कामाख्या मंदिर: 500 साल में पहली बार बिना भक्तों के होगा अंबुवाची उत्सव, तांत्रिकों को भी अनुमति नहीं

नई दिल्ली: कोरोना वायरस से देश बुरी तरह प्रभावित है। अनलॉक-1 के साथ सरकार ने धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत तो दे दी है, लेकिन अभी भी कई जगहों पर सख्ती बरती जा रही है। इस बार भी 22 से लेकर 26 जून तक असम में स्थित कामाख्या मंदिर में अंबुवाची उत्सव मनाया जाएगा, लेकिन मेला नहीं लगेगा। इसके साथ ही किसी भी भक्त को इसमें शामिल होने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हर साल इस मेले में 10 लाख से ज्यादा लोग शामिल होते हैं।

क्या है महत्व?

क्या है महत्व?

कामाख्या मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां पर देवी की पूजा योनि रूप में की जाती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक सती जी ने अपने पिता से नाराज होकर अग्नि समाधि ले ली थी। इस दौरान भगवान शिव उनका जला हुआ शव लेकर तीनों लोकों में घूम थे। इस पर देवताओं ने भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र से सती जी के शव को काटने का आग्रह किया। इसके बाद उनका अंग जहां-जहां गिरा वहां-वहां उनकी पूजा की जाने लगी। इसमें सती जी की योनि असम में गिरी थी, जहां पर कामाख्या मंदिर बना है। हर साल यहां पर विशेष मेला आयोजित होता है, जिसे अंबुवाची उत्सव कहते हैं।

तांत्रिकों के लिए है खास

तांत्रिकों के लिए है खास

स्थानीय लोगों के मुताबिक अंबुवाची उत्सव के दौरान यहां पराशक्तियां जागृत रहती हैं। जिस वजह से बड़ी संख्या में तांत्रिक और अघोरी यहां पर आकर अपनी सिद्धियां प्राप्त करते हैं। 22 से 25 जून तक मंदिर को बंद रखा जाता है। इसके बाद 26 जून को इसे शुद्ध करके खोला जाता है। मंदिर खुलने के बाद प्रसाद के रूप में सिंदूर से भीगा हुआ कपड़ा दिया जाता है। कहते हैं कि इस दौरान मां सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। साथ ही तांत्रिकों को सिद्धियां भी आसानी से प्राप्त हो जाती हैं। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक इस बार उत्सव तो होगा, लेकिन भक्तों को इजाजत नहीं मिलेगी। इस मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में हुआ था, ऐसे में 500 साल में ये पहला मौका है, जब बिना भक्तों के अंबुवाची उत्सव कामाख्या मंदिर में होगा।

 प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

मंदिर प्रशासन के मुताबिक 22 से 26 जून तक उत्सव तो चलेगा, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते भक्तों को इसमें शामिल होने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही तंत्र साधक, नागा साधु, तांत्रिकों आदि भी नहीं शामिल होंगे। इसके लिए गुवाहाटी प्रशासन ने शहर के सभी होटलों को भी एडवाइजरी जारी कर दी है। जिसके मुताबिक कोई भी होटल और धर्मशाला बुकिंग नहीं लेंगे। ये मेला असम के सबसे बड़े मेले में से एक है, जिसमें हर साल 10 लाख से ज्यादा लोग शामिल होते हैं।

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