पहले भी हत्या के प्रयास कर चुके हैं संसद में चाकू निकालने वाले सांसद

Modugula Venugopala Reddy
नई दिल्ली। अलग तेलंगाना के गठन पर बिल पेश करते ही सदन में कांग्रेस से निष्कासित सांसद एल राजगोपाल ने काली मिर्च के पॉवडर का स्प्रे निकाला और वेल में पहुंच गये। स्प्रे छिड़कते ही अफरातफरी मच गई और देखते ही देखते तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के एक सांसद ने कथ‍ित तौर पर चाकू निकाल लिया। चाकू निकालने वाले सांसद का नाम है एम. वेणुगोपाल। यही नहीं वेणुगोपाल ने सदन में लगे माइक को भी तोड़ दिया और बाजू में खड़े सांसद के पेट में घुसा दिया।

सदन के बाहर निकलते ही वेणुगोपाल ने चाकू निकालने की खबर का खंडन किया, लेकिन हां माइक तोड़ने की बात जरूर स्वीकार की। देखते ही देखते लोकतंत्र की हत्या करने वाले ये दोनो नाम देश भर में चर्चा का विषय बन गये। इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए हम आपको बताने जा रहे हैं वोणुगोपाल के बारे में ऐसे तथ्य जो शायद आप नहीं जानते होंगे। अगर आज की घटना के परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह वो हैं, जो पहले भी हत्या के प्रयास कर चुके हैं।

वेणुगोपाला रेड्डी तेलुगू देसम पार्टी के हैं और 2009 के चुनाव में नारासराओपेट से सांसद चुने गये थे। आप गुंटुर जिले के रहने वाले हैं। फ्रांस, जर्मनी और इटली तक की यात्राएं कर चुके वोणुगोपाल वैसे तो आम जनता से खासा जुड़ाव रखते हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारे में इनकी छवि अच्छी नहीं मानी जाती है। इन पर गुंटुर के ही दो थानों में केस दर्ज हैं। पहला मंगलागिरी ग्रामीण में केस (237/86 फाइल PRC7/87) दर्ज है, जिसमें इन पर आईपीसी की धारा 147, 148, 447, 307, 324, 149 के तहत यानी हत्या के प्रयास, असलहे लेकर खुलेआम घूमना, धमकाना, दंगे भड़काने की कोश‍िश करना आदि का मुकदमा है। दूसरा मुकदमा (No.197/93,CC No.409/95) अपने पद का दुरुपयोग करने के लिये धारा 143, 341, 186 के तहत नगरामपलेम में दर्ज है।

सीबीआई जांच भी

रैम्की इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड में फ्रॉड का केस है जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। जांच के घेरे में वोणुगोपाला रेड्डी भी हैं। सांसद बनने के बाद वोणुगोपाला ने रैम्की लिमिटेड से सारे पद छोड़ दिये और अपनी जगह भाई अयोया रामी रेड्डी को कंपनी का प्रोमोटर बना दिया। सीबीआई ने जगन मोहन रेड्डी के साथ-साथ अयोध्या रेड्डी को भी लपेटे में लिया है।

बताया जाता है कि तेलंगाना क्षेत्र में दो बड़े सिंचाई के प्रोजेक्ट वोणुगोपाल की कंपनी रैम्की के पास ही हैं। पहला अदीलाबाद में प्रोजेक्ट प्रनाहिता-चेवेल्ला सुजल स्रावंत‍ि प्रोजेक्ट, जिसकी कीमत 229 करोड़ है, दूसरा ज्योतिराओफूले डुमुडगुडम-नागर्जुना सागर प्रोजेक्ट जिसकी कीमत 2536 करोड़ है। संसद में हंगामा करने और तेलंगाना को अलग किये जाने का विरोध करने के पीछे यह भी कारण हो सकता है, क्योंकि राज्य के बंटवारे के बाद परियोजना पर असर पड़ सकता है, यानी इनकी कमाई पर बट्टा बैठ सकता है।

पढ़ें- कभी 6000 लोगों को दिया था जीवन, आज की लोकतंत्र की हत्या

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