अदाणी एंटरप्राइजेज को बड़ी राहत, दिल्ली कोर्ट ने पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को मानहानिपूर्ण सामग्री प्रकाशित करने से रोका
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को एक महत्वपूर्ण अदालत का फैसला मिला, जिससे पत्रकारों और संगठनों को मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने से रोका गया। अदालत का अंतरिम आदेश हानिकारक मीडिया कवरेज के आरोपों के बीच कंपनी की प्रतिष्ठा की रक्षा करने का लक्ष्य रखता है।
नई दिल्ली, 6 सितंबर — अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को दिल्ली की एक अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने शनिवार को कई पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और विदेशी संगठनों को कंपनी के खिलाफ अप्रमाणित और मानहानिपूर्ण सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया।

सीनियर सिविल जज अनुज कुमार सिंह ने यह अंतरिम आदेश AEL की ओर से दायर एक मुकदमे पर सुनवाई करते हुए दिया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि paranjoy.in, adaniwatch.org और adanifiles.com.au जैसे प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित लेखों, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए उसके वैश्विक कारोबार को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची जा रही है। मुकदमे में जिन लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है, उनमें पत्रकार परांजॉय गुहा ठाकुरता, रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, अयस्कांत दास, आयुष जोशी और संगठन जैसे बॉब ब्राउन फाउंडेशन, ड्रीमस्केप नेटवर्क इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गेटअप लिमिटेड, डोमेन डायरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (इंस्ट्रा के नाम से व्यापार करने वाले) और कुछ अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।
अदालत ने कहा, "प्रथम दृष्टया मामला वादी के पक्ष में बनता है। सार्वजनिक धारणा में छवि को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री का लगातार प्रसार मीडिया ट्रायल का रूप ले सकता है।" कोर्ट ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे अपने लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट्स से अप्रमाणित और मानहानिपूर्ण सामग्री हटाएं। यदि हटाना संभव न हो, तो पांच दिनों के भीतर उसे पूरी तरह से डिलीट करें।
इसके अलावा, अदालत ने AEL को अतिरिक्त लिंक की जानकारी देने की अनुमति दी है ताकि उन्हें हटाया जा सके। यदि प्रतिवादी ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो Google, YouTube और X (पूर्व में Twitter) जैसे प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे के भीतर उस सामग्री को हटाने या उसकी पहुंच बंद करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई की तारीख 9 अक्टूबर तय की गई है।












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