मुजफ्फरनगर के दर्द, सैफई की मस्ती पर अख‍िलेश की भड़ास फॉर मीडिया

लखनऊ। एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर दगों के राहत श‍िविरों में ठंड से ठिठुरते लोग और दूसरी तरफ सैफई महोत्सव की चकाचौंध एक साथ टीवी चैनलों पर दिखाये जाने पर गुस्साये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अख‍िलेश यादव ने कहा है कि मीडिया को अगर दंगों या उससे प्रभावित लोगों से कोई सवाल करने हैं, तो मुझसे करें, मेरे मेहमान कलाकारों से क्यों कर रहे हैं। अख‍िलेश ने जमकर मीडिया के ख‍िलाफ भड़ास निकाली।

अख‍िलेश यादव ने कहा कि सैफई महोत्सव की शुरुआत मेरे भाई ने शुरू की थी। उस समय यह महोत्सव बेहद साधारण था। फिर हमने उसमें साइकिल मैराथन जोड़ी, टेनिस प्रेतियोगिता, दंगल एक दिन होता था उसमें दिन बढ़ाये। हरियाणा पंजाब दिल्ली महाराष्ट्र मध्य प्रदेश के पहलवान वहां आते हैं। साथ ही कई खेल प्रतियोगिताएं होती हैं। जिससे प्रदेश में खेल एवं संस्कृति को बढ़ावा मिलता है। बड़ी संख्या में बच्चे से लेकर बूढ़ों तक लोग प्रतिस्पर्धा में भाग लेते हैं। दूर-दूर के गांवों से व्यापारी आते हैं अपनी दुकान लगाते हैं। उनका व्यापार बढ़ता है। कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिये व्यवस्था की जाती है। यहां पर हम उनसे पैसा बहुत कम लेते हैं। घर गृहस्थी की तमाम चीजें मिलती हैं।

300 करोड़ की बात किसने कही

हर वर्ष आयोजन को और कैसे बेहतर बनायें, यह प्रयास रहते हैं। सपा की सरकार नहीं भी रही है, तो भी इस महोत्सव में कोई कमी नहीं रही है। रही बात महोत्सव के खर्च पर तो उसमें 300 करोड़ नहीं बल्कि 10 से 15 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। जो कलाकार मुजफ्फरनगर की घटना के बारे में नहीं जानते हैं, पत्रकार उनसे क्यों सवाल करते हैं। राजनीतिक दल के जो लोग वहां गये हमने उनसे कहा कि अगर आप मदद करना चाहते हैं तो सरकार आपके साथ है।

अख‍िलेश ने दैनिक जागरण का नाम लेते हुए कहा कि अखबार ने गलत खबर छापी है। यह वही अखबार है, जिसके मालिकान सपा से जुड़े रहे हैं, राज्य सभा की सीट मांग रहे थे, नहीं दी तो वो हमारे एंटी हो गये। वो तो जुआ खेलते पकड़े गये थे, उसकी वीडियो क्लिप भी मीडिया के पास है, वो क्यों नहीं चलाते हैं आप लोग। जिस 300 करोड़ के बजट की बात आप कर रहे हैं, वो पूरे प्रदेश में होने वाले महोत्सवों के लिये दिया गया बजट है। उसमें से एक छोटा भाग सैफई को दिया गया है। इस गलत खबर के लिये मीडिया को माफी मांगनी चाहिये। नहीं तो वो मुझे उस 300 करोड़ रुपए का हिसाब दें। जहां तक कलाकारों का सवाल है तो वो हर बार आते हैं, घटना के बारे में उनको नीचा दिखाना, उनसे मुजफ्फरनगर पर सवाल करना, मेहमान की बेइज्जती करना है।

अख‍िलेश की हेलीकॉप्टर यात्रा

अख‍िलेश यादव ने प्रेसवार्ता में उस हेलीकॉप्टर यात्रा का जिक्र किया, जिसमें वो अपने साथ एक चैनल के पत्रकार को ले गये थे। इस विश्वास पर कि उनके द्वारा किये जाने वाले कार्य टीवी पर द‍िखाये जायेंगे। अख‍िलेश ने कहा कि पूरे दिन मैंने एक चैनल के पत्रकार को अपने साथ हेलीकॉप्टर में घुमाया। जाते वक्त उसने कहा कि आधे घंटे की स्टोरी चलायी जायेगी। हम राह देखते रहे, हमारे कार्यकर्ता चैनल की राह तकते रहे, लेकिन स्टोरी आज तक नहीं चली। बाद में एसएमएस आया कि मार्केटिंग और सेल्स के लोगों ने स्टोरी चलाने से मना कर दिया।

अख‍िलेश ने कहा कि मीडिया आधी-अधूरी खबर पा जाता है और एक कमरे में बैठ कर खुद जज बन जाता है और सही गलत के सारे फैसले ले डालता है। अगर लोकतंत्र को मजबूत बनाना है, तो मीडिया को अपनी भूमिका में सुधार लाना होगा। स्लाइडर में देखें तस्वीरें, जो साथ दिखाये जाने पर चुभ गईं अख‍िलेश यादव को।

समाजवादी पार्टी

समाजवादी पार्टी

मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी मौज वादी पार्टी में बदल गई है। मुलायम सिंह के सुपुत्र अखिलेश यादव का प्रगतिवाद मस्तीवादी पार्टी बन गई है।

ठुमकों की चमक

ठुमकों की चमक

एक तरफ रात का अंधिराया है तो दूरसी तरफ सलमान और माधुरी के करोड़ों के ठुमकों की चमक। यकीन नहीं होता कि ये दोनों की तस्वीर एक ही प्रदेश की है।

ठंड से मरते लोग

ठंड से मरते लोग

एक तरफ सैफई में लोक संस्कृति के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है तो दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर में ठंड से मरते लोग।

प्रदेश में तस्वीर

प्रदेश में तस्वीर

यकीन नहीं होता कि एक की प्रदेश में तस्वीर इतनी तेजी से कैसे बदल जाती है।

जहन्नुम का सफर

जहन्नुम का सफर

महज चंद किलोमीटर की दूरी बसे सैफई और मुजफ्फरनगर का दौरा करने पर आप को महसूस हो जाएगा कि जन्नत से जहन्नुम का सफर कैसा होगा।

बॉलिवुड

बॉलिवुड

मुलायम सिंह के गांव सैफई में बॉलिवुड का मेला लगा है। करोड़ो-करोड़ रुपए पानी की तरह बहा दिए गए है।

अब तक अपने घर नहीं पहुंचे

अब तक अपने घर नहीं पहुंचे

मुजफ्फरनगर के शिविरों में खाने को तो सरकार ढेर सारी बिरयानी बांट देती है, लेकिन तमाम परिवार हैं, जो अब तक अपने घर नहीं पहुंचे।

बॉलिवुड के सितारे

बॉलिवुड के सितारे

माधुरी दीक्षित, सलमान खान जैसे बॉलिवुड के सितारे नेताजी का मनोरंजन कर रहे है।

खामोशी

खामोशी

सैफई में कान को सुन्न कर देने वाला संगीत है तो मुजफ्फरनगर में मौत की खामोशी पसरी है।

संवेदनहीन समाजवाद

संवेदनहीन समाजवाद

मुलायम की ये संवेदनहीन समाजवाद कै ये कैसा रुप है जो एक ही प्रदेश की दो विचित्र तस्वीर पेश कर रहा है। समाजवादी इतने तक में ही नहीं रुके।

कुछ सवाल

कुछ सवाल

अब ऐसे कुछ सवाल जो सपा सरकार के लिए है। सवाल ये की क्य़ा यूपी की सरकार संवेदनहीन हो गई है?

 समाजवाद

समाजवाद

मुलायम की ये संवेदनहीन समाजवाद कै ये कैसा रुप है जो एक ही प्रदेश की दो विचित्र तस्वीर पेश कर रहा है। समाजवादी इतने तक में ही नहीं रुके।

सरकार

सरकार

अब ऐसे कुछ सवाल जो सपा सरकार के लिए है। सवाल ये की क्य़ा यूपी की सरकार संवेदनहीन हो गई है?

 बॉलिवुड के सितारे

बॉलिवुड के सितारे

माधुरी दीक्षित, सलमान खान जैसे बॉलिवुड के सितारे नेताजी का मनोरंजन कर रहे है।

बेबसी के आंसू

बेबसी के आंसू

क्या ऐसे वक्त जब कि राहत शिविरों में लोग बेबसी की आंसू रो रहे हैं नेताओं का विदेश दौरा सही है। खुद मुजफ्फरनगर दंगा पीडि़त भी मानने है कि खास उनका गांव भी सैफई होता। इन सवालों का जबाव आखिर कौन देगा?

सैफई

सैफई

सैफई में कान को सुन्न कर देने वाला संगीत है तो मुजफ्फरनगर में मौत की खामोशी पसरी है।

 मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर

सरकार के दावों को माने तो पिछले 1 महीने में मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों पर 1 करोड़ रुपए खर्च हो चुके है।

चमक-दमक

चमक-दमक

हड्डी को लगा देने वाली ठंड में आस लगाए दंगा पीड़ितों को उम्मीद है कि उनके युवा मुक्यमंत्री अखिलेश तक उनकी दर्द जरुर पहुंचेंगी, लेकिन अखिलेश भी सत्ता की चमक-दमक में डूबे जश्न का मजा लूट रहे है। ऐसे में इन पीड़ियों को सिर्फ भगवान का सहारा ही है।

मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर

क्या ऐसे वक्त जब कि राहत शिविरों में लोग बेबसी की आंसू रो रहे हैं नेताओं का विदेश दौरा सही है।

 बॉलिवुड का मेला

बॉलिवुड का मेला

मुलायम सिंह के गांव सैफई में बॉलिवुड का मेला लगा है। करोड़ो-करोड़ रुपए पानी की तरह बहा दिए गए है।

मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर के शिविरों में खाने को तो सरकार ढेर सारी बिरयानी बांट देती है, लेकिन तमाम परिवार हैं, जो अब तक अपने घर नहीं पहुंचे।

संवेदनहीन समाजवाद

संवेदनहीन समाजवाद

मुलायम की ये संवेदनहीन समाजवाद कै ये कैसा रुप है जो एक ही प्रदेश की दो विचित्र तस्वीर पेश कर रहा है। समाजवादी इतने तक में ही नहीं रुके।

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