आपात स्वास्थ्य सेवा के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं
नई दिल्ली। पिछले कुछ समय में आधार को लेकर कई ऐसी खबरे सामने आई हैं जिनमे यह कहा गया कि आधार कार्ड नहीं होने की वजह से लोगों को आपातकालीन सेवाएं नहीं मिल पाई, लेकिन नेशनल हेल्थ मिशन के अडिशनल सेक्रेटरी व एमडी मनोज झलानी ने इन तमाम खबरों को दरकिनार करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी हुआ है उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है, अगर वह सत्य है। उन्होंने कहा कि आपात स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं है। हमने इसकी जांच शुरू कर दी है और जो भी दोषी पाया गया उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल के बाहर हुआ प्रसव
आपको बता दें कि गुड़गांव के सिविल अस्पताल में एक गर्भवती महिला को महज इसलिए इलाज नहीं मुहैया कराया गया क्योंकि उसके पास आधार कार्ड नहीं था। महिला को अस्पताल में महज इसलिए भर्ती नहीं किया गया क्योंकि उसके पास आधार कार्ड नहीं था। जिसके बाद महिला को मजबूरन बच्चे को अस्पताल के बाहर बच्चे को जन्म देना पड़ा, महिला के प्रसव के लिए लोगों ने आस-पास शॉल लगाया और पर्दे से ढक कर प्रसव कराया गया। महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता महिला मुन्नी और उसकी बेटी अब बेहतर हैं।
2 घंटे तक तड़पती रही महिला
आपको बता दें कि महिला ने 2 घंटे तक दर्द से तड़पने के बाद हॉस्पिटल की पार्किंग में एक बच्ची को जन्म दिया। वहां बैठी कुछ महिलाओं ने शॉल की आड़ में डिलिवरी कराई। शीतला कॉलोनी निवासी मुन्नी के पेट में दर्द होने पर शुक्रवार सुबह जिला नागरिक अस्पताल लाया गया। महिला मूल रूप से मध्य प्रदेश की रहने वाली है, उसके पति बबलू ने ओपीडी में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद डॉक्टर को दिखाया, जहां उससे महिला का अल्ट्रासाउंट कराने के लिए कहा गया, लेकिन आधार कार्ड नहीं होने की वजह से महिला को भर्ती नहीं किया गया और फाइल बनाने से इनकार कर दिया गया।
पहले भी हो चुकी है घटना
महिला को जब अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो मजबूरन अस्पताल के बाहर प्रसव कराया गया। इससे पहले हरियाणा के सोनीपत में भी ऐसी घटना हो चुकी है, वहां 29 दिसंबर को एक निजी अस्पताल ने कारगिल शहीद की विधवा को आधार कार्ड नहीं होने के चलते भर्ती नहीं किया गया, जिसकी वजह से महिला की मौत हो गई।












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