पिछले 4 साल में मनरेगा की विभिन्न योजनाओं में 935 करोड़ रुपए की गड़बड़ी!
नई दिल्ली, अगस्त 21। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की विभिन्न योजनाओं में 935 करोड़ रुपए की वित्तीय हेराफरी का मामला सामने आया है। दरअसल, ये जानकारी प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय के डेटा से मिली है।

पिछले 4 साल के अंदर हुई हेराफेरी
द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, पिछले 4 साल में ग्रामीण विकास विभागों के तहत पूरे देश में मनरेगा की विभिन्न योजनाओं में 935 करोड़ रुपए की वित्तीय हेराफेरी हुई है। इसका खुलासा मंत्रालय की सोशल ऑडिट यूनिट ने किया है। डेटा से पता चलता है कि अब तक इस राशि का लगभग 12.5 करोड़ रुपये यानी 1.34 फीसदी ही वसूल किया जा सका है। ये डेटा पब्लिक डोमेन पर है, लेकिन लगातार नेटवर्क प्रॉब्लम की वजह से इसे एक्सेस कर पाना काफी मुश्किल है। इंडियन एक्सप्रेस ने सरकार में एक स्रोत के माध्यम से वित्त वर्ष 2017-18 से वित्त वर्ष 2020-21 तक के डेटा को कलेक्ट किया है।
हर साल योजना पर खर्च बढ़ता ही चल गया
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 2017-18 में मनरेगा के लिए 55,659.93 करोड़ रुपये जारी किए थे और तब से यह राशि हर साल बढ़ती ही जा रही है। 2020-21 में ये राशि बढ़कर 1,10,355.27 करोड़ रुपये हो गई है। वहीं योजना पर हुआ कुल खर्च 2017-18 में 63,649.48 करोड़ रुपये था और 2020-21 में ये बढ़कर 1,11,405.3 करोड़ रुपये हो गया है।
तमिलनाडु में हुई सबसे ज्यादा गड़बड़ी
आपको बता दें कि SAU ऑडिट की रिपोर्ट में पता चला है कि विक्रेताओं को उच्च दर पर खरीदी गई सामग्री का भुगतान किया गया है। इसके अलावा रिपोर्ट में रिश्वतखोरी, और गैर-मौजूद व्यक्तियों को भी भुगतान किया गया है। रिपोर्ट में सबसे अधिक वित्तीय गड़बड़ी तमिलनाडु के अंदर पाई गई है। तमिलनाडु की 12525 ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा 245 करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई है, जिसके लिए 37,527 ऑडिट रिपोर्ट अपलोड की गईं।
दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश में हुई सबसे बड़ी हेराफेरी
तमिलनाडु के अलावा राजस्थान, केरल, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, लद्दाख, अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप, दादर और नागर, दमन और दीव जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी वित्तीय गड़बड़ी पाई गई है। आंध्र प्रदेश की 12,982 ग्राम पंचायतों में 239.31 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई, जिसमें 4.48 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।












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