PICS: भारत में भी है मिनी इजरायल, यहां हमारे बीच रहते हैं ये लोग
साल 1990 में इजरायल के पर्यटकों ने इस गांव में आना शुरू किया था। तब से लेकर अब तक इस गांव की संस्कृति व शैली पर इजरायल का प्रभाव देखने को मिलता है।
इशिमला। एक ओर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां अपनी इजरायल यात्रा के तहत तेल अवीव पहुंच रहे हैं व दुनिया भर की नजरें उनकी ओर हैं। वहीं एक तेल अवीव भारत में भी बसता है। हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल धर्मशाला से सटे धर्मकोट गांव की जो वर्तमान में मिनी इजरायल के नाम से जाना जाता है। यहां यहूदियों की बसती है जो भारत आकर अपने देश की मिट्टी की सुगंध यहां पाते हैं। उन्हें यहां रहकर कभी अहसास नहीं होता कि वो अपने देश से बाहर हैं।


धर्मशाला से सटे धर्मकोट की खासयित ये है कि यहां भारत में रहकर भी लोग तेल अवीव के समय के साथ चलते हैं। यहां आने वाले यहूदी बखूबी अपना समय यहां हंसी-खुशी बिताते हैं। साल 1990 में इजरायल के पर्यटकों ने इस गांव में आना शुरू किया था। तब से लेकर अब तक इस गांव की संस्कृति व शैली पर इजरायल का प्रभाव स्पष्ट देखने को मिलता है।


धर्मकोट गांव में प्रवेश करते ही संपर्क मार्गों, दुकानों, रेस्टोरेंट व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हिब्रू भाषा में लिखे बोर्ड नजर आते हैं। रेस्टोरेंटों व होटलों में बजने वाले म्यूजिक की धुनें भी इजरायल के प्रमुख संगीतकारों की ही सुनाई पड़ती हैं। इजरायल पर्यटक यहां हर वो काम सीखने का प्रयास करते हैं जो जीवनयापन के लिए आवश्यक है। यहां तक कि क्षेत्र में शू मेकर का काम सीखने में भी इन्हें आनंद महसूस होता है। आज यहां की दुकानों में आपको हिब्रू में लिखे बोर्ड मिलेंगे। स्थानीय घड़ियों में तेल अवीव का समय दर्शाया जाता है। ग्रामीणों में भी इजरायली रहन-सहन का प्रभाव देखने को मिलने लगा है। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि हिमालय की गोद में एक छोटा सा इजरायल भारत में बसा हुआ है।

रेस्टोरेंट के मीनू कार्ड हिब्रू भाषा में
इजरायली पर्यटकों को लुभाने के लिए रेस्टोरेंट के मीनू कार्ड में भी इजरायल के व्यंजनों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। हालांकि इजरायल से आने वाले पर्यटक स्थानीय संस्कृति व लोक परंपरा के प्रति काफी रुचि रखते हैं। जिसके चलते स्थानीय महिलाएं व युवक विभिन्न प्रकार के कोर्स संचालित कर इजरायल पर्यटकों को लोक संस्कृति के संबंध में शिक्षित कर रोजगार कमा रहे हैं। धर्मकोट गांव में पाक विद्या, योग, म्यूजिक व गद्दी डांस सिखाने के कई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यही नहीं कश्मीरी युवकों ने भी यहां दुकानें खोली हैं जहां पर इजरायल पर्यटकों को कशीदाकारी व आर्टिफीशियल ज्वैलरी के कोर्स करवाए जाते हैं। स्थानीय रेस्त्रां में भी उन्हें लजीज इजरायल व्यंजन मिल रहे हैं। रेस्त्रां मालिकों ने बताया कि मांग के अनुरूप हर चीज यहां उपलब्ध है।

सेब शहद और मछली की यहां भारी मांग है। इंटरनेट व साइबर कैफे में रखे कीबोर्ड व डेस्कटॉप की विंडोज भी हिब्रू भाषा में ही नजर आती है। इजरायल पर्यटकों को धर्म के साथ जोड़े रखने के लिए ये शाबाद हाउस खोला गया है। इजरायलियों को यहूदी धर्म की शिक्षा देने के लिए यहूदियों ने धर्मकोट व भागसूनाग में दो शाबाद हाउस खोले हैं। इन शाबाद हाउसों में रब्बी दुनिया भर से यहां आने वाले पर्यटकों को यहूदी धर्म के प्रति शिक्षित करते हैं। ये शाबाद हाउस कुछ साल पहले उस समय खोले गए थे जब इजरायल से आने वाले पर्यटक धौलाधार की इन वादियों में आकर नशे के आदि होने लग पड़े थे। जब ये सूचना इजरायल सरकार को मिली तो उन्होंने धार्मिक विद्वानों से गहन मंथन करने के बाद धर्मकोट व भागसूनाग में दो शाबाद हाउस खोलने का निर्णय लिया था। इन शाबाद हाउस में हर शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
2014 में सुरक्षा की दृष्टि से तैनात थी यहां पर पुलिस की बटालियन

2014 में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों द्वारा इजरायल पर्यटकों को निशाना बनाने के चलते सुरक्षा की दृष्टि से धर्मकोट क्षेत्र में पुलिस की भारी तैनाती की गई थी। इस घटना के उपरांत स्थानीय लोगों व इजरायल पर्यटकों में तनातनी भी रही लेकिन समय बीतने के साथ ही लोगों ने अपनी आर्थिक उन्नति को देखते हुए इन सभी बातों से समझौता कर लिया।

शबात इजरायल में साप्ताहिक विश्राम का दिन है जो शनिवार को मनाया जाता है। इस दिन इजरायल पूरा वक्त परिवार और दोस्तों के बीच गुजारते हैं। इस दिन सार्वजनिक यातायात और कारोबार बंद रहते हैं। जरूरी सेवाएं नाम मात्र के स्टाफ पर निर्भर रहती हैं। ज्यादा से ज्यादा सैनिकों को छुट्टी दे दी जाती है। दूसरे धर्मों के ज्यादातर लोग साप्ताहिक छुट्टी का लुत्फ समुद्र तटों, मनोरंजन की जगहों और घर के बाहर अन्य कार्यक्रमों के जरिए उठाते हैं। यहूदी श्रद्धालु इस दिन कई घंटे उत्सव संबंधी खानपान और सिनेगॉग सर्विस में बिताते हैं। वे इस दिन यात्रा करने से बचते हैं और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करते।












Click it and Unblock the Notifications