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पढ़िए हिमाचल पुलिस की एक और काली करतूत, CBI जांच से खुला राज

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    शिमला। कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस के आरोपी सूरज की हवालात में हत्या के मामले में बदनामी झेल रही हिमाचल पुलिस का एक और कारनामा सामने आया है। मंडी में तैनात तीन पुलिस कर्मियों ने एक निर्दोष को मादक पदार्थ रखने के जुर्म में जेल में डाल दिया था। फिर छुड़ाने के लिए बीस लाख की फिरौती भी मांगी। मामले की जब सीबीआई ने जांच की तो पुलिस की काली करतूत की पोल खुली। अब हिमाचल हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। हिमाचल हाईकोर्ट ने अपने पारित आदेशों में सीबीआई को हिमाचल पुलिस के तीन कर्मियों सहित दो अन्य लोगों के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज कर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

    पढ़िए हिमाचल पुलिस की एक और काली करतूत, CBI जांच से खुला राज

    सीबीआई ने मामले की शुरूआती जांच में पाया कि पुलिस थाना सदर मंडी में तैनात एसआई जय लाल तथा इसी थाने के तहत पुलिस सिटी चौकी मंडी में तैनात एएसआई राम लाल व कांस्टेबल प्रदीप कुमार ने मंजीत कुमार और जसबीर सिंह के साथ मिलकर शिकायतकर्ता रवि कुमार के खिलाफ मादक पदार्थ रखने का झूठा मामला बनाया और उससे 20 लाख रुपये की फिरौती की मांग की थी। प्रार्थी रवि कुमार ने इसकी शिकायत पुलिस के उच्च अधिकारियों से भी की थी। जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच भी की गई थी लेकिन उनकी इस कथित साजिश मे शामिल होने के सबूत पाए जाने बावजूद बिना किसी ठोस कारण के आरोपी पुलिसवालों को क्लीन चिट दे दी गई।

    प्रार्थी के पिता रमेश चंद ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट तौर पर कहा था कि मंजीत सिंह, सहायक पुलिस निरीक्षक राम लाल व कांस्टेबल प्रदीप कुमार द्वारा रची गई कथित साजिश के तहत उसके बेटे को झूठे आरोपों के तहत फंसाया गया है। मंजीत पर आरोप लगाया गया है कि वह हरियाणा का रहने वाला है। साजिश के तहत मंजीत ने उसके बेटे को पुलिस की उपस्थिति में बुलाया। होटल, गुरुद्वारे के अलावा अन्य स्थानों पर रोके रखा। उससे 20 लाख रुपये की मांग की। जब पैसे नहीं दिए तो उसके बेटे को इस मामले में फंसवा दिया। जांच के दौरान साबित हुआ था कि राम लाल, प्रदीप कुमार, मंजीत व रवि कुमार एक दूसरे के संपर्क में थे।

    जांच के दौरान यह भी पाया गया था कि मंजीत सिंह और रवि कुमार के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए थे मगर बाद में ये उन आरोपों से बरी हो गए थे। बरी होने के बावजूद मंजीत क्यों इन पुलिस कर्मियों के संपर्क में था। हाईकोर्ट ने प्रदेश पुलिस द्वारा की गई जांच के बाद आरोपी पुलिसवालों को क्लीन चिट देने वाली रिपोर्ट में संशय पाया था, जिस कारण कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने के आदेश दिए थे। सीबीआई द्वारा प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि किए जाने के कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले में नियमित मामला दर्ज करने के आदेश दिए व सीबीआई को आदेश दिए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।

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    English summary
    himachal police falsly framed a boy and demands 20 lakh as ransome to release

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