हिमाचल: सीएम जयराम ठाकुर ने किया कैबिनेट मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा, जानिए किसको क्या मिला

शिमला। बुधवार को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में जय राम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। जयराम ठाकुर के साथ ही 11 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। आज शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को अपने सभी मंत्रियों को विभाग आवंटित कर दिए हैं। हालांकि उन्होंने लोक निर्माण विभाग, पर्यटन, उत्पाद शुल्क, कराधान, राजस्व, गृह विभाग, वित्त मंत्रालय, योजना एवं कार्मिक, सामान्य प्रशासन जैसे विभाग आभी अपने पास रोक कर रखे हैं। इन्हें अभी आवंटित नहीं किया गया है। जानें किसे मिला कौन सा विभाग...

किशन कपूर

किशन कपूर

किशन कपूर को खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले का कार्यभार सौंपा गया है। इससे पहले ये धूमल सरकार में परिवहन मंत्री का जिम्मा संभाल चुके हैं। कपूर धर्मशाला से जीत कर पांचवी बार विधानसभा पहुंचे हैं। किशन कपूर राजनीति के पुराने घोड़े हैं। वे चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्हें अपने गद्दी सुमदाय से अच्छा खासा समर्थन प्राप्त है। धर्मशाला में करीब 18,000 गद्दी जनजातीय के मतदाता हैं और कपूर अपने समेकित वोट बैंक पर अच्छी पकड़ रखते हैं। अगर किशन कपूर की शिक्षा की बात की जाए तो उन्होंने पंजाब विवि से 12वीं पास किया है।

महेंद्र सिंह

महेंद्र सिंह

धर्मपुर से सातवीं बार विधायक चुनकर आए महेंद्र सिंह को सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य सहित कृषि एवं सैनिक वेल्फेयर विभाग दिया गया है। महेंद्र सिंह ने आज तक एक भी चुनाव नहीं हारा है। महेंद्र सिंह के खिलाफ मैदान में कांग्रेस के चंद्र शेखर थे। महेंद्र सिंह ने कांग्रेस के उम्मीदवार चंद्रशेखर को 11964 मतों के अंतर से हराया। एक साधारण परिवार से राजनिति में आकर उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किये। जिससे आज भी उनका एक बड़ा वर्ग मुरीद है। उन्होंने दल भी बदले,लेकिन चुनाव नहीं हारे। भाजपा और कांग्रेस का इस सीट पर अच्छा वोट बैंक माना जाता है।

सुरेश भारद्वाज

सुरेश भारद्वाज

सुरेश भारद्वाज चौथी बार विधायकी जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। उन्होंने शिमला शहरी से निर्दलीय विधायक को हराया था। भारद्वाज को शिक्षा कानून व संसदीय मामले का विभाग दिया है। भारद्वाज पूर्व सांसद और हिमाचल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 65 वर्षीय भारद्धाज बीएससी व ला ग्रेजूयेट हैं। छात्र काल में एबीवीपी से जुड़े रहे। व बाद में राजनिति में आये। 1982 में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे। उसके बाद 2003 से लेकर 2006 तक फिर भाजपा की कमान उन्होंने संभाली। 1990 में पहली बार विधायक चुने गये। उसके बाद 2007 में फिर विधायक बने। और 2012 में भी उन्होंने शिमला से चुनाव जीता।

अनिल शर्मा

अनिल शर्मा

पूर्व कांग्रेसी नेता अनिल शर्मा ने मंडी सीट से इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा ने जीत का उपहार उन्हें ऊर्जा विभाग आवंटित कर दिया है। इससे पहले अनिल शर्मा वीरभद्र सिंह सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। बता दें कि वे सलमान खान की बहन के ससुर भी हैं। अनिल शर्मा पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुख राम के बेटे हैं। मंडी चुनाव क्षेत्र में इस परिवार का अपना जनाधार है। वीरभद्र सिंह की सरकार में अनिल शर्मा पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी में चल रही खटपट के चलते उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था।

सरवीन चौधरी

सरवीन चौधरी

जयराम मंत्रिमंडल में शामिल एक मात्र महिला को शहरी विकास टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के साथ हाउसिंग का कार्यभार सौंपा गया है। वे शाहपुर से चौथी बार जीत कर विधानसभा पहुंची है। सरवीन चौधरी शाहपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीती हैं। वे हिमाचल प्रदेश राज्य विधासभा की सदस्य रह चुकी हैं। कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं और गुरदेव सिंह की बेटी हैं। उनका जन्म 21 अक्तूबर 1966 में हुआ था। उन्होंने क्लासिकल डांस में एम.ए व योगा, पेंटिंग और कुकरी में डिप्लोमा ले रखा है। उनकी शादी ब्रिगेडियर पवन कुमार से हुई है।

रामलाल मार्कंडेय

रामलाल मार्कंडेय

लाहौल-स्पीति विधानसभा से चुनाव जीते रामलाल को कृषि, जनजातीय मामले, सूचना और तकनीकि विभाग दिया गया है। वे पहले भी धूमल सरकार में मंत्री रह चुके हैं। रामलाल मार्कंडेय जनजाति समुदाय से आते हैं। लाहौल स्पीति से रामलाल मार्केंडय 1478 से जीते। रामलाल ने कांग्रेस के रवि ठाकुर को हराया है। मार्कंडेय पत्तन घाटी से आते हैं। रामलाल मार्कंडेय लाहौल के के रहने वाले हैं और यहां पर उनकी मजबूत पकड़ है।

विपिन सिंह परमार

विपिन सिंह परमार

विपिन सिंह परमार स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल शिक्षा आयुर्वेद और विज्ञान तकनीकि का पदभार दिया गया है। परमार सुलह विधानसभा से विधायक हैं। उनके पिता का नाम कंचन सिंह परमार है। उन्होंने ग्रेजुएशन में बीए और एलएलबी भी किया है। सिंह एक एलआईसी एजेंट और गणपति एसोसिएट के बिजनस पार्टनर हैं। उनके ऊपर किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में ही ABVP का दामन थामा था। वे 1980 में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे हैं।

 वीरेंद्र कंवर

वीरेंद्र कंवर

कुटलैहड़ के विधायक वीरेंद्र कंवर को ग्रामीण विकास व पंचायती राज, पशुपालन और मछली पालन विभाग दिया गया है। वे चौथी बार विधानसभा पहुचे हैं। वीरेन्द्र कंवर शुरू से आरएसएस से जुड़े रहे हैं। नादौन में जन्में 53 वर्षीय कंवर ला ग्रेजूयेट हैं। उन्होंने फार्मेसी में डिप्लोमा कोर्स भी किया है। वे केमिस्ट व किसान रहे हैं। उनका एक बेटा व एक बेटी है। 1981 में हमीरपुर से अपने राजनैतिक सफर की शुरूआत की थी। बाद में वे1993 में ऊना में भाजयुमो के जिला अध्यक्ष बने। 2000 में जिला परिषद में चुने गये। पहली बार 2003 के चुनावों में विधायक चुने गये। दूसरी बार 2007 में व तीसरी बार 2012 का चुनाव उन्होंने जीता।

 विक्रम सिंह

विक्रम सिंह

जसवां-परागपुर से चुने गए विधायक विक्रम सिंह को उद्योग श्रम एवं रोजगार, तकनीकि शिक्षा के साथ साथ व्यवसायिक प्रशिक्षण विभाग दिया है। इन्हें पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में विक्रम सिंह ने कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह मनकोटिया को 1862 मतों के अंतर से हराया।विक्रम ठाकुर को राजनीति विरासत में नहीं मिली जसवां के विधायक व्रिकम ठाकुर 28 अगस्त 1964 को जसवां तहसील के जोल गांव में पैदा हुए। विज्ञान स्नातक ठाकुर का एक बेटा व एक बेटी है।

 गोविंद सिंह ठाकुर

गोविंद सिंह ठाकुर

ठाकुर वन मंत्रालय के साथ-साथ परिवहन और युवा सेवा व खेल विभाग मिला है। वे तीसरी बार जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे है। गोविंद सिंहने मनाली से चुनाव जीता था। । 2007 में पहली बार कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये। 2012 में मनाली में विधानसभा क्षेत्र से दोबारा विधायक चुने गये। मौजूदा चुनावों में भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट दिया।

राजीव सहजल

राजीव सहजल

कसौली से तीन बार के विधायक एवं बीजेपी का दलित चेहरा रहे राजीव सहजल को को सामाजिक न्याय, पर्यावरण, कॉरपोरेशन विभाग दिया गया है। भाजपा के प्रत्याशी राजीव सैजल ने कांग्रेस के उम्मीदवार विनोद सुल्तानपुरी को 442 मतों के अंतर से हराया। कसौली विधानसभा क्षेत्र से जीतकर आए पेशे से डाक्टर राजीव सैजल ने 2012 में कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी से मात्र 24 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। राजनिति में आने से पहले वह आर्युवैदिक मेडिकल प्रेक्टिशनर रहे। व इलाके में मशहूर डाक्टर रहे हैं।

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