यूपी-बिहार में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस से 4500 से ज्यादा मौतें
पटना (बिहार)। राज्य में प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम में कई बच्चों की मौत एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) नामक बीमारी से हो जाती है। सूचना के अधिकार (आटीआई) के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से मांगी गई जानकारी से यह बात सामने आई है। मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि देश में पिछले छह वर्षो के दौरान एईएस से 6,867 लोगों की मौत हो चुकी है।
केंद्रीय मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षो में बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश में इस बीमारी से 3000 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। देश के विभिन्न राज्यों में एईएस से पिछले वर्ष जहां 1711 रोगियों की मौत हुई थी, वहीं वर्ष 2013 में 1273 और वर्ष 2012 में 1256 मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
बिहार के एईएस से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र मुजफ्फरपुर के निवासी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई कर रहे अभिषेक रंजन ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी।
रिपोर्ट से जुड़ी मुख्य बातें-
- पिछले दिनों देश के एईएस से सर्वाधिक प्रभावित 60 जिलों की पहचान कर वहां रोग से बचने के उपाय शुरू किए गए हैं।
- इन रोगों के उपचार के लिये कई मंत्रालयों की मदद ली जा रही है।
- राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत इन सभी जिलों में बच्चों के लिए 10 बिस्तरों वाले अस्पताल की स्थापना की जा रही है।
- इंसेफलाइटिस से बचने के लिये टीकाकरण किया जा रहा है एवं लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- पिछले छह वर्षो में एईएस से सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश (3,442) में हुई हैं।
- पिछले छह महीनों में असम में 1320, बिहार में 1072 मौतें हुईं।
- पश्चिम बंगाल में 736 लोगों को इस बीमारी के चपेट में आने से अपनी जान गंवानी पड़ी है।
- बिहार के मुजफ्फरपुर, गया, सारण, सिवान सहित कई जिलों में प्रतिवर्ष एईएस से सैकड़ों लोग प्रभावित होते हैं।
पिछले तीन वर्षो से राष्ट्रीय बीमारी नियंत्रण केंद्र की विशेषज्ञों की टीम तथा पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की टीम एईएस से पीड़ित लोगों के खून के नमूने तथा कई अन्य प्रकार के नमूने की जांच के लिए आती है। यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों में होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













Click it and Unblock the Notifications