Telangana Multi crop खेती की तैयारी में, ICAR में फसलों के 150 से अधिक जर्मप्लाज्म नमूने जुटाए गए
तेलंगाना के वारंगल, महबूबाबाद, जयशंकर-भूपालपल्ली और मुलुगु जिलों में लगभग एक सप्ताह (13 से 20 दिसंबर) तक सैंपल कलेक्शन किया गया। कृषि-बागवानी फसलों की 46 प्रजातियों से संबंधित 150 से अधिक जर्मप्लाज्म नमूने जमा किए गए।

Telangana Multi crop खेती की तरफ बढ़ने को तैयार है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (NBPGR) में राष्ट्रीय अन्वेषण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हैदराबाद ICAR के क्षेत्रीय कार्यालय में प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय (PJTSAU) के सहयोग से Multi-crop जर्मप्लाज्म अन्वेषण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सैंपल कलेक्शन के दौरान हैदराबाद के आईसीएआर-एनबीपीजीआर में प्रमुख वैज्ञानिक, डॉ एन शिवराज और डॉ एल सरवनन की प्रमुख भूमिका रही। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में डॉ शिवराज ने कहा, वर्ष 1993-1994 के दौरान, आदिलाबाद जिले में धान का राष्ट्रीय अन्वेषण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। अलग-अलग वेराइटी के सैंपल जमा किए गए। हालांकि, फिलहाल इस क्षेत्र में चावल की केवल 3-4 किस्मों की खेती की जा रही है।
उन्होंने कहा, अधिकांश पारंपरिक फसलें विलुप्त हो रही हैं। बहु-फसल अन्वेषण (Multi-crop exploration) कार्यक्रम फसलों की जीन का संरक्षण करने में मदद करेगा। फसल के नमूनों को नई दिल्ली के राष्ट्रीय जीन बैंक में प्रोसेस करने के बाद लंबे समय तक बचाए रखने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर फसलों को दोबारा हासिल किया जा सकता है।
डॉ एन शिवराज के मुताबिक जंगली परिस्थितियों वाले फसलों की प्रजातियों में उपयोगी जीन का इस्तेमाल कर खेती के दौरान इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। ये फसल की वेराइटी को सुधारने वाले कार्यक्रमों में उपयोगी होते हैं।












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