र में इतने दिग्गज नेताओं के सानिध्य में रहकर अमित शाह अपने कौशल से राजनीति के चाणक्य बन गए।

अमित शाह को क्यों कहा जाता है महाराष्ट्र् का दामाद
कोल्हापुर के रईस परिवार की बेटी सोनल से अमित शाह की शादी 1986 में हुई थी इसलिए शाह को महाराष्ट्र का दामााद भी कहा जाता है। अमित शाह का एक बेटा है जय शाह है जो बीसीसीआई के सचिव की कुर्सी संभाल रहे हैं।












Click it and Unblock the Notifications