Farmers protest: किसानों के साथ वार्ता के लिए सरकार ने फिर भेजा पत्र, पूछा-समय और तारीख
नई दिल्ली। 25th Day of farmer protest: कृषि कानूनों(farm laws) के खिलाफ चल रहे आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से किसानों(farmers protest) के साथ फिर से वार्ता की पहल की गई है। केंद्र सरकार की ओर से किसानों को अगली वार्ता के लिए तारीख और समय बताने के लिए पत्र लिखा है। सरकार की ओर से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि, सरकार आपके द्वारा उठाए गए मुद्दों के तार्किक समाधान तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।

कृषि मंत्रालय (agriculture ministry)द्वारा लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि भारत सरकार पुन: अपनी प्रतिबद्धता दोहराना चाहती है, कि वह आंदोलनकारी किसान संगठनों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों का तर्कपूर्ण समाधान करने के लिए तत्पर है। 20 दिसंबर को लिखे गए पत्र में भी यह स्पष्तया उल्लेख किया गया था, आंदोलनकारी किसान संगठनों द्वारा उठाए गए सभी मौखिक एंव लिखित मद्दों पर सरकार सकारात्मक वार्ता करने के लिए तैयार है।
पत्र में लिखा कि, भारत सरकार के लिए देश के समस्त किसान संगठनों के साथ वार्ता का रात्स्ता खुला रखना आवश्यक है। देश के अनेक स्थापित किसान संगठनों एंव किसानों की आदरपूर्वक बात सुनना सरकार का दायित्व है। सरकार इससे इन्कार नहीं कर सकती है। संयुक्त किसान मोर्चा के अंतर्गत आंदोलनकारी समस्त किसान यूनियनों के साथ सरकार द्वारा बहुत ही सम्मानजनक तरीके से और खुले मन से कई दौर की वार्ता की गई है और आगे भी आपकी सुविधा अनुसार वार्ता करने की पेशकश की है।
सरकार ने अपने इस पत्र में साफ किया है कि, कृषि सुधार से संबंधित तीनों कानूनों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की खरीद से कोई संबंध नहीं है, और ना ही इन तीन कानूनों के आने से पूर्व से जारी एमएसपी की खरीदी की व्यवस्ता पर कोई प्रभाव होगा। इस बात का उल्लेख वार्ता के हर दौर में किया गया है और यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकार न्यूनतम समर्थन पर खरीदी की वर्तमान व्यवस्था के लागू रहने के संबंध में लिखित आश्वासन देने को तैयार है। इस बिषय़ में कई नई मांग रखना जो नए कानूनों से परे है, उसका वार्ता में सम्मिलित किया तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है। फर भी जैसा पूर्व में उल्लेख किया गया है कि, सरकार आपके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर वार्ता करने के लिए लिए तैयार है।












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