मोदी सरकार के चार साल: नोटबंदी, जीएसटी जैसी योजनाओं से वित्त मंत्रालय रहा चर्चाओं में
नई दिल्ली। 'सबका साथ-सबका विकास' का नारा देकर आई मोदी सरकार ने 26 मई को अपने चार साल पूरे कर लिए हैं। सेंट्रल हॉल में दिए गए अपने भाषण में मोदी ने कहा था कि 2019 में वह सांसदों से उनके रिपोर्ट कार्ड के साथ मिलना चाहेंगे। मेरी सरकार देश के लोगों की है। ये सरकार गरीबों की है और मैं उनके लिए कुछ करना चाहता हूं। हम सभी को साथ लेकर विकास करना चाहते हैं। मोदी की ये बातें चार साल में उनकी द्वारा जारी की गई योजनाओं में दिखती रहीं। मोदी की इस बात को आगे बढ़ाते हुए वितमंत्री अरुण जेटली ने कई सारी ऐसी योजनाएं बनाईं जो आम लोगों को सीधा फायदा पहुंचाने का दावा करती हैं। सरकार ने ये साबित करने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री जन धन योजना से लेकर, जीएसटी और नोटबंदी जैसे फैसले आम लोगों को फायदा पहुंचाने वाले फैसले हैं। आइए मोदी सरकार की इन योजनाओं के बारे में जानें-

जनधन योजना
जनधन योजना का मुख्य मकसद हर आम आदमी के लिए बैंकिंग सुविधाओं के द्वार खोलना रहा है। सरकार चाहती है कि इस देश में कोई ऐसा परिवार ना हो जिसका अपना बैंक खाता ना हो। इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2014 को हुई। आंकड़ों के अनुसार 25 अप्रैल 2018 तक 31 करोड़ 52 लाख खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में अब तक 80871.67 करोड़ की धनराशि जमा हो चुकी है। योजना के उद्घाटन के दिन ही 1.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए थे।
प्रधानमंत्री सुकुन्या योजना
लड़कियों के लिए छोटी बचत को प्रोत्साहन देने के लिए मोदी सरकार ने सुकन्या समृद्धि खाता का शुभारंभ किया। इसमें खाता किसी भी डाकघर अथवा अधिकृत बैंक शाखा में खुलवाया जा सकता है। बेटी के जन्म के समय या फिर 10 साल की उम्र तक यह खाता खुलवाया जा सकता है। नवंबर 2017 तक 1.26 करोड़ खाते इस योजना के तहत खोले जा चुके हैं और इनमें करीब 19,183 करोड़ रुपये जमा हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
यह योजना मुद्रा बैंक के तहत शुरू की गई है। इस योजना का मकसद युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत सरकार बिना किसी गारंटी के लोन देती है। इस योजना को शिशु, किशोर और तरुण तीन भागों में बांटा गया है। शिशु में 50 हजार, किशोरों में 50 हजार से 5 लाख और तरुण में 5 लाख से 10 लाख का लोन सरकार से लिया जा सकता है। 2018-19 के आम बजट में इस लोन की राशि 3 लाख करोड़ बढ़ा दी गई है। अब इस योजना बजट 220596.05 करोड़ हो गया है। सरकार इस योजना के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है।
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना
इस योजना का मकसद बहुत कम पैसे देकर कमजोर वर्ग को बीमा देने है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का वार्षिक प्रीमियम मात्र 12 रूपए है। 18 -70 साल के लोग महज 12 रुपए देकर एक लाख से लेकर 2 लाख रुपये तक का लाभ ले सकते हैं। यदि इस योजना के अंतर्गत बीमित व्यक्ति की दुर्घटना में मौत हो जाती है, या फिर हादसे में दोनों आंखें या दोनों हाथ या दोनों पैर खराब हो जाते हैं, तो उसे 2 लाख रूपए मिलेंगे। फरवरी 2018 तक 13 करोड़ 25 लाख लोगों ने इस बीमा का लाभ लिया है।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
यह योजना भी प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी ही है। यह योजना 18 से 50 साल तक के लोगों के लिए है। इस योजना में साल में एक बार में ही 330 रुपए देकर 2 लाख रुपये का रिस्क कवर पाया जा सकता है। फरवरी 2018 तक 5.22 करोड़ लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं।
अटल पेंशन योजना
असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले और मजदूरों को जीवनभर की पेंशन देने के लिए मोदी सरकार ने अटल पेंशन योजना शुरू की थी। यदि आप इस योजना में शामिल होते हैं, तो केंद्र सरकार आपको और आपके पति या पत्नी को जीवन की न्यूनतम पेंशन की गारंटी देती है। यदि आप अटल पेंशन योजना में निवेश करते हैं, तो आपको 60 वर्ष की आयु से लेकर मृत्यु तक आपको 1,000 रुपये प्रति माह से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह की पेंशन मिलेगी। पेंशन 1,000, 2,000, 3,000, 4,000 या 5,000 रूपए प्रति माह मिलेगी। 5 जनवरी 2018 तक 80 लाख लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं।
स्टैंडअप इंडिया योजना
युवाओं, खासकर दलित और आदिवासियों को खुद को रोजगार शुरू करने में प्रोत्साहन देने के लिए यह योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 10 लाख से 1 करोड़ का लोन लिया जा सकता है। सार्वजिनक, प्राइवेट और लोकल बैंक से यह लोन लिया जा सकता है। ढ़ाई लाख युवाओं को अब तक इस योजना से लाभ मिल चुका है।
नोटबंदी और काले धन के खिलाफ लड़ाई
प्रधान मंत्री मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को 500 और 1000 के नोटों को बैन कर कालेधन के खिलाफ जंग की घोषणा की थी। 2016 में पहले चरण के रूप में 500 और 1000 के नोटों को बैन कर दिया गया था। जिसके बाद डिजिटल लेनदेन में बड़ा प्रोत्साहन मिला और काले धन की पर्याप्त मात्रा के बारे में पता लगा। वेतन के कैशलेस लेनदेन को सक्षम करने के लिए 50 लाख नए बैंक खाते खोले गए। वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2016-17 तक करदाताओं की संख्या में 26.6% की वृद्धि हुई। दायर ई-रिटर्न की संख्या में 27.9 5% की वृद्धि हुई। आईएमपीएस लेनदेन का मूल्य अगस्त 2016 से अगस्त 2017 तक लगभग 59% बढ़ गया, 2.24 लाख शेल कंपनियों को बंद कर दिया गया, 29,213 करोड़ रुपये की अज्ञात आय का पता चला और आयकर विभाग (आईटीडी) ने 9 जनवरी से 30 दिसंबर 2016 तक नोटबंदी अवधि के दौरान किए गए नकदी जमा के ई-सत्यापन के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए 31 जनवरी 2017 को ऑपरेशन क्लीन मनी (ओसीएम) लॉन्च किया।
एसआईटी का गठन और काले धन की रोकथाम
एनडीए सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में विशेष जांच दल और एसआईटी का गठन हुआ।
जीएसटी बना एक बड़ा कदम
एक राष्ट्र, एक कर, एक राष्ट्र-एक बाजार 30 जून 2017 की आधी से लागू हुआ और 1 जुलाई 2017 से प्रभावी हुआ। जीएसटी दोनों केंद्रों और राज्यों द्वारा प्रशासित है। इसके आने से राज्य वैट, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, खरीद कर और प्रवेश कर जैसे कई राज्य और केंद्रीय अप्रत्यक्ष करों को एक में सम्मिलित कर दिया गया है। 4 कर दरें रखी गईं। ये 5%, 12%, 18%, 28% हैं। योजना का मुख्य गुड्स पर कुल करों में कमी, अनुमानित 25-30%
नेशनल एंटी-मुनाफाखोरी अथॉरिटी
नेशनल एंटी-मुनाफाखोरी अथॉरिटी का का गठन, ताकि उपभोक्ताओं को माल और सेवाओं की कम कीमतों का लाभ दिया जा सके। व्यवसाय करने और कर राजस्व संग्रह में वृद्धि करने में आसानी लाने के लिए नेतृत्व किया।
जीएसटी के फायदे
फुटकर मार्केट में दामों में गिरावट
कॉमन नेशनल मार्केट का निर्माण
छोटे दुकानदारों को लाभ
कम कर चुकाने वालों को लाभ
करों के कैस्केडिंग प्रभाव में कमी
विश्व बैंक की व्यापार करने में आसानी रैंकिंग में भारत 142 वें से 100 वें स्थान पर पहुंचना
लाइन टैक्स सिस्टम पर स्व-विनियमन
गैर घुसपैठ और पारदर्शी कर प्रणाली
अधिक सूचित उपभोक्ता के कारण
सरलीकृत कर व्यवस्था
करों की बहुतायत में कमी












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