पिछले 16 महीने में 72.32 लाख लोगों को मिला रोजगार, दिसंबर माह में 7 लाख नौकरियां मिलीं

नई दिल्ली। मोदी सरकार के कार्यकाल में बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार हमलवार है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी पर बिना रोजगार का विकास करने को लेकर निशाना साधते रहते हैं। लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं वह मोदी सरकार को राहत दे सकते हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले 16 महीनों में 72.32 लाख नए कर्मचारी ईपीएफओ के तहत रजिस्टर हुए हैं। यह आकंड़े सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 के बीच के हैं।

बदले गए नियम

बदले गए नियम

हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि ईपीएफओ ने इस सुविधा का लाभ लेने के लिए अनिवार्य वेतनमान की सीमा को कम कर दिया है। इससे पहले इस सुविधा का लाभ लेने के लिए न्यूनतम आय 7.16 लाख रुपए होनी चाहिए थी, जिसे घटाकर 5.80 लाख रुपए कर दिया गया है। ईपीएफओ ने वेतनमान में 23.44 फीसदी का बदलाव किया है जिसके बाद ताजा आंकड़े जारी किए गए हैं, जिसमे 72.32 नए ईपीएफओ रजिस्ट्रेशन सामने आए हैं।

अंतिम माह में जबरदस्त बढ़ोतरी

अंतिम माह में जबरदस्त बढ़ोतरी

यही नहीं संचयी रोजगार संकलन के आंकड़ों के संकलन के वर्ष को भी संशोधित किया गया है। इसे अब सितंबर 2017 से नवंबर 2018 का कर दिया गया है। जिसके बाद 11.36 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले रोजगार सृजन का अनुमान 73.50 लाख था, जोकि घटकर 65.15 लाख तक पहुंच गया। सबसे अधिक ईपीएफओ के तहत जुड़ने वालों की संख्या में बढ़ोतरी अंतिम माह में हुई थी। मार्च 2018 में 5498 नए लोग जुड़े, जबकि अंतिम महीने में रिकॉर्ड 55831 लोग जुड़े

अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को रोजगार

अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को रोजगार

ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2018 में कमी इसलिए दर्ज हुआ क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इस योजना से बाहर हुए थे। दिसंबर 2018 में सबसे अधिक 2.17 लाख नौकरियों का सृजन किया गया, ये नौकरियां हासिल करने वालों की उम्र 18-21 वर्ष थी, जबकि 22-25 वर्ष आयु वर्ग के कुल 2.03 लाख लोगों को नया रोजगार दिया गया। अप्रैल 2018 तक ईपीएफओ के आंकड़े सिंतंबर 2017 तक के जारी किए गए थे।

6 करोड़ सदस्य

6 करोड़ सदस्य

ईपीएफओ की ओर से कहा गया है कि यह आंकड़े अस्थायी हैं और यह समय के साथ अपडेट होते रहते हैं। आपको बता दें कि ईपीएफओ तमाम संगठित, अल्प संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को कवर करता है। इसमे कुल 6 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं। इन कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड की सुविधा दी जाती है।

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