कौन थे जस्टिस कमल नारायण सिंह जिनके नाम दर्ज है अनोखा रिकॉर्ड! केवल 17 दिनों के लिए बने थे CJI
The Shortest-Serving CJI: भारत की न्यायपालिका का इतिहास कई दिग्गज न्यायाधीशों से भरा हुआ है, जिन्होंने अपने फैसलों और नेतृत्व से देश के संविधान को मजबूत किया है। 14 मई को देश को बीआर गवई के रूप में अपना 52वां चीफ जस्टिस मिला। CJI गवई का कार्यकाल करीब 6 महीने का होगा। इसके बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि बीवी नागरत्ना (BV Nagarathna) के रूप में देश को अपनी पहली महिला CJI मिल सकती हैं।
अगर ऐसा होता है तो जस्टिस नागरत्ना का CJI के तौर पर कार्यकाल करीब 36 दिनों का रहेगा क्योंकि 2027 में ही वो रिटायर हो रही हैं। हालांकि, भारत में ऐसे CJI भी हो चुके हैं जिनका कार्यकाल 36 दिनों से भी कम का रहा है।CJI की लिस्ट में एक ऐसा नाम भी है, जो अपने सबसे छोटे कार्यकाल के लिए जाना जाता है - जस्टिस कमल नारायण सिंह (Justice Kamal Narain Singh).

17 दिन के लिए बने CJI
भले ही उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में सिर्फ 17 दिन की सेवा दी, लेकिन उनकी कानूनी समझ, अनुभव और योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। एक तरफ जहां कई मुख्य न्यायाधीश वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व करते हैं, वहीं जस्टिस कमल नारायण सिंह ने बहुत ही सीमित समय में न्यायिक व्यवस्था में अपनी छाप छोड़ी। आइए जानते हैं उनके जीवन, करियर और इस अनोखे रिकॉर्ड के पीछे की पूरी कहानी...
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सबसे कम समय तक CJI रहने का रिकॉर्ड
भारत के न्यायिक इतिहास में जस्टिस कमल नारायण सिंह का नाम एक अनोखे रिकॉर्ड के लिए याद किया जाता है। वे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) पद पर सबसे कम समय तक रहने वाले जज थे। उनका कार्यकाल केवल 17 दिनों का था, जो 25 नवंबर 1991 से 12 दिसंबर 1991 तक चला।
शुरुआती जीवन और पढ़ाई
जस्टिस कमल नारायण सिंह का जन्म 13 दिसंबर 1926 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में हुआ था। उन्होंने एल.आर.एल.ए. हाई स्कूल, सिरसा और इविंग क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई की और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
न्यायिक करियर की शुरुआत
उन्होंने 1957 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। वे मुख्य रूप से सिविल, टैक्स और संविधान से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ माने जाते थे। 1970 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 1972 में स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया। 1986 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।
मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल
25 नवंबर 1991 को जस्टिस सिंह को भारत का 22वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। लेकिन उनकी उम्र पहले ही 65 के करीब थी, जो कि सेवानिवृत्ति की अधिकतम उम्र है। इसी वजह से उनका कार्यकाल केवल 17 दिनों का रहा और 12 दिसंबर 1991 को वे सेवानिवृत्त हो गए।
सेवानिवृत्ति के बाद का योगदान
मुख्य न्यायाधीश के तौर पर भले ही उनका कार्यकाल छोटा रहा हो, लेकिन उनका न्यायिक अनुभव और संविधान की गहरी समझ उन्हें खास बनाती है। रिटायरमेंट के बाद वे 1991 से 1994 तक भारत के 13वें विधि आयोग के अध्यक्ष भी रहे।
लंबी उम्र और सम्मानजनक विदाई
जस्टिस कमल नारायण सिंह ने 95 वर्ष की उम्र में 8 सितंबर 2022 को अंतिम सांस ली। उनके योगदान को भारत के न्यायिक इतिहास में सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।
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