अफगानिस्तान में करीब 100 भारतीयों को अभी भी स्वदेश लौटने का इंतजार, NGO ने केंद्र को लिखा खत
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। अफगानिस्तान में इस साल 15 अगस्त को तालिबान ने फिर वापसी की। कब्जे के बाद तालिबान की खौफ का मंजर काबुल एयरपोर्ट पर देखने को मिला। लाखों की संख्या में स्थानीय और प्रवासी लोगों ने अफगानिस्तान से बाहर निकलने की कोशिश की, इस दौरान कई लोगों ने अपनी जान भी गंवाई। हाल के दिनों में कई गैर सरकारी संगठनों ने दावा किया कि अफगानिस्तान में अभी भी महिलाओं और बच्चों समेत करीब 100 भारतीय नागरिक और करीब 200 स्थानीय अफगानिस्तान से बाहर निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं।

भारत विश्व मंच (आईडब्ल्यूएफ) और कई अन्य मानवीय गैर सरकारी संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय और विदेश मंत्रालय के उच्च अधिकारियों को लिखे खत में इस बात की जानकारी दी गई है। एनजीओ ने सरकार से मांग की है कि अफगानिस्तान में अभी भी राहत का इंतजार कर रहे लोगों को देश से बाहर निकाला जाए। एनजीओ के मुताबिक करीब 100 भारतीय मूल के लोगों में हिंदू और सिख शामिल हैं। 20 अक्टूबर को लिखे खत में दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (डीएसजीपीसी) के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह ने सरकार को अफगानिस्तान में फंसे लोगों की परेशानियों से अवगत कराया।
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मनजीत सिंह ने पत्र में लिखा, 'गुरुद्वारा सहित सिख नेताओं और गैर सरकारी संगठनों को भारतीय नागरिकों और भारत मूल के अफगान नागरिकों से काबुल से कई परेशान करने वाली फोनकॉलें आ रही हैं।' पत्र में आगे कहा गया है कि इनमें से अधिकांश लोग अतीत में वैध वीजा और भारत में यात्रा इतिहास होने के बावजूद ई-वीजा का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि विदेश मंत्रालय ने अगस्त में अफगानिस्तान में मची उथल-पुथल के बीच रद्द कर दिए थे जो भारत में नहीं थे और घोषणा की थी कि वे केवल ई-वीजा पर देश की यात्रा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने भारत में प्रवेश करने के इच्छुक अफगान नागरिकों के आवेदनों को तेजी से ट्रैक करने के लिए ई-वीजा की 'ई-इमरजेंसी एक्स-मिस्क वीजा' नाम की नई श्रेणी की शुरुआत की थी।












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