अग्निपथ की 'आग' में क्यों जल रहा है बिहार ? प्रशांत किशोर ने बताई 'असली' वजह

पटना, 19 जून: देशभर में अग्निपथ योजना के खिलाफ जिस तरह से सिलसिलेवार हिंसा चल रही है, उसका केंद्र बिहार बना हुआ है। वहां आंख मूंद कर सरकारी और निजी संपत्तियों को आग की लपटों में झोंका जा जा रहा है। शुरू में तो राज्य सरकार पूरी तरह से शिथिल रही, जिसके चलते दंगाइयों का हौसला और बढ़ गया। आंदोलन की आड़ में जिस तरह प्रदेश को हिंसा की आग में डाला गया है, निश्चित तौर पर वह गंभीरता से जांच का विषय बन गया है। क्योंकि, इस आंदोलन को लेकर सत्ताधारी बीजेपी और जेडीयू में ही टकराव की स्थिति पैदा हुई है। अब बिहार से राजनीति की पारी शुरू करने पहुंचे चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने इसपर टिप्पणी करते हुए बताया है कि इस हिंसा की वजह क्या है ?

प्रशांत किशोर ने बताई हिंसा की 'असली' वजह

प्रशांत किशोर ने बताई हिंसा की 'असली' वजह

'अग्निपथ योजना' के खिलाफ भड़की हिंसा को रोकने में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार जिस तरह से नाकाम रही है, उससे भाजपा-जदयू गठबंधन के बीच दरार स्पष्ट रूप से नजर आ रही है। योजना की घोषणा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने की है और बिहार में शुरू में कुछ दिनों तक दंगाइयों को एक तरह से खुली 'छूट' मिली दिखाई दी है। जबकि, कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार के हाथों में है और खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास गृह विभाग का भी जिम्मा है। अब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी दोनों सत्ताधारी दलों की आपसी खींचतान को इस हिंसा की वजह बता दिया है।

बीजेपी-जेडीयू में तनातनी का खामियाजा भुगत रही है जनता-पीके

बीजेपी-जेडीयू में तनातनी का खामियाजा भुगत रही है जनता-पीके

पीके ने एक ट्वीट कर कहा है, 'अग्निपथ पर आंदोलन होना चाहिए, हिंसा और तोड़फोड़ नहीं। बिहार की जनता जेडीयू और बीजेपी के आपसी तनातनी का खामियाजा भुगत रही है। बिहार जल रहा है और दोनों दल के नेता मामले को सुलझाने के बजाए एक दूसरे पर छींटाकशी और आरोप प्रत्यारोप में व्यस्त हैं।' गौरतलब है कि बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार है, जिसकी अगुवाई नीतीश कुमार कर रहे हैं और बीजेपी उसमें शामल है।

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    बीजेपी ने प्रशासन को ठहराया हिंसा नहीं रोकने के लिए जिम्मेदार

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    दरअसल, जैसे ही बिहार में अग्निपथ योजना के खिलाफ आंदोलन ने हिंसक रूप लेना शुरू किया, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर बीजेपी नेताओं के आवासों और पार्टी दफ्तों पर 'हमलों को रोकने में नाकाम रहने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 'प्रशासन के इशारे पर लोगों को निशाना बनाना और पुलिस के मूकदर्शक रहते एक खास राजनीतिक दल के दफ्तरों को नुकसान पहुंचाना अस्वीकार्य है।' उन्होंने कहा कि 'हम सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन जिस तरह से यहां पर हुआ, वह देश में कहीं नहीं हुआ। यह सिर्फ बिहार में हो रहा है। एक बीजेपी नेता के नाते मैं इस घटना की निंदा करता हूं और अगर यह नहीं रुकता तो यह किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा।' जायसवाल ने अपने घर पर हमले के बारे में कहा कि 'शुक्रवार को जब प्रदर्शनकारियों ने बेतिया जिले में मेरे घर पर हमला किया, हमने फायर ब्रिगेड को बुलाया.....फायर वालों ने कहा कि वे सिर्फ स्थानीय प्रशासन से अनुमति मिलने पर ही आएंगे।'

    भाजपा-शासित राज्यों में हिंसा पर बात क्यों नहीं करती बीजेपी- जदयू

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    जायसवाल के आरोपों के जवाब में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने बीजेपी शासित दूसरे राज्यों में भी अग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध की ओर इशारा किया। सीएम नीतीश के बेहद खासमखास माने जाने वाले जदयू नेता ने कहा, 'केंद्र सरकार ने एक फैसला लिया। दूसरे राज्यों में भी प्रदर्शन हुए हैं। युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतत हैं, इसलिए वह विरोध में आगे आए हैं। बेशक, हिंसा कोई रास्ता नहीं है। हम हिंसा को नहीं स्वीकार सकते। लेकिन, बीजेपी को यह भी सुनना चाहिए, युवाओं को क्या बात परेशान कर रही है और किस बात की चिंता हो रही है। बजाए इसके बीजेपी प्रशासन पर आरोप लगा रही है।' उन्होंने ये भी कहा कि 'जायसवाल बीजेपी शासित राज्यों में सुरक्षा बलों की नाकामी पर क्यों नहीं बात कर रहे हैं?'

    बिहार में हिंसा के लिए 718 गिरफ्तार- पुलिस

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    मोदी सरकार की ओर से सशस्त्र सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से ही बिहार में दंगाई उत्पात मचाए हुए हैं और आम लोगों की जिंदगी को खतरे में डालकर सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाए जा रहे हैं। उपद्रवियों ने अनेकों ट्रेनें, बसें और निजी वाहनों को फूंक डाला है और सार्वजनिक भवनों समेत निजी ठिकानों पर भी हमला किया है। बिहार पुलिस के बयान के मुताबिक गुरुवार से अबतक हिंसा से जुड़े मामलों में कम से कम 718 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रशांत किशोर को जेडीयू से 2020 में तब निकाल दिया गया था, जब उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर उसकी सहयोगी भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया था। जदयू ने किशोर पर 'पार्टी के फैसले और उसके काम करने के तरीकों' के खिलाफ काम करने और अनुशासनहीनता का आरोप लगाया था।

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