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फ्यूचर ग्रुप की डील से मुकेश अंबानी ने सील किया रिटेल क्षेत्र का बिग बाजार, बदला-बदला है RIL का कारोबारी मिजाज?

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बेंगलुरू। भारतीय अरबपति बिजनेसमैन मुकेश अंबानी की दूरदर्शिता और बदलते समय के साथ अपनाई गई रणनीति उनकी सफलता की कुंजी है। एक ओर कोरोना काल में पूरी दुनिया के बिजनेसमैन कराह रहे हैं, तो मुकेश अंबानी एक के बाद एक कीर्तिमान गढ़ते जा रहे हैं। बिग बाजार जैसे भारत के अग्रणी रिटेल कारोबार के पैरेंट कंपनी फ्युचर ग्रुप के साथ उनकी 24,713 करोड़ रुपए की हालिया डील सभी चौंकाता है। इस बड़ी डील में फ्युचर ग्रुप का रिटेल ही नहीं, बल्कि होलसेल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस बिजनेस भी मुकेश अंबानी ने खरीद लिया है।

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तेजी से उभर रहे डिजिटल और रिटेल कारोबार में रूचि दिखा रहे है अंबानी

तेजी से उभर रहे डिजिटल और रिटेल कारोबार में रूचि दिखा रहे है अंबानी

कहते हैं कि मुकेश अंबानी बाजार का रूख पहचानने में काफी माहिर हैं। यही कारण है कि उन्होंने कोरोना लॉकडाउन में ठप पड़े पारंपरिक कारोबार से किनारा करना शुरू किया और तेजी से तेजी से उभर रहे डिजिटल और रिटेल कारोबार में रूचि दिखा रहे है।

लॉकडाउन में पूरी दुनिया ठप पड़ी थी, तो मुकेश अंबानी काम में लगे थे

लॉकडाउन में पूरी दुनिया ठप पड़ी थी, तो मुकेश अंबानी काम में लगे थे

लॉकडाउन के दौरान जब एक ओर पूरी दुनिया ठप पड़ी थी, तो मुकेश अंबानी काम में लगे थे। अपने मंसूबों को अमली जामा पहना रहे थे। इस कड़ी में उन्होंने सबसे पहला कदम आरआईल को एक कर्ज मुक्त कंपनी बनाया, जिससे रिलायंस कंपनी में निवेशकों की बाढ़ आ गई।

14 हफ्ते में जियो के लिए 14 ​ग्लोबल कंपनियों के साथ किए कुल 15 डील

14 हफ्ते में जियो के लिए 14 ​ग्लोबल कंपनियों के साथ किए कुल 15 डील

कोरोना काल में डिजिटल, रिटेल, टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन क्षेत्र में कई मेगा डील करने वाले मुकेश अम्बानी ने महज 14 हफ्ते में जियो के लिए 14 ​ग्लोबल कंपनियों के साथ 15 डील करने में सफलता हासिल की और 1.52 लाख करोड़ रुपए जुटाकर महामारी में ही झंडे गाड़ दिए।

3 लाख 60 हजार करोड़ डॉलर वाले संभावित बाजार में झंडा गाड़ दिया है

3 लाख 60 हजार करोड़ डॉलर वाले संभावित बाजार में झंडा गाड़ दिया है

इसमें फेसबुक ने 43574 करोड़, सिल्वर लेक ने करीब 5656 करोड़, विस्ता ने 11367 करोड़ रुपए की डील प्रमुख है और अब रिटेल कारोबार में अग्रणी कंपनी फ्यूचर ग्रुप को 24,713 करोड़ रुपए में खरीद कर 2020 में लगभग 3 लाख 60 हजार करोड़ डॉलर वाले संभावित बाजार में झंडा गाड़ दिया है।

फ्युचर ग्रुप डील से RIL की रिटेल कारोबार में स्थिति औरमजबूत हो जाएगी

फ्युचर ग्रुप डील से RIL की रिटेल कारोबार में स्थिति औरमजबूत हो जाएगी

माना जा रहा है कि फ्युचर ग्रुप के साथ इस मेगा डील से रिलायंस इंडस्ट्रीज कंपनी की रिटेल कारोबार में स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी और वह भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में जमे अमेजन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को जबर्दस्त टक्कर देगी।

दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रिटेल बाजार है भारत

दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रिटेल बाजार है भारत

दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रिटेल बाजार भारत में वर्ष 2017 में कुल रिटेल कारोबार 1 लाख 82 हजार 400 करोड़ डॉलर था। भारत के ऑफ़लाइन खुदरा विक्रेताओं के राजस्व के वित्त वर्ष 20 में 10,000-12,000 करोड़ रुपए की वृद्धि की उम्मीद है।

मुकेश अंबानी की कंपनी फॉर्च्यून ग्लोबल की 500 लिस्ट में शुमार है

मुकेश अंबानी की कंपनी फॉर्च्यून ग्लोबल की 500 लिस्ट में शुमार है

भारतीय अरबपति बिजनेसमैन और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और सबसे बड़े शेयरधारक मुकेश धीरुभाई अंबानी की कंपनी फॉर्च्यून ग्लोबल की 500 लिस्ट में शुमार है, जो बाजार मूल्य के अनुसार भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी है।

2020 तक भारतीय रिटेल उद्योग 110000 करोड़ डॉलर पहुंचने की उम्मीद

2020 तक भारतीय रिटेल उद्योग 110000 करोड़ डॉलर पहुंचने की उम्मीद

भारतीय रिटेल उद्योग 2018 में 95000 करोड़ डॉलर यानी 13 फीसदी के सीएजीआर पर पहुंच गया और 2020 तक इसके 1 लाख 10 हजार करोड़ डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऑनलाइन खुदरा बिक्री 2018 में 3270 करोड़ डॉलर तक पहुंचने यानी 31 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान था। ऑनलाइन रिटेल को 2020 तक 6000 करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

कंज्यूमर बिजनेस में घुसने के लिए RIL को कर्ज मुक्त बनाने की योजना बनाई

कंज्यूमर बिजनेस में घुसने के लिए RIL को कर्ज मुक्त बनाने की योजना बनाई

तेजी उभर ऱहे कंज्यूमर बिजनेस मसलन रिटेल और डिजिटल कारोबार में घुसने के लिए मुकेश अंबानी पारंपरिक कारोबार से कूच करने की योजना तैयार की। मार्केट में निवेश पाने के लिए मुकेश अंबानी ने सबसे पहले कंपनी को कर्ज मुक्त बनाने का खाका तैयार किया और समय से पहले आरआईएल को एक कर्ज मुक्त होने की घोषणा कर दी। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर करीब 20 अरब डॉलर के कर्ज था।

पेट्रो केमिकल समेत कई कंपनियों की हिस्सेदारी बेंचने की शुरूआत की

पेट्रो केमिकल समेत कई कंपनियों की हिस्सेदारी बेंचने की शुरूआत की

लॉकडाउन के दौरान आरआईएल को कर्ज मुक्त बनाने और कंज्यूमर बिजनेस में स्विच करने की योजना तैयार की और उसके लिए पेट्रो केमिकल समेत अपनी कई कंपनियों की हिस्सेदारी बेंचने की शुरूआत कर दी। साथ ही साथ रिलायंस जियो की हिस्सेदारी बेंचने की योजना भी तैयार की और तेजी कंज्यूमर बिजनेस की ओर उन्मुख हो गए।

RIL के कर्ज मुक्त होने फेसबुक जैसे बड़े निवशेक ने बड़ी भूमिका निभाई

RIL के कर्ज मुक्त होने फेसबुक जैसे बड़े निवशेक ने बड़ी भूमिका निभाई

RIL कंपनी के कर्ज मुक्त होने की दिशा में उठाए गए कदमों का करिश्मा ही कहेंगे कि रिलायंस जियो को फेसबुक जैसा बड़ा निवशेक हासिल हुआ। फेसबुक के रिलायंस जियो में 9.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने भर से ही मुकेश अंबानी ने लॉकडाउन में हुए नुकसान पूरी भऱपाई कर ली, क्योंकि फेसबुक के बाद रिलायंस जियो में ग्लोबल निवेशकों की ऐसी लाइन लगी कि आरआईएल पर जितना कर्ज था, उससे ज्यादा पैसा उसने जियो की हिस्सेदारी बेचकर और राइट्स इश्यू से जुटा लिए थे।

भारी ग्लोबल निवेश से RIL के प्रति शेयर के भाव जुलाई में 2148 पहुंच गए

भारी ग्लोबल निवेश से RIL के प्रति शेयर के भाव जुलाई में 2148 पहुंच गए

रिलायंस जियो में ग्लोबल निवेशकों के निवेश से कर्जमुक्त कंपनी हो चुकी आरईएल की साख बढ़ती गई, जिससे कंपनी शेयर में भी तेजी आती गई। वर्तमान में आरआईएल के प्रति शेयर के भाव 2010 रुपए हैं, जिससे पिछले 4 महीने में निवेशकों ने करीब 140 फीसदी रिटर्न कमा लिए है। आरआईएल का एक्सपोर्ट 2 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच गया है, जो भारत के कुल मर्केंडाइज एक्सपोर्ट का 9.1 फीसदी है।

महामारी के बीच RIL ने ग्लोबल इंवेस्टर्स से 10 अरब डॉलर हासिल किया

महामारी के बीच RIL ने ग्लोबल इंवेस्टर्स से 10 अरब डॉलर हासिल किया

एक तरफ कोरोना लॉकडाउन में वैश्विक रूप से उद्योग-धंधों पर ताला लग चुका था, जिससे शेयर बाजार बुरी तरह से कराह रहा था, तो दूसरी ओर मुकेश अंबानी की कमाई पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उल्टा कोरोना काल में ही मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 10 अरब डॉलर और कमा लिए। इसमें मुकेश अंबानी की दूरदर्शिता और समय पर लिए गए फैसलों ने बड़ा योगदान निभाया।

बदलते हवा की रूख जल्दी भांप लेते हैं मुकेश अंबानी

बदलते हवा की रूख जल्दी भांप लेते हैं मुकेश अंबानी

ऐसा कहा जा सकता है कि कारोबारी मुकेश अंबानी बदलते हवा की रूख संभवतः जल्दी भांप लेते हैं। यही कारण था कि उन्होंने कोरोना काल में डूब रहे तेल और पेट्रोकेमिकल के बिजनेस से बाहर निकलकर तेजी से बढ़ते कंज्यूमर बिजनेस की ओर बढ़ना तय कर लिया। कंज्यूमर बिजनेस में पैठ और निवेश के लिए मार्च 2021 से पहले उन्होंने अपने ऑयल, रिटेल और टेलिकम्यूनिकेशंस ग्रुप के नेट कर्ज 20 अरब डॉलर को शून्य पर लाने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया।

JioMart का 2024 तक 50 फीसदी रिटेल बाजार पर होगा कब्जा

JioMart का 2024 तक 50 फीसदी रिटेल बाजार पर होगा कब्जा

अपनी लॉन्चिंग के दो महीने के भीतर ही जियोमार्ट देश के ऑनलाइन ग्रॉसरी सेगमेंट में ग्राहकों की पहली पसंद बन कर उभरा था। इसकी तस्दीक कंपनी द्वारा लांच किए जियोमार्ट-ऐप की गई, जब कुछ ही दिनों में जियोमार्ट-ऐप, गूगल प्ले स्टोर से 10 लाख से अधिक बार डाउनलोड हो चुका था। उस दौरान जियोमार्ट पर प्रतिदिन के हिसाब से 2.5 लाख ऑर्डर बुक किए जा रहे थे। 2024 तक कंपनी देश के पास 50 प्रतिशत मार्किट हिस्सेदारी होने की संभावना है।

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English summary
Indian billionaire businessman Mukesh Ambani's foresight and strategy adopted with the changing times are the key to his success. On the one hand, businessmen of the whole world are groaning in the Corona era, while Mukesh Ambani is going on to record one after the other. His recent deal of Rs 24,713 crore with Future Group, the parent company of India's leading retail business like Big Bazaar, surprises everyone. In this big deal, not only retail of Future Group, but also wholesale logistics and warehouse business has been bought by Mukesh Ambani.
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