Aditya L1 Launch: भारत के सोलर मिशन से जुड़ी पांच अहम बातें, आखिर क्यों जरूरी है सन स्टडी?
Aditya L1 Launch: 'चंद्रयान 3' की कामयाबी के बाद भारत ने सूर्य की ओर फतह कर दी है। इसरो ने आज ही अपना सोलर मिशन लॉन्च किया है। आज सुबह आदित्य एल1 लॉन्च हुआ तो देशवासियों का सीना गर्व से ऊंचा हो गया। इस मिशन को समझने के लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि ये जरूरी क्यों है? ऐसे में चलिये समझते हैं इस मिशन से जुड़ी पांच अहम बातों को...
भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के निदेशक अनिल भारद्वाज के अनुसार, भारत L1 पर मिशन शुरू करने वाला तीसरा देश है। उन्होंने कहा, 'अभी तक आपके पास एल1 बिंदु पर ऐसा कोई उपग्रह मौजूद नहीं है।'

बिल्कुल चंद्रयान-3 की तरह
ये मिशन भले सूरज पर भेजा गया हो, लेकिन कहीं ना कहीं ये चंद्रयान 3 की ही तरह है। आदित्य एल1 अपने निर्धारित स्थान तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-3 जैसा ही रास्ता अपनाएगा। इसरो के आदित्य-एल1 सौर मिशन के लिए श्रीहरिकोटा (पृथ्वी) से एल1 तक की कुल यात्रा का समय लगभग चार महीने होने का अनुमान है।
सूरज के बारे में जानना क्यों जरूरी?
आदित्य एल1 का उद्देश्य पृथ्वी की ओर निर्देशित सौर ज्वालाओं या सौर हवाओं के रूप में गड़बड़ी का अध्ययन करना होगा, जो अंतरिक्ष के मौसम पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके साथ ही सूरज के बारे में जानकर ये पता लगाया जा सकेगा कि मौसम के बदलाव और ग्लोबल वॉर्मिंग की असली वजह आखिर क्या है।
भारत का पहला सौर मिशन
आदित्य L1 सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित वेधशाला है। 125 दिनों में पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी की यात्रा करने के बाद इसे लैग्रेंजियन बिंदु L1 के आसपास एक हेलो कक्षा में स्थापित किया जाएगा। ये देश का पहला सौर मिशन है। ऐसे में इसरो के साथ-साथ समस्त भारत के लिए ये मिशन बेहद ज्यादा जरूरी है।
भारत के लिए क्यों बड़ा है ये मिशन?
भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के निदेशक अनिल भारद्वाज के अनुसार, भारत L1 पर मिशन शुरू करने वाला तीसरा देश है। उन्होंने कहा, 'अभी तक आपके पास एल1 बिंदु पर ऐसा कोई उपग्रह मौजूद नहीं है।' इस मिशन के जरिये सूरज की बाहरी परतों या फिर कोरोना की स्टडी की जा सकेगी। ऐसे में भारत के लिए ये मिशन अपने आप में बेहद खास है।
'आदित्य एल1' का मकसद
अब बात करते हैं इस मिशन के मकसद के बारे में। दरअसल, इस मिशन के जरिये सूर्य के आसपास के वायुमंडल का अध्ययन किया जा सकेगा। इसके साथ ही क्रोमोस्फेरिक और कोरोनल हीटिंग की स्टडी भी की जा सकेगी। इतना ही नहीं इस मिशन के चलते फ्लेयर्स की रिसर्च होगी। इसके साथ ही सौर कोरोना की भौतिकी और इसके तापमान को भी मापा जा सकेगा।












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