भारत में 2021 में 127 टाइगर की हुई मौत लेकिन दोगुनी हुई टाइगर की आबादी
नई दिल्ली, 10 फरवरी। भारत में बाघों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। भारत में लगातार बाघों की संख्या कम होती जा रही है। राज्यसभा में सरकार द्वारा दिए आंकड़ों के अनुसार 2021 में कुल 127 बाघों की मौत हो गई। जो पिछले साल की तुलना में बहुत अधिक है। 2021 में कुल 106 बाघों की मौत हुई थी। वही 2019 में बाघों की मौत की संख्या 96 थी। ये आंकड़ें जता रहे है कि देश में साल दर साल मरने वाले बाघों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

राज्यसभा में पूरक सवालों के जवाब में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि बिल्ली की मौत के कई कारण हैं, जैसे वृद्धावस्था, बाघों के बीच आपस में लड़ाई, बिजली का करंट लगना और अवैध शिकार। उन्होंने कहा जैसा कि राज्यों द्वारा बताया गया है, 2021 के दौरान बाघों की मृत्यु दर 127 थी। पिछले साल, मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 42 मौतें हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र में 27, कर्नाटक में 15 और उत्तर प्रदेश में 9 बाघों की मौतें हुईं।
यादव ने कहा जंगली में बाघों का औसत जीवन काल आमतौर पर 10-12 वर्ष होता है और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में, वृद्धावस्था, रोग, आंतरिक लड़ाई, बिजली का झटका, खर्राटे लेना, डूबना, सड़क, रेल हिट, और बहुत अधिक जैसे कारक हैं। बाघों सहित बड़ी बिल्लियों में देखी गई शिशु मृत्यु दर, बाघों की मृत्यु के अधिकांश के लिए जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि सरकार पशु-मानव संघर्षों के प्रबंधन के लिए प्रयास कर रही है और अवैध शिकार के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी कर रही है। हालांकि, मंत्री ने कहा कि बाघों की आबादी दोगुनी हो गई है।
2018 में किए गए नए अनुमान के अनुसार बाघों की संख्या में 2,967 से 3346 के बीच है। अनुमानित संख्या 2,226 [रेंज 1945-2491] के 2014 के अनुमान की तुलना में बढ़ी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाघ रेंज वाला देश है और अब वैश्विक बाघ आबादी का 75 प्रतिशत से अधिक है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम का दैनिक प्रबंधन और कार्यान्वयन राज्यों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा बाघों के अवैध शिकार के मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की जानकारी प्रोजेक्ट टाइगर डिवीजन/राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण स्तर पर एकत्रित नहीं की गई है।












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