क्या आम आदमी पार्टी पहाड़ की राजनीति में भी सफल हो पायेगी?
शिमला, 30 अप्रैल। हिमाचल की राजनीति में चर्चाओं के केन्द्र में आई आम आदमी पार्टी प्रदेश में अपनी पैठ बनाने के लिये कोशिशों में जुटी है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की पार्टी पंजाब में मिली जीत के बाद साथ लगते पहाड़ी प्रदेश में भी सत्ता हासिल कर पायेगी? आप मंडी में बड़ा रोड शो करने के बाद कांगडा जिला में रैली कर प्रदेश की जनता से एक मौका देने की बात कर चुकी है।आप ने जिस तरीके से बिना अपने संगठन के मंडी व कांगड़ा में सफल कार्यक्रम किये हैं उसे देखकर हर कोई हैरान है। इससे भाजपा व कांग्रेस नेताओं की चिंता बढी है। लेकिन आप से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हैं। आम आदमी पार्टी के कुनबे में लगातार भाजपा व कांग्रेस में उपेक्षा महसूस कर रहे लोग जुड़ते जा रहे हैं।

राजनैतिक जानकार रविन्दर सूद बताते हैं कि आप को हिमाचल में मिल रहा जनसमर्थन दो ही पारंपरिक पार्टियों के लिये खतरे की घंटी है। उनका मानना है कि लोग देनों ही दलों से तंग आ चुके हैं व आप में उन्हें एक नई उम्मीद दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक नये विकल्प के तौर पर आम आदमी पार्टी उभर रही है। पार्टी अभी तक कांग्रेस का ही नुकसान कर रही है जिससे कांग्रेस चुनावी मुकाबले से बाहर होती दिखाई दे रही है। इससे भाजपा नेता ज्यादा चिंतित नहीं हैं लेकिन जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जायेंगे, वैसे ही आप और मजबूत होकर उभरेगी और पंजाब का असर तो यहां भी दिखाई देगा। सूद बताते हैं कि आप की आज पहले वाली स्थिति नहीं है। आप के पास कांग्रेस से अधिक संसाधन हैं।

लेकिन, प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर प्रदेश में आप को मिल रहे जनसमर्थन से ज्यादा चिंतित नहीं हैं। वह बताते हैं कि प्रदेश बाहरी लोगों को स्वीकार नहीं करेगा। हिमाचल प्रदेश छोटा राज्य है व यहां के लोगों की आपस में भावनाएं व रिश्ते जुड़े हुए हैं। ये बाहरी लोगों को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आम आदमी पार्टी का धरातल पर कोई वजूद नहीं है। पंजाब में यह सत्ता में आ गए। लेकिन मैदानी क्षेत्र और पहाड़ी राज्य में बहुत अंतर है। पहाड़ चढ़ते चढ़ते बाहरी नेताओं की सांस भारी हो जाती है।

पंजाब में जीत हासिल करने के बाद हिमाचल को लेकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता उत्साहित हैं। लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या केजरीवाल यहां भी पंजाब जैसा कोई करिश्मा कर पाएंगे? हिमाचल में नवंबर 2022 में चुनाव होने हैं यानी चुनाव में सात महीने का वक्त बचा है। प्रदेश की बड़ी सीमा पंजाब से लगती है और दोनों राज्यों के लोगों का व्यवसाय या पर्यटन के लिहाज से एक दूसरे के राज्य में आना जाना भी है। इसलिए क्या पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत का असर हिमाचल की सियासत पर हो सकता है यह एक बड़ा सवाल है। हालांकि पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सियासत पूरी तरह अलग है। पंजाब में सिख सियासत हावी रही है जबकि हिमाचल में 97 फ़ीसदी हिंदू आबादी है।
प्रदेश के राजनैतिक इतिहास पर नजर दौडाई जाये तो हिमाचल की राजनीति में तीसरे विकल्प की कोई संभावना अब तक कामयाब नहीं हो पाई है। यहां भाजपा और कांग्रेस ही बारी बारी सत्ता संभालते रहे हैं। हालांकि, 1998 में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई थी और कुछ असर पैदा किया था। लेकिन 2004 में उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था।

68 सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 44 सीटों पर जीत हासिल की थी और जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन बीते साल 3 सीटों के विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में हार ने भाजपा के तमाम समीकरणों को उलट-पुलट कर दिया। कांग्रेस यहां लंबे वक्त तक सत्ता में रही है और इस बार फिर से वापसी का सपना देख रही है लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों ही गुटबाजी से जूझ रहे हैं। हिमाचल में आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी और कांग्रेस के कई बड़े चेहरे आने वाले दिनों में उनकी पार्टी में शामिल होंगे।

हिमाचल बीजेपी में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के खेमों में सियासी अदावत होने की बात सामने आती रही है। धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं और उनकी भी ख़्वाहिश राज्य का मुख्यमंत्री बनने की है। बीते साल हुए उपचुनाव में जब बीजेपी को हार मिली तो राज्य इकाई में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई थी।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को जेपी नड्डा का करीबी माना जाता है और उपचुनाव में हार के बाद जब जयराम ठाकुर को बदलने की चर्चाएं तेज हुई थीं तो नड्डा के कारण ही वह मुख्यमंत्री बने रहे थे।
बात कांग्रेस की करें तो कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी और सांसद प्रतिभा सिंह, वरिष्ठ नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू, आशा कुमारी, रामलाल ठाकुर और मुकेश अग्निहोत्री के भी अपने-अपने गुट हैं। हालांकि प्रदेश कांग्रेस की कमान प्रतिभा सिंह को दी जा चुकी है। यह कहा जाता है कि जिन राज्यों में कांग्रेस और भाजपा सीधे मुकाबले में हैं वहां आम आदमी पार्टी के आने से कांग्रेस को नुकसान होता है। यह फीडबैक कांग्रेस हाईकमान के पास भी है और इसलिए पार्टी हिमाचल को लेकर बेहद सतर्क है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पंजाब में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत से यह संदेश नहीं जाता कि वह बाकी राज्यों में भी ऐसा कुछ कर पाएगी क्योंकि पंजाब के साथ ही गोवा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भी चुनाव हुए लेकिन पंजाब को छोड़कर इन राज्यों में आम आदमी पार्टी पस्त हो गई। हालांकि गोवा में उसने दो सीटें जीती हैं। पांच राज्यों में चुनावी हार के बाद कांग्रेस हिमाचल और गुजरात में जीत हासिल करना चाहती है जबकि आम आदमी पार्टी इन दोनों ही राज्यों में मुख्य विपक्षी दल बनने के लिए जोर लगा रही है। देखना होगा कि आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश में कितनी सफल होती है।












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