अमित शाह बोले- सत्ता में आने पर NRC लाएंगे, देश से हर घुसपैठिए को बाहर करेंगे

नई दिल्ली- बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी को उमर अब्दुल्ला के बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती दी है। बीजेपी अध्यक्ष ने प्रदेश के कलिम्पोंग की रैली में दीदी समेत बाकी मोदी विरोधी नेताओं पर भी जमकर हमला बोला है। दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रचार करते हुए उन्होंने गोरखा एवं चाय बागानों की समस्या को भी जोर-शोर से उठाया और सरकार बनने पर सबका हल निकालने का वादा किया। अमित शाह ने ममता बनर्जी पर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लेकर लोगों को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया।

गोरखाओं को साधने की कोशिश

गोरखाओं को साधने की कोशिश

उत्तर बंगाल की रैली में बीजेपी अध्यक्ष ने गोरखा भावना को भी पुचकारने की कोशिश की है। उन्होंने गोरखा नेता सुभाष घीसिंग का नाम लेकर ममता बनर्जी पर गोरखा समुदाय के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा- "ममता बनर्जी देशभक्त गोरखा समुदाय को परेशान कर रही हैं। उनकी दमनकारी नीतियों के चलते करीब 3,000 गोरखा दार्जिलिंग छोड़ने को मजबूर हुए हैं। उन्हें अनगिनत फर्जी मामलों में फंसाया गया है।" हालांकि उन्होंने पहाड़ की समस्या का स्थाई समाधान निकालने की बात तो कही, लेकिन अलग गोरखालैंड की मांग पर ज्यादा कुछ नहीं बोले। दरअसल, बीजेपी इसबार दार्जिलिंग की हाइप्रोफाइल सीट पर लगातार तीसरी जीत मुकम्मल करने का प्रयास कर रही है, जहां गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर 2017 के जून से सितंबर तक 104 दिनों तक की ऐतिहासिक हड़ताल के कारण सारा जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। दार्जिलिंग की सीट पर बीजेपी ने इसबार दिल्ली में रहने वाले एंटरप्रेन्योर राजू बिस्टा को उम्मीदवार बनाया है। उनका मुकाबला वहां मुख्य रूप से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) अमर सिंह राय के साथ है, जो टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) के बिनय तमांग गुट का समर्थन हासिल है। जबकि,गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) बिमल गुरुंग गुट, गोरखा नेशनल लिब्रेशन फ्रंट (GNLF), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ रिवॉल्युशनरी मार्क्सि्ट्स (CPRM)एवं ऑल इंडिया गोरखा लीग (AIGL) बीजेपी के मैनेफेस्टो का समर्थन कर चुकी है। गौरतलब है कि बीजेपी ने अपने मैनिफेस्टो में दार्जिलिंग पहाड़, सिलीगुड़ी,तराई और द्वार की समस्याओं का स्थाई समाधान निकालने का वादा किया है और साथ ही 11 भारतीय गोरखा उप समुदायों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का भी भरोसा दिया है।

कश्मीर का बहाना, दीदी पर निशाना

कश्मीर का बहाना, दीदी पर निशाना

अमित शाह ने ममता को ललकारते हुए कहा है कि, " ममता दीदी ने विपक्ष के सभी नेताओं को बुलाया था (19 जनवरी को कोलकाता में), वहां उमर अब्दुल्ला भी थे। अब्दुल्ला अब कह रहे हैं कि कश्मीर का खुद का भी एक प्रधानमंत्री होना चाहिए। क्या किसी देश में दो प्रधानमंत्री हो सकते हैं। वे इसलिए कह रहे हैं ताकि कश्मीर को भारत से अलग किया जा सके। मैं इस प्लेटफॉर्म से ममता दीदी से पूछना चाहता हूं कि क्या वे अब्दुल्ला की इस टिप्पणी का समर्थन करती हैं?" गौरतलब है कि अब्दुल्ला के उस बयान के बाद से ही बीजेपी अपनी विरोधी पार्टियों के खिलाफ हमलावर हो चुकी है। इस दौरान शाह ने पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र करते हुए भी ममता और उनके सहयोगियों पर वोट बैंक के खातिर राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि "पुलवामा हमले के 13वें दिन मोदी ने एयर स्ट्राइक का आदेश दिया और बहादुर जवानों ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी कैंप्स पर हमला बोल दिया और उनके ठिकाने को नेस्तोनाबूद करके वापस लौटे। पाकिस्तान को सबक सिखा दिया गया। लेकिन, जब पूरा देश जश्न मना रहा था, पटाखे जला रहा था, मिठाइयां बांट रहा था और पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा था, तब पाकिस्तान में एवं ममता बनर्जी के दफ्तर में शोक मनाजा जा रहा था। वो अपने वोट बैंक के चलते दुखी थीं।" हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक शाह ने बंगाल में सिटिजनशिप स्क्रीनिंग को लेकर भी बात की। शाह ने वादा किया कि उनकी पार्टी 2020 में सिटिजनशि (अमेंडमेंट) बिल पास करा लेगी, क्योंकि तब तक उनके मुताबिक राज्यसभा में एनडीए के पास अपना बहुमत होगा।

चाय मजदूरों का संकट दूर करने का वादा

चाय मजदूरों का संकट दूर करने का वादा

शाह ने दावा किया कि बीजेपी के दोबारा सत्ता में आने पर मोदी चाय उद्योग के संकट को दूर करेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर चाय बागान मजदूरों को भी 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा। गौरतलब है कि ममता बनर्जी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने दिया है। शाह ने ये भी कहा की राज्य की टीएमसी सरकार ने चाय बागान मजदूरों के लिए कुछ भी नहीं किया है। खास बात ये है कि उत्तर बंगाल के 283 चाय बागानों में करीब 3.5 लाख मजदूर काम करते हैं। लेकिन, एक दर्जन से ज्यादा बागान बंद हो जाने के कारण हजारों मजदूरों के परिवारों की जिंदगी दूभर हो चुकी है। इस चुनाव में बीजेपी पश्चिम बंगाल पर बहुत ज्यादा फोकस कर रही है और पार्टी अध्यक्ष ने राज्य की 42 में से 23 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर रखा है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां की 34 सीटें टीएमसी जीत गई थी और बीजेपी को सिर्फ 2 सीटों पर ही सफलता मिली थी।

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