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कश्मीर: एक मौत, तीन सवाल और सुलगती घाटी

By Bbc Hindi
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    श्रीनगर में शुक्रवार को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक वाहन की चपेट में आए तीन आम लोगों में से एक की मौत हो गई.

    तो पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा, "पहले उन्होंने लोगों को जीप के आगे बांधा और प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए गांवों के इर्दगिर्द उनकी परेड कराई. अब वो अपनी जीप प्रदर्शनकारियों के ऊपर चढ़ा रहे हैं. महबूबा मुफ़्ती साहिबा क्या ये आपका नया SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीज़र्स) है. संघर्ष विराम का मतलब बंदूकों का इस्तेमाल नहीं करना है तो जीप का इस्तेमाल करो?"

    ख़ुद उमर अब्दुल्ला सरकार का सड़कों पर जुटने वाली भीड़ से निपटने का ट्रैक रिकॉर्ड भी कुछ ख़ास नहीं था.

    उनके मुख्यमंत्री रहते साल 2010 की गर्मियों में हुए प्रदर्शनों के दौरान अर्धसैनिक बलों और जम्मू और कश्मीर पुलिस की कार्रवाई में 120 से ज़्यादा आम लोगों की मौत हुई थी.



    https://twitter.com/OmarAbdullah/status/1002594583807750145

    बढ़ रहे हैं उग्र प्रदर्शन

    इनमें से ज़्यादातर लोगों की मौत गोलियों, रबर पेलेट या फिर आंसू गैस के गोलों की वजह से हुई थी जो उनकी कमर के ऊपर दागे गए थे.

    तब से सुरक्षा बलों की ओर से आजमाए जाने वाले 'स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीज़र्स' यानी कार्रवाई के मानक तरीकों के मुद्दे पर बहस होती रही है.

    आठ साल के दौरान इस बारे में चिंता कई गुना बढ़ गई है. सड़कों पर होने वाले प्रदर्शन दिनों दिन उग्र हो रहे हैं. युवाओं के अंदर का डर ख़त्म हो गया है.

    ख़ासकर साल 2016 में पेलेट गन के भरपूर इस्तेमाल के बाद से. जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई और कई सैकेड़ा लोग घायल हो गई.

    कुछ ने अपनी आंखों की रोशनी आंशिक या पूरी तरह गंवा दी. कश्मीर में भीड़ को काबू करने के लिए सख्त तरीकों का इस्तेमाल ख़ासा बढ़ गया है.



    प्रदर्शनकारी
    EPA
    प्रदर्शनकारी

    कड़वी यादों में इजाफा

    अगर साल 2010 में प्रदर्शनकारी युवाओं की मौत हवा या ज़मीन के बजाए प्वॉइंट ब्लैंक से दागे गए आंसू गैस के गोलों से हुई.

    और साल 2016 में कश्मीरियों ने पेलेट की बौछार का सामना किया. क्या 2018 सुरक्षा बलों के वाहनों से कुचले जाने का साल होने जा रहा है?

    नौहट्टा में तीन प्रदर्शनकारियों के एक वाहन की चपेट में आने की ताज़ा घटना ने पांच मई को डाउनटाउन (शहर के केंद्रीय भाग) के एक अन्य इलाक़े (सफाकदल) में एक आम कश्मीरी की मौत की कड़वी यादों में इजाफा कर दिया है.

    उनकी मौत से जुड़ा एक वीडियो कश्मीर में वायरल हो चुका है. इस वीडियो में एक सुरक्षा वाहन उन्हें दो बार टक्कर मारते नज़र आता है.

    इस वीडियो को लेकर लोगों का गुस्सा भड़क उठा था.

    गुस्से में घाटी के लोग

    ताज़ा घटना की वीडियो फुटेज में नाराज़ लोगों की भीड़ के बीच से सड़क पर गुजर रहे हैं. इनके बीच से सीआरपीएफ का वाहन रास्ता बनाने की कोशिश में है.

    प्रदर्शनकारी इस बुलेटप्रूफ वाहन पर पत्थर और लाठियों से हमला कर देते हैं.

    गुस्से में दिख रही भीड़ वाहन को तीन तरफ से घेर लेती है और एक प्रदर्शनकारी रफ़्तार से चल रही जीप के बोनट पर चढ़ जाता है.

    ड्राइवर वाहन की रफ़्तार और तेज़ कर देता है और निकल जाता है.

    ये साफ नहीं है कि ये वीडियो तीन लोगों को कुचले जाने की घटना के बाद फ़िल्माया गया है या फिर तस्वीरें पहले क़ैद की गई हैं.

    घायलों में से एक की बाद में अस्पताल में मौत हो गई.

    मौत की वजह हादसा?

    अख़बारों और सोशल मीडिया में आई तस्वीरों में दो युवक दो अलग-अलग वक्त पर वाहन के नीचे नज़र आते हैं और लोग उन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

    इनमें से एक वाहन के नीचे है और दूसरा आगे के दो पहियों के बीच फंसा है. ये जाहिर है कि दोनों घायलों को निकालने के लिए वाहन रुका.

    किसी भी तस्वीर में तीसरा पीड़ित कैसर बट नहीं है. उनकी ही मौत हुई है.

    इस मामले को लेकर कश्मीर में भीड़ को काबू करने के लिए होने वाली कार्रवाई में गैरक़ानूनी और अनैतिक तरीकों के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं.

    सीआरपीएफ के प्रवक्ता का कहना है कि वाहन पर अचानक हमला हुआ और ड्राइवर ने गाड़ी रफ़्तार बढ़ा दी. उन्होंने इसे 'दुर्घटनावश हुई मौत' बताया.

    तीन सवालों की जांच जरूरी

    लगातार तीन 'दुर्घटनाएं' होने को महज संयोग मानना थोड़ा मुश्किल लगता है. जो वीडियो सामने आया है उसमें गाड़ी नाराज़ लोगों की भीड़ के बीच है.

    इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भीड़ वाहन पर काबू कर सकती थी और ऐसे में गाड़ी के अंदर फंसे सुरक्षा जवान की जान जोखिम में पड़ सकती थी.

    लेकिन तीन ऐसे सवाल हैं जिनकी वजह से गहन छानबीन जरूरी लगती है. वीडियो से सबूत मिलता है कि तीनों लोग उसी वक्त और उसी जगह नहीं कुचले गए.

    हो सकता है कि ये घटना पहले हुई हो या फिर बाद में हुई हो. ये जरूरी नहीं है कि वाहन जिस भीड़ में घिरा था वो तब उतनी ही बेलगाम और गुस्से में रही हो.

    ये गाड़ी दो बार कम से कम एक या दो मिनट के लिए रुकी ताकि दो घायलों को निकाला जा सके. उस वक़्त भीड़ ने गाड़ी पर हमला क्यों नहीं किया.

    तीसरा और अहम सवाल है कि एक अकेला सुरक्षा वाहन उस इलाके से क्यों गुजर रहा था जहां जोरदार प्रदर्शन हो रहा था?

    क्या ये सुरक्षा की ख़ामी और सामान्य प्रक्रिया का उल्लंघन है?

    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    इस घटना को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और ये भी जांच की जानी चाहिए कि क्या सुरक्षा जवान अपने उतावलेपन को काबू कर सकते थे.

    या फिर ये एक हादसा था या फिर प्रदर्शनकारियों को वाहन से कुचलना नई कार्यप्रणाली का हिस्सा है.

    घटनाक्रम चाहे जो भी रहा हो लेकिन कश्मीर की तेज़ी से भर रही कब्रगाहों में एक और मरने वाले का नाम जुड़ गया है. दो अन्य घायल ज़िंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

    कश्मीर के संघर्ष के इतिहास में इन तीनों गिनती भले ही हाशिए पर रहे लेकिन इस घटना की कश्मीरियों की मानसिकता पर अमिट छाप रहेगी.

    भारतीय सुरक्षा बलों के ख़िलाफ उनका गुस्सा बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. ये घटना रमज़ान के संघर्ष विराम के दौरान हुई है.

    तमाम घटनाएं चिंता का सबब

    इस संघर्ष विराम की वकत भले ही सांकेतिक से ज़्यादा न हो लेकिन इससे कश्मीर घाटी की घुटन भरी हवाओं के छंटने की थोड़ी सी उम्मीद बंधी थी.

    शनिवार को 25 साल के कैसर बट के जनाज़े के दौरान घाटी में प्रदर्शन हुए और सरकार ने प्रतिबंध लगाकर और आंसू गैस के गोले दागकर जवाब दिया.

    इंटरनेट बंद करने जैसे कम घातक उपाय भी आजमाए गए. ये तमाम घटनाएं चिंता का सबब हैं.

    क्या इसके मायने ये निकाले जाएंगे कि गर्मियों के दौरान गुस्से की एक और लहर देखने को मिलेगी और संघर्ष विराम वक्त से पहले ही दफन हो जाएगा.

    हालांकि किसी नतीजे पर पहुंचना अभी जल्दीबाज़ी होगी. कश्मीर की राजनीति के बारे में भी यहां के मौसम की तरह अनुमान नहीं लगाया जा सकता है.

    बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार मौजूदा हालात से कैसे निपटती है और इसका बड़ा सुरक्षा अमला ज़मीन पर कैसे काम करता है.

    (ये लेखक के निजी विचार हैं)

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    BBC Hindi
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    English summary
    1 dead after being mowed down by CRPF vehicle, Here is three questions.

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