बुंदेलखंड में झाड़ू लगाने की तैयारी में आम आदमी पार्टी

Aam Admi Party
बांदा। बुंदेलखंड़ में बीते एक दशक के लोकसभा व विधानसभा चुनाव जातीय और स्थानीय मुददों पर आधारित रहे हैं, लेकिन आगामी 2014 का लोकसभा चुनाव पहली बार चौकाने वाले हो सकते हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज कराने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की आमद से बुंदेलखंड़ के राजनीतिक धुरंधरों का खेल बिगड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड़ में बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी व ललितपुर जनपद हैं, इन सात जिलों में विधानसभा की उन्नीस और लोकसभा की चार सीटें हैं। यह इलाका बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में उसकी जमीन दरक गर्इ। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को सात, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीन, समाजवादी पार्टी (सपा) को पांच और कांग्रेस को चार सीटें नसीब हुर्इ।

पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो झांसी-ललितपुर से कांग्रेस के प्रदीप आदित्य जैन (केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री), जालौन से सपा के धनश्याम अनुरागी, महोबा-हमीरपुर से बसपा के विजयबहादुर सिंह और बांदा-चित्रकूट से सपा के रामकृपाल सिंह पटेल सांसद चुने गए।

झाडू करेगी बड़े-बड़े धुरंधरों की सफार्इ

मौजूदा सिथति में नरेन्द्र मोदी की तारीफ करने पर बसपा ने विजयबहादुर को बाहर का रास्ता दिखा दिया तो सपा ने बांदा-चित्रकूट सांसद का टिकट काट दिया है। बसपा ने सपा के सांसद रामकृपाल पटेल को बांदा से उम्मीदवार घोषित कर दिया है तो सपा ने अपने मीरजापुर के सांसद व मृतक दस्यु सरगना ददुआ भार्इ बालकुमार पटेल को बांदा से चुनाव लड़ाने की घोषण की है।

अभी तक भाजपा व कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले। इस राजनीतिक परिदृश्य के बावजूद दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की धमाकेदार जीत और अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा से यहां राजनीतिक धुरंधरों की नींद उड़ गर्इ है। कर्इ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आप की झाडू बुंदेलखंड़ में इन धुरंधरों की सफार्इ करने में कामयाब हो सकता है। क्योंकि अन्ना हजारे के जनलोकपाल आन्दोलन को यहां व्यापक समर्थन मिला था।

बुंदेलखंड़ के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि 'जातीय राजनीति का समय गुजर चुका है, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से वो हर आम आदमी जुड़ सकता है, जो राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार से कराह रहा है। इन्होंने कहा कि 'एक दशक से दैवीय आपदाओं का दंश झेल रहे किसान मौत की कगार पर हैं, लेकिन यहां से चुने गए प्रतिनिधि संवेदनशून्य बनें हैं और यही संवेदनशून्यता केजरीवाल को फायदा पहुंचाएगी। केजरीवाल की पार्टी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गए अभियान से यहां के दो महिला जन संगठन बेहद प्रभावित हैं।

महिला संगठन 'नागिन और 'कोबरा गैंग की केन्द्रीय समन्वयक नेहा कैथल (शीलू) तो कुमार विश्वास के समर्थन में अपने एक सौ कार्यकर्ता अमेठी भेजने की पहले ही घोषण कर चुकी हैं। नेहा कैथल ने बताया कि 'बुंदेलखंड़ की सभी चार लोकसभा सीटों पर उनके संगठन 'आप उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन करेंगे। बकौल नेहा, 'उनके संगटन भ्रष्टाचार और महिला हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वालों के हिमायती हैं। आम आदमी पार्टी बांदा के संयोजक अवधेश कुमार सिंह का कहना है कि 'जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित परिणाम सामने आए हैं, उसी तरह उत्तर प्रदेश में लोकसभा के परिणाम भी चौकाने वाले होंगे।

वह कहते हैं कि 'बुंदेलखंड़ के राजनीतिक धुरंधरों की सफार्इ कर दी जाएगी। हालांकि उत्तर प्रदेश विधान सभा में बसपा विधायक दल के उपनेता और बांदा जिले की नरैनी विधानसभा सीट से विधायक अब भी अपनी पार्टी की जीत का दावा करते हैं। उनका कहना है कि 'दिल्ली में आप की जीत कांग्रेस की भ्रष्ट नीति का परिणाम है, यहां केजरीवाल का जादू नहीं चलेगा और बसपा सभी चारों सीटों पर जीत दर्ज कराएगी। विभिन्न राजनीतिक दलों के धुरंधर चाहे कुछ भी कहें, लेकिन तल्ख सच्चार्इ यह है कि 'आप के उदय से सभी राजनीतिक दलों के माथे पर चिंता की लकीरे झलक रही हैं। यही वजह है कि यहां भाजपा के नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस के राहुल गांधी से ज्यादा केजरीवाल की चर्चा हर गली-कूचे में सुनार्इ देती है।

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