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क्या हिमाचल प्रदेश में गिर जाएगी कांग्रेस सरकार? सीएम सुक्खू ने 5-6 विधायकों को उठा ले जाने का किया दावा

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सीआरपीएफ और हरियाणा पुलिस पर 5-6 विधायकों को अपने काफिले के साथ ले जाने का दावा किया है। इससे पहले बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के अल्पमत में आने का दावा किया था। दोनों ओर से इस तरह के दावों से हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

उधर हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंगलवार को कहा है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने राज्य विधानसभा में बहुमत खो दिया है।

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हिमाचल के सीएम ने बीजेपी पर लगाया गुंडागर्दी का आरोप
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया के सामने आरोप लगाया है कि 'जिस तरह से मतगणना शुरू हुई और विपक्ष के नेताओं ने मतदान अधिकारियों को बार-बार धमकाया यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है.....उन्होंने काफी समय तक काउंटिंग रोक दी....'

5-6 विधायकों को लेकर गए हैं- मुख्यमंत्री
उन्होंने कहा, 'मैंने हिमाचल बीजेपी के नेताओं से आग्रह किया कि सब्र रखें, लोगों पर दबाव न डालिए और विधायकों को सीआरपीएफ और हरियाणा पुलिस का काफिला जो लेकर गई है...वो 5-6 विधायकों को लेकर गए हैं...। निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि उनके परिवार के लोग उनसे संपर्क कर रहे हैं....मैं उनसे कहूंगा कि अपने परिवारों से संपर्क करें....चिंता की कोई बात नहीं है।'

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर राज्य में गुंडागर्दी करने का भी आरोप लगाया है और विश्वास जताया है कि हिमाचल प्रदेश की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी।

सरकार बहुमत खो चुकी है- नेता प्रतिपक्ष
इससे पहले जयराम ठाकुर से जब सवाल किया गया था कि क्या बीजेपी फ्लोर टेस्ट की मांग करेगी तो ठाकुर ने कहा, 'कल बजट पेश किया जाएगा। कल हम बजट पर चर्चा करेंगे और तब हम वहां पर स्थिति देगेंगे। लेकिन, मैं देख सकता हूं कि सरकार बहुमत खो चुकी है।'

क्रॉस वोटिंग की उम्मीदों के सहारे जीती बीजेपी
मंगलवार को प्रदेश में राज्यसभ के चुनाव को लेकर भी काफी गहमागहमी रही और बीजेपी ने उम्मीद जताई थी कि उसका उम्मीदवार चुनाव जीत जाएगा। राज्य के 68 विधायकों में से 67 ने राज्यसभा चुनाव के लिए वोट डाले।

कांग्रेस एमएलए सुदर्शन सिंह बबलू मतदान के लिए नहीं पहुंच पाए। वह बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती है। राज्य में राज्यसभा की एक ही सीट के लिए चुनाव करवाए गए, जिसमें कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और बीजेपी के हर्ष महाजन के बीच बहुत ही कड़ा संघर्ष देखने को मिला।

कांग्रेस के 6 और उसे समर्थन देने वाले 3 निर्दलीय विधायकों के क्रॉस वोटिंग से सिंघवी और महाजन को मतगणना में 34-34 वोट मिले और परिणाम टाई हो गया।

फिर लॉटरी से रिजल्ट निकला और भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन की लॉटरी लग गई। हाल के बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी हार स्वीकार करने में देरी नहीं की। कांग्रेस की ओर से यह प्रतिक्रिया आई कि उसके 6 विधायकों ने अपना ईमान बेच दिया।

हर्ष महाजन तीन बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री भी हैं। 2022 में विधानसभा चुनावों से पहले सितंबर में वह पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे।

संख्या गणित के हिसाब से 68 एमएलए में कांग्रेस के 40 विधायकों और 3 निर्दलीय एमएलए के समर्थन की वजह से पार्टी को स्पष्ट बहुमत था। लेकिन, सिर्फ 25 एमएलए होने के बावजूद भाजपा ने सिंघवी के खिलाफ महाजन को उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया था और आखिरकार वह चुनाव जीतने में सफल हो गई।

कांग्रेस रविवार को ही अपने विधायकों को पार्टी उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया था। इसका मतलब था कि सभी विधायकों को पार्टी के आधिकारिक एजेंट को अपना बैलेट दिखाना जरूर हो गया था। लेकिन, फिर भी क्रॉस वोटिंग रुक नहीं पाया।

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