हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017: सीट नंबर 16 कांगड़ा (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये
शिमला। कांगड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 16 है। कांगड़ा जिला में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 68,243 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में पवन काजल इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। कटोज राजाओं की कर्मभूमि कांगड़ा पहले नगरकोट के नाम से प्रसिद्ध था और ऐसा कहा जाता है कि इसे राजा सुसर्माचंद ने महाभारत के युद्ध के बाद बसाया था। छठी शताब्दी में नगरकोट जालंधर अथवा त्रिगर्त राज्य की राजधानी था। राजा संसारचंद (18वीं शताब्दी के चतुर्थ भाग में) के राज्यकाल में यहाँ पर कलाकौशल का बोलबाला था। कांगड़ा के शासकों की निशानी किला जिसे राजा भूमि चंद्र ने बनवाया था। आज भी अपनी शौर्यगाथा का मुंह बोलता प्रमाण है। वाणगंगा नदी के किनारे बना यह किला 350 फीट ऊँचा है। इस किले पर अनेक हमले हुए हैं। सबसे पहले कश्मीर के राजा श्रेष्ठ ने 470 ईस्वी में इस पर हमला किया। सन् 1886 में यह किला अंग्रेजों के अधीन हो गया।


महमूद गजनवी ने लूटा यह शहर
बदलते जमाने में कांगड़ा के ब्रजेशवरी मंदिर ने खूब ख्याति अर्जित की है। कहा जाता है पहले यह मंदिर बहुत समृद्ध था। इस मंदिर को बहुत बार विदेशी लुटेरों द्वारा लूटा गया। महमूद गजनवी ने 1009 ई॰ में इस शहर को लूटा और मंदिर को नष्ट कर दिया था। यह मंदिर 1905 ई॰ में विनाशकारी भूकम्प से पूरी तरह नष्ट हो गया था। बृजेश्वरी देवी के मंदिर का सुनहरा कलश इस नगर का प्रधान चिह्न हैं। एक ओर पुराना कांगड़ा तथा दूसरी ओर भवन (नया कांगड़ाा) की नयी बस्तियाँ हैं।
राजनैतिक तौर पर कांगड़ा प्रदेश में एकमात्र ऐसा चुनाव क्षेत्र है। जहां से कभी कोई भी विधायक दोबारा चुनाव लगातार नहीं जीत पाया। हालांकि विद्या सागर जरूर अपवाद रहे हैं। लेकिन उनके राजनिति से हटने के बाद हर चुनाव में नया प्रत्याशी ही चुनाव जीतता आया है। ओबीसी बहुल इस चुनाव क्षेत्र में हर चुनाव में घिरथ बिरादरी ने अपना प्रभाव दिखाया है। बिरादरी जिसके साथ चली,उसने चुनाव भी जीत लिया। चुनाव क्षेत्र को दो भागों में बांटा जा सकता है। ग्रामीण इलाके में ओबीसी मतदाताओं की अचछी खासी तादाद है। हालांकि यहां राजपूत व ब्राहम्ण मतदाता भी हैं। लेकिन दोनों समुदाय के लोग चुनावों में प्रभावी गठजोड़ बनाने में नाकाम होते आये हैं। यही वजह है कि यहां से ओबीसी विधायक ही चुनाव जीतते रहे हैं। चुनावों में ओबीसी व एससी मतदाता एकजुट होते रहे हैं।

कांगड़ा से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 पवन काजल निर्दलीय
2007 संजय चौधरी बसपा
2003 सुरिंदर कुमार कांग्रेस
1998 विद्या सागर चौधरी भाजपा
1993 दौलत राम कांग्रेस
1990 विद्या सागर भाजपा
1985 विद्या सागर भाजपा
1982 विद्या सागर भाजपा
1977 प्रताप चौधरी जनता पार्टी

बिल्डर पवन काजल आज हैं कांगड़ा के विधायक
पवन काजल ने पहली बार कांगड़ा से चुनाव लड़ा व जीत भी गये। पेशे से बिल्डर काजल ने जमा दो तक शिक्षा हासिल की है। उनके दो बेटे हैं। 43 वर्षीय काजल ने अपने पेशे में भी खूब नाम कमाया है। काजल हालांकि शुरू में भाजपा से जुड़े रहे। व जिला कांगडा जिला परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे। और 2012 में बिना किसी राजनैतिक पृष्ठभूमि के निर्दलीय चुनाव जीत कर इतिहास कायम किया। विधायक बनने के बाद काजल ने पाला बदला व कांग्रेस के रंग में रंग गये। लेकिन अब फिर भाजपा में लौटने के लिये जुगत भिड़ा रहे हैं।












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