तो 2 गज नहीं 10 मीटर की रखनी होगी दूरी? नई कोविड गाइडलाइन पर एक्सपर्ट की राय
नई दिल्ली, 22 मई। कोरोना वायरस के देश में आने के बाद से शुरुआत से ही जिस एक चीज पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया वह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'दो गज की दूरी' को नारा बना दिया था। लेकिन यह दो गज की दूरी कितनी सुरक्षित है इस पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार की कोविड-19 लेकर जारी हुई ताजा गाइडलाइन है जिसमें कहा गया है कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाला एयरोसोल्स हवा में 10 मीटर तक जा सकते हैं यानि कि संक्रमित व्यक्ति 32 फीट दूरी तक संक्रमण को पहुंचा सकता है।

पहले दी गई थी 6 फीट की सलाह
तो ये हुई नई गाइडलाइन की बात लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय की पहले जारी की गई सलाह को देखें तो इसमें दो गज की दूरी रखने को कहा गया था जो कि 6 फीट के बराबर होती है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि करना क्या है? क्या सोशल डिस्टेंसिंग में दो गज यानि 6 फीट के नियम का पालन करना है या अब लोगों को 10 मीटर की सोशल डिस्टेंसिंग शुरू कर देनी चाहिए।
इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि 10 मीटर की दूरी रखने की सलाह देना ठीक है लेकिन ये बात समझनी होगी कि अधिकांश कोविड-19 संक्रमण आसपास की छोटी-छोटी बूंदों से फैलते हैं जो छींकने या फिर खांसने के दौरान बाहर आती हैं न कि एरोसोल से जो 10 मीटर तक हवा के साथ तैरते हैं। मुंह में मौजूद तरल पदार्थ छींक के साथ हवा में मिल जाते हैं और आगे बढ़ते हैं। इन्हें ही एयरोसोल कहा जाता है।

लैंसेट ने भी किया है समर्थन
दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर वेद चतुर्वेदी (लेफ्टिनेंट जनरल) ने ऑल इंडिया रेडियो से बातचीत में इस बारे में बात की है जिसमें उन्होंने कहा "द लैंसेट (मेडिकल जर्नल) ने भी इस खोज का समर्थन किया है कि वायरस 10 मीटर तक (हवा में) यात्रा कर सकता है। दो गज की दूरी बनाए रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर मामले संक्रमित व्यक्ति के पास से उन बूंदों के माध्यम से आगे बढ़ते हैं जो एक व्यक्ति के बोलने पर फैलती हैं।"
उन्होंने आगे कहा "कई लोगों ने कहा है कि वे बाहर नहीं गए हैं और किसी के निकट संपर्क में नहीं आएं हैं फिर भी उन्हें संक्रमण हो गया है। इसका मतलब है कि वायरस हवा में निलंबित रह सकता है और दूसरे को संक्रमित कर सकता है। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता है, गात है, हंसता है या जोर से बातें करता है तो संक्रमित एयरोसोल हवा की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।"

मास्क है जरूरी
आईसीएमआर के प्रमुख डॉक्टर बलराम भार्गव का इस मुद्दे पर कहना है कि 10 मीटर की दूरी बनाए रखना शायद संभव नहीं है ऐसे में अच्छा वेंटिलेशन काफी मददगार हो सकता है। डॉ. भार्गव ने हाल ही में कहा था "पहले यह पाया गया था कि वायरस बूंदो के माध्यम से फैलता है। अब पाया गया है कि माइक्रोड्रॉपलेट (सूक्ष्म बूंदें) कम से कम 2-3 घंटे तक हवा में रह सकती हैं। कुछ अन्य अध्ययनों में भी ये इशारा किया गया है कि माइक्रोड्रॉपलेट 3 घंटे तक हवा में रह सकते हैं। बूंदों से बचने के लिए छह फीट की दूरी की सलाह जी जाती है वहीं बहुत छोटी बूंदे या एयरोसोल के लिए हम अच्छे वेंटिलेशन की सलाह देते हैं जिससे इन्हें हटाया जा सके।"
विशेषज्ञों का कहना है सलाह के मुताबिक सही ढंग से मास्क पहनना किसी भी दूरी पर आपको सुरक्षा प्रदान करता है। इसलिए मास्क लगाना सबसे अधिक जरूरी है।












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