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दिल्ली मेट्रो में खोया शख्स का पर्स, 11 दिन बाद भारतीय डाक से मिला वापस

दिल्ली मेट्रो में चोरी की घटनाएं आम हैं। रोजाना न जाने कितने ही लोग मेट्रो में अपना पर्स खो देते हैं और हर कोई इतना खुशनसीब नहीं होता कि उन्हें उनका पर्स वापस मिले। हालांकि 24 साल के गुरप्रीत इस मामले में वाकई खुशनसीब हैं क्योंकि उन्हें उनका खोया हुआ पर्स ठीक उसी हालात में वापस मिल गया।

Delhi

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो में चोरी की घटनाएं आम हैं। रोजाना न जाने कितने ही लोग मेट्रो में अपना पर्स खो देते हैं और हर कोई इतना खुशनसीब नहीं होता कि उन्हें उनका पर्स वापस मिले। हालांकि 24 साल के गुरप्रीत इस मामले में वाकई खुशनसीब हैं क्योंकि उन्हें उनका खोया हुआ पर्स ठीक उसी हालात में वापस मिल गया। गुरप्रीत का पर्स एक शख्स को मिल गया और उसने डाक के जरिये वापस गुरप्रीत का पर्स भेजा। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया में इंसानियत आज भी जिंदा है। गुरप्रीत ने सोशल मीडिया के जरिये उस शख्स को शुक्रिया कहा है।

मेट्रो में गायब हो गया गुरप्रीत का पर्स

मेट्रो में गायब हो गया गुरप्रीत का पर्स

दिल्ली में हाल ही में इंसानियत की एक मिसाल देखने को मिली। गुरप्रीत नाम के एक शख्स को उनका मेट्रो में खोया हुआ पर्स वापस मिल गया। एनडीटीवी के अनुसार 24 साल के गुरप्रीत सिंह केंद्रीय सचिवालय से लाजपत नगर जा रहे थे। जब वो लाजपत नगर मेट्रो स्टेशन ऊतरे, तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके पर्स उनकी जेब में नहीं है। इसके बाद गुरप्रीत तुरंत कस्टमर केयर के पास गए।

11 दिन बाद वापस आ गया पर्स

11 दिन बाद वापस आ गया पर्स

मेट्रो अधिकारियों ने उन्हें तब तक इंतजार करने के लिए कहा जब तक मेट्रो अपने आखिरी स्टेशन सरिता विहार नहीं पहुंच जाती। इसके बाद भी गुरप्रीत को उनका पर्स नहीं मिला। गुरप्रीत ने आगे कहा, '26 मार्च को मुझे भारतीय डाक का एक पार्सल मिला जिसमें मेरा पर्स और एक खत था। उस खत में लिखा था- मुझे आपका पर्स दिल्ली मेट्रो मे मिला और मैं इसे लौटा रहा हूं।' गुरप्रीत का पर्स नोएडा निवासी सिद्धार्थ मेहता को मिला था।

लोगों ने कहा, 'इंसानियत आज भी जिंदा है'

लोगों ने कहा, 'इंसानियत आज भी जिंदा है'

खत में सिद्धार्थ ने पर्स में मिली सभी चीजों की जानकारी लिखी थी। गुरप्रीत ने इस घटना को फेसबुक पर शेयर करते हुए सिद्धार्थ का शुक्रिया अदा किया है। उनके पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई लोगों का कहना है कि सिद्धार्थ एक हीरो हैं। वहीं कुछ ने कहा कि इस घटना को देखकर यकीन हो गया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

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