चीन सीमा: दुश्मन को सबक सिखाने के लिए 90 हजार ITBP जवान हमेशा तैयार, पहाड़ों की लड़ाई में हासिल है महारत

नई दिल्ली: चीन भारत की सरज़मीं पर हमेशा ही अपनी नजर गड़ाए रखता है। पिछले दो महीनों से लद्दाख में LAC से सटे कई इलाकों में चीन के साथ विवाद जारी है। इस बीच गलवान घाटी में हुई झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। भारतीय सेना LAC के संवेदनशील इलाकों में चीन की नापाक हरकतों का जवाब दे रही है। सेना के अलावा भी भारत का एक बल ऐसा है, जो हर वक्त चीन सीमा पर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहता है, जिसका नाम है ITBP। आइए जानते हैं कि लद्दाख जैसे इलाके में क्या है आईटीबीपी की भूमिका और कैसी है तैयारी-

चीन से युद्ध के बाद हुआ गठन

चीन से युद्ध के बाद हुआ गठन

1962 में चीन से लड़ाई के बाद भारत को जरूरत थी, एक ऐसे बल की जो तिब्बत यानी चीन से लगती सीमा की निगरानी कर सके। चीन से लगती ज्यादातर सीमा काफी ऊंचाई और दुर्गम इलाकों में स्थित है। इस वजह से 24 अक्टूबर 1962 को सरकार ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का गठन किया। शुरूआत में इस बल के पास लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल से लगती चीन सीमा का जिम्मा था, लेकिन कारगिल युद्ध के बाद इसकी भूमिका और अहम हो गई। जिस वजह से 2004 से सिक्किम और अरुणाचल से लगती सीमाओं का जिम्मा भी आईटीबीपी को दे दिया गया। मौजूदा वक्त में इस बल में करीब 90 हजार जवान हैं। ये जवान गर्मी, बारिश और भीषण ठंड में 3488 किलोमीटर लंबी चीन सीमा की निगरानी करते हैं।

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    लद्दाख जैसे ऊंचे क्षेत्र में लड़ना आम बात

    लद्दाख जैसे ऊंचे क्षेत्र में लड़ना आम बात

    हिमालय के दुर्गम इलाके चुनौतियों को और ज्यादा बढ़ाते हैं। आईटीबीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वन इंडिया से बातचीत में बताया कि मौजूदा वक्त में चीन सीमा पर उनकी 100 से ज्यादा पोस्ट ऐसी हैं, जो 10 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित हैं। ऊंचाई के अलावा बर्फ इन जवानों की मुश्किलों को और बढ़ाती है। इस वजह से जवानों का चयन और ट्रेनिंग उसी हिसाब से की जाती है। इसमें से ज्यादातर जवान तो उच्च हिमालयी क्षेत्रों से ही आते हैं। जिनके लिए पहाड़ चढ़ना आम बात होती है। उत्तराखंड के औली में आईटीबीपी ने एक खास ट्रेनिंग सेंटर भी खोल रखा है, जहां जवानों को इतना मजबूत बना दिया जाता है कि दुश्मन उनका बाल भी बांका न कर सके। वक्त-वक्त पर ऊंचे इलाकों में आईटीबीपी दुश्मनों से निपटने का अभ्यास भी करती रहती है। इस खास ट्रेनिंग की वजह से ये जवान लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में लड़ने में माहिर होते हैं।

    मार्शल आर्ट में भी महारत

    मार्शल आर्ट में भी महारत

    भारत-चीन के बीच हुए समझौते के तहत किसी भी हाल में सीमा पर हथियार का इस्तेमाल नहीं होता है। चीनी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गलवान घाटी में तैनाती से पहले चीनी सैनिकों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी गई थी। मौजूदा वक्त में भी 20 मार्शल आर्ट ट्रेनर तिब्बत में चीनी सैनिकों को ट्रेंड कर रहे हैं। ऐसे हालात से निपटने के लिए आईटीबीपी ने खुद को पहले से ही तैयार कर रखा है। आईटीबीपी अधिकारी के मुताबिक जवानों की प्रारंभिक ट्रेनिंग में ही मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण शामिल रहता है। इसके अलावा समय-समय पर उनके लिए विशेष कैंप भी आयोजित किए जाते हैं। हथियारों के अलावा हैंड टू हैंड फाइट में भी आईटीबीपी जवानों का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है।

    लद्दाख में क्या है भूमिका?

    लद्दाख में क्या है भूमिका?

    वन इंडिया से बात करते हुए आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शांति काल में चीन सीमा की सुरक्षा का जिम्मा इसी बल के पास रहता है। सीमा की सुरक्षा के अलावा आईटीबीपी के पास कस्टम और पुलिसिंग से संबंधित भी कई अधिकार होते हैं। जब भी सीमा पर चीन के साथ विवाद की स्थिति आती है (जैसा की मौजूदा वक्त में लद्दाख में), तो भारतीय सेना फ्रंट लाइन पर मोर्चा संभाल लेती है। इसका मतलब ये नहीं कि आईटीबीपी सीमा से हट जाती है। आईटीबीपी भी सीमा पर ही मुस्तैद रहती है और सेना के साथ समन्वय स्थापित करके काम करती है।

    आतंरिक सुरक्षा से हटाए जा रहे जवान

    आतंरिक सुरक्षा से हटाए जा रहे जवान

    चीन सीमा के अलावा आईटीबीपी के जवान देश की आंतरिक सुरक्षा में भी अहम रोल अदा करते हैं। मौजूदा वक्त में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षा का जिम्मा इसी बल के पास है। इसके अलावा 8000 से ज्यादा जवान नक्सलियों से लोहा ले रहे हैं। चीन सीमा पर बढ़ते विवाद को देखते हुए फिलहाल जम्मू-कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा से आईटीबीपी को हटाकर चीन सीमा पर उनकी तैनाती की जा रही है। कुछ कंपनियों ने तो सीमा पर मोर्चा संभाल भी लिया है।

    90 हजार जवान हमेशा तैयार

    90 हजार जवान हमेशा तैयार

    मौजूदा हालात के सवाल पर आईटीबीपी अधिकारी ने कहा कि चीन सीमा बेहद ही संवेदनशील मानी जाती है। सीमा पर दुश्मन कब और कहां मूवमेंट कर दे, इसका कोई अंदाजा नहीं रहता है। जिस वजह से आईटीबीपी के 90 हजार जवानों को उसी हिसाब से ट्रेनिंग दी गई है, वो 24 घंटे और 365 दिन खुद को तैयार रखते हैं। ऐसे में दुश्मन कभी भी किसी भी रूप में आए, उसका खात्मा निश्चित है। मौजूदा वक्त में हर मुश्किल हालात से निपटने में आईटीबीपी पूरी तरह सक्षम है।

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