छत्तीसगढ़ में 800 किलो गाय का गोबर चोरी, पुलिस 'गोबर चोरों' की कर रही है तलाश

नई दिल्ली, 21 जून। एक से बढ़कर एक चोर आपने देखे होंगे, लेकिन क्या आपने सोचा है कि कोई गाय का गोबर भी चुरा ले जाएगा। जी हां, गाय के गोबर की चोरी का एक अनोखा मामला छत्तीसगढ़ के कोर्बा जिले में सामने आया है। कोर्बा पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि धुरेना गांव में डिपका थाना क्षेत्र में 800 किलोग्राम गाय का गोबर चोरी हो गया है, जिसकी कीमत तकरीबन 1600 रुपए है। यह घटना 8 जून की रात की है जब कुछ लोगों ने धुरेना गांव में कुंटलों गाय के गोबर को ही चुरा लिया।

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    Chhattisgarh Cow Dung Stolen: 800 Kg गोबर चोरी, पुलिस ने दर्ज किया केस | वनइंडिया हिंदी

    पुलिस गोबर चोरों की तलाश में जुटी

    पुलिस गोबर चोरों की तलाश में जुटी

    डिपका के एसएचओ हरीष तांडेकर ने बताया कि इस मामले में एक शिकायत दर्ज कराई गई है, यह शिकायत 15 जून को दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता कमहन सिंह कंवर जोकि गांव में गौधन समिति के अध्यक्ष हैं, उन्होंने आरोप लगाया है कि 800 किलोग्राम गाय का गोबर चोरी हो गया है। अब पुलिस गोबर चोरी करने वाले चोरों की तलाश कर रही है। 800 किलोग्राम गाय के गोबर चोरी मामले में पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ केस दर्ज किया है। एसएचओ नेबताया कि हम मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही चोरों की धरपकड़ कर लेंगे। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब गाय का गोबर चोरी हुआ है, इससे पहले छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में 100 किलो गोबर की चोरी का भी मामला सामने आया था।

    2 रुपए किलो बिकता है गाय का गोबर

    2 रुपए किलो बिकता है गाय का गोबर

    गौर करने वाली बात है कि छत्तीसगढ़ सरकार गाय के गोबर को गोधन न्याय योजना के तहत 2 रुपए प्रति किलोग्राम की दर पर खरीद रही है। जिससे गाय का पालन करने वाले किसानों की मदद की जा सके। गाय के गोबर से वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन किया जाएगा, जोकि बेहतरीन खाद मानी जाती है। जिन क्षेत्रों में लोग गोपालन के व्यवसाय से जुड़े हैं, वहां के लोगों के लिए मुख्य रूप से यह योजना शुरू की गई है।

    छह महीने में तैयार होती है खाद

    छह महीने में तैयार होती है खाद

    गाय के गोबर का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए किया जाता है। गाय के गोबर से बनी खाद को रासायनिक खाद से बेहतर माना जाता है, यही वजह है कि प्रदेश सरकार ने गाय के गोबर को खरीदने की योजना शुरू की गई है। इस खाद से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। गाय के गोबर को किसान छह महीने तक एक ही जगह पर इकट्ठा करते हैं, तकरीबन छह महीने में यह गोबर खाद बन जाती है, जिसके बाद इसका इस्तेमाल खाद के तौर पर होता है।

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